सिक्किम गंगटोक की सोलो यात्रा

गंगटोक की सोलो यात्रा

गंगटोक की सोलो यात्रा

भारत में महिलाएं को अकेले घूमने या यात्रा पर जाने में बहुत ही सावधानी की जरूरत होती हैं, महिलाएं को बहुत तरह तरह की बातों का सामना करना पड़ता है। हालांकि लोगो की बातों का ज्यादा असर मुझ पर नहीं होता है। हाल ही में अपनी पांचवी सोलो यात्रा पर निकली। मै जब कोई ट्रिप प्लान करती हूं वह किसी ना किसी कारणवश हमेशा ही असफल हो जाती है। इस बार मैंने काफी सोच समझने और रिसर्च के बाद दस दिन की दार्जलिंग और सिक्किम की यात्रा करने का फैसला किया। मै अपनी इस नई और दस की यात्रा को लेकर बेहद ही उत्साहित थी। मैंने कोलकाता से दार्जलिंग जाने के लिए ट्रेन से जाना बेहतर समझा।मैंने शाम को कोलकाता से न्यू जलपाईगुड़ी जाने के लिए ट्रेन पकड़ी।

एक पूरी रात के सफर के बाद मै सुबह न्यू जलपाईगुड़ी पहुंची। न्यू जलपाईगुड़ी पहुँचने के बाद मुझे पता लगा कि, यहां दार्जलिंग के लिए सीधी बस नही है। कुछ ही दूरी पर मुझे एक सूमो नजर आयो जो प्रति सवारी 200 रुपये ले रहा था। मैंने भी पैसे देकर सूमो से ही जाने में भलाई समझी। तभी मुझे वहीं दो विदेशी नजर आयें, मैंने सूमो ड्राइवर से उन्हें भी गाड़ी में बैठाने को कहा।

इसी के साथ मुझे मेरी यात्रा में साथ देने के लिए दो नये साथी मिल गये। अकेले यात्रा करने में यही मजा है, आप इस दौरान नयी जगहों से मुखातिब होते है साथ ही नयी जगह पर नये लोगो से मिलते है। हम सूमो से पहाड़ो और चाय के बागानों से होते दार्जलिंग पहुंचे। दार्जलिंग पहुँचने के बाद पहले हमने एक होटल लेकर आराम करना उचित समझा। शाम को हल्का नाश्ता करने के बाद मै और मेरे नये दो विदेशी दोस्तों के साथ मै निकल पड़ी दार्जलिंग भ्रमण पर। मैंने और मेरे दोस्तों ने पहले दार्जलिंग चाय का कि चुस्कियां ली उसके बाद हमने हैप्पी वैली चाय बागन और टाइगर हिल्स घूमने का प्लान बनाया। दार्जलिंग में हम सभी शाम को चाय के बागानों ने घूमते रहे।  Himachal Pradesh Tours

दूसरा दिन दूसरे दिन हम सुबह तडके ही 3 बजे उठ गये क्योंकि हमे टाइगर हिल्स निकलना था। हमने एक गाड़ी किराये पर ,ली और निकल पड़े टाइगर हिल्स। रास्ते में हमसे कई महिलायों ने लिफ्ट मांगी ताकि वह भी ऊपर जाकर लोगो को कॉफ़ी और चाय बेचकर कुछ कमाई कर सके। लेकिन हमारी गाड़ी में जगह की कमी थी, इसलिए हम उन महिलायों की कोई मदद नहीं कर सके। हम टाइगर हिल्स सही समय पर पहुंच गये थे, लेकिन थोड़ी देर बाद पूरा टाइगर हिल्स सैलानियों से पट गया। सभी लोग उगते हुए सूरज को देख बेहद खुश हुए।हमने भी उगते हुए सूरज की कुछ तस्वीरें ली। यहां से उगते हुए सूरज को देखना इसलिए और अच्छा लगा रहा था क्यों कि जब सूरज की सुनहरी किरणे विश्व के तीसरे पर्वत पर पड़ रही थी, जिससे कंचनजंगा और भी खूबसूरत हो गया था। हम काफी लकी थे, क्यों कि उस दिन मौसम काफी साफ़ था, और हम सबसे उंचे शिखर को साफ़ साफ़ देख पा रहे थे।इस अद्भुत नजारे को देखने के बाद हैप्पी वैली चाय के बागानों को देखने के लिए निकल पड़े।

 

यूं तो दार्जलिंग में करीबन 86 चाय के बागन है लेकिन हमने हैप्पी वेली को ही चुना, क्यों की इस चाय के बागन में हम चाय बनने की प्रक्रिया को भी देख सकते थे। इस दौरान हमने टॉय ट्रेन का भी लुत्फ उठाया। हैप्पी वैली दार्जलिंग का छोटा सा चाय का बागन है। हमने हैप्पी वैली में चाय की पत्तियों से लेकर चाय बनने की पूरी प्रक्रिया को देखा। हालांकि दुःख की बात यह थी, यहां चाय के लिए अच्छी पत्तियां तोड़ने वाले मजदूर को महज एक दिन का मेहनताना महज 150 रूपया दिया जाता है। दार्जलिंग में ये दोनों जगहे घूमने के बाद मुझे अपने दोनों विदेशी दोस्तों को अलविदा कहना पड़ा क्योंकि अब मुझे दार्जलिंग स सिक्किम की यात्रा अकेले तय करनी थी। पहले मैंने दार्जिलिंग से गंगटोक की टैक्सी पकड़ी जोकि, दार्जलिंग से तीन घंटे की दूरी पर है।यहां के दृश्य इतने मनोरम होते है कि,आपको पता ही नहीं लगेगा की कब आप दार्जलिंग से सिक्किम पहुंच गये।अगर आपने पश्चिम बंगाल की टैक्सी ली है तो वह आपको सिक्किम बस स्टैंड पर छोड़ देगी।जिसके बाद आपको दूसरी सिक्किम जाने के लिए दूसरी टैक्सी लेनी होगी। Manali Volvo Packages

सिक्किम पहुँचने के बाद मै एमजी मार्ग पहुंची, जहां पहुँचने के बाद पहले मुझे लगा कि, मै मनाली के माल रोड आ गयी हूं। एमजी रोड बेहद खूबसूरत और साफ सुथरा था। वहां पहुंचकर मैंने एक कप कॉफ़ी पी और निकल पड़ी घूमने। यूं तो सिक्किम ज्यादा महंगा नहीं है लेकिन अकेले घूमने वालो के लिए यह थोड़ा सा महंगा है। पूरा सिक्किम बेहद ही ज्यादा खूबसूरत है, जिसकी तारीफ़ के लिए शब्द भी कम पड़ जाये। तो फिर आइये जानते है कि, सिक्किम में कहां-कहां घूमा जा सकता है।

सिक्किम की वादियां का सुहाना सफर

सिक्किम की वादियां का सुहाना सफर

सिक्किम की वादियां और हिमालय की गोद में बसे सिक्किम राज्य की वादियां का सुहाना सफर जो प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य जो दिल झरोखो में रिमझिम और छनछनाती आवाजे और यह के मनमोहक फूलो की क्यारिया और जय लगता है दूर से कोई कायल की कुक सुनाये दे रही है और जैसे लगता है इसी तपोवन में साडी जिंदगी लगा दू | सिक्किम की भूमि या फूलों का प्रदेश कहना गलत नहीं होगा। वास्तव में यहां के नैसर्गिक सौंदर्य में जो आकर्षण है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। नदियां, झीलें, बौद्ध मठ और स्तूप तथा हिमालय के बेहद लुभावने दृश्यों को देखने के अनेक स्थान, ये सभी हर प्रकृतिप्रेमी को बाहें फैलाए आमंत्रित करते हैं। विश्व की तीसरी सबसे ऊंची पर्वतचोटी कंचनजंगा (28156 फुट) यहां की सुंदरता में चार चांद लगाती है। सूर्य की सुनहली किरणों की आभा में नई-नवेली दुलहन की तरह दिखने वाली इस चोटी के हर क्षण बदलते मोहक दृश्य सुंदरता की नई-नई परिभाषाएं गढ़ते हुए से लगते हैं। मनुष्य की कल्पनाओं का सागर यहां हिलोरें मारने लगता है। Shimla Tour Packages

सिक्किम जीवंत वातावरण

सिक्किम जीवंत वातावरण

भारत के उत्तर-पूर्व और पूर्व में फैले इस राज्य का क्षेत्रफल 7096 वर्ग किलोमीटर है और जनसंख्या लगभग पांच लाख। चीन के अधीनस्थ तिब्बत से व्यापारिक संबंधों के समय व्यावसायिक महत्व का स्थान रहा गंगटोक आज के सिक्किम की राजधानी है। इस शहर की स्थापना 19वीं शताब्दी के मध्य में हुई थी। इससे पहले राज्य के पश्चिमी भाग में युकसम और इसके बाद राबडेंसे नामक स्थानों को सिक्किम की राजधानी होने का गौरव प्राप्त था। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों, हनीमून मनाने वाले जोड़ों तथा राज्य के सुदूर क्षेत्रों में ट्रेकिंग और साहसिक पर्यटन के शौकीन लोगों की आवाजाही गंगटोक के वातावरण को हमेशा जीवंत बनाए रखती है।

पर्यटन की दृष्टि से सुविधापूर्वक सिक्किम दर्शन के लिए राज्य को चार भागों में बांटा जा सकता है। सबसे पहले पूर्व में गंगटोक तथा इसके आसपास कई दर्शनीय स्थल हैं। समुद्रतल से 5800 फुट की ऊंचाई पर स्थित गंगटोक का प्रारंभ से ही समुचित विकास होता आया है। यहां अच्छे से अच्छे रहने के स्थान, यातायात के साधन तथा संचार माध्यम उपलब्ध हैं। राज्य की पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा की वस्तुओं का केंद्र भी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का स्थान है। Manali Tour Packages

यहां से केवल तीन किलोमीटर की दूरी पर 200 वर्ष पुराना महत्वपूर्ण बौद्ध मठ इंचे मॉनेस्ट्री है। ऐसा माना जाता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को लामा द्रुप्तोब कार्पो का आशीर्वाद मिलता है। लामा द्रुप्तोब यहां के लोकजीवन में आस्था के एक गहरे प्रतीक के रूप में रचे-बसे हैं। हर साल जनवरी के आसपास यहां छाम नृत्य का उत्सव आयोजित किया जाता है। यह उत्सव दो दिन तक धूमधाम से मनाया जाता है। व्हाइट हॉल के पास पूरे वर्ष फूलों की प्रदर्शनी भी लगाई जाती है। फूलों वाली विभिन्न जड़ी-बूटियों की एक प्रदर्शनी यहां वसंत ऋतु में भी आयोजित की जाती है, जो बेहद लोकप्रिय हो चुकी है।

बौद्ध अध्ययन का केंद्र

बौद्ध अध्ययन का केंद्र

गंगटोक में ही स्थित नामग्याल इंस्टीट्यूट ऑफ टिबेटोलॉजी (एनआईटी) नाम का बौद्ध संस्थान दुर्लभ लेपचा, तिब्बती व संस्कृत पांडुलिपियों, मूर्तियों, थंका, कर्मकांड और पूजन विधि में प्रयोग आने वाले कपड़ों (टेपेस्ट्रीज) आदि दो सौ से अधिक बहुमूल्य वस्तुओं तथा कलाकृतियों का खजाना है। धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण यह संस्थान आज पूरे विश्व के लिए बौद्ध दर्शन तथा धर्म का अध्ययन केंद्र बना हुआ है।

छोग्याल पाल्डेन थोंडुप नामग्याल की स्मृति में यहां एक पार्क बना हुआ है। छोग्याल अर्थात राजा। नामग्याल वंश के 17वें तथा धार्मिक कार्यो के लिए पवित्रीकरण संस्कार प्राप्त 12वें राजा पाल्डेन थोंडुप की आर्थिक और सामाजिक सुधारों में शुरू से गहरी आस्था थी। राजा पाल्डेन आधुनिक शासन प्रणाली के समर्थक थे। इनके शासनकाल में ही सिक्किम में आधारभूत सुविधाओं की नींव रखी गई। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने स्कूल, सड़कें, चिकित्सालय आदि बनाने, पेयजल उपलब्ध कराने, यातायात हेतु सिक्किम राष्ट्रीयकृत ट्रांसपोर्ट, हाइड्रो-इलेक्टि्रक पॉवर स्कीम तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए अन्य योजनाएं चलाने के लिए भी लगातार सहायता दी। 1982 में इनका देहांत हुआ। अंत तक वह बौद्धिक सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रहे। Dalhousie Dharamshala Amritsar Tour

पवित्र छांगू झील

पवित्र छांगू झील

छांगू लेक, जिसे स्थानीय लोग छो गो लेक कहते हैं, गंगटोक से 40 किलोमीटर दूर है। समुद्रतल से 3780 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह अंडाकार झील एक किलोमीटर लंबी और 15 मीटर गहरी है। स्थानीय लोगों की मान्यताओं के अनुसार यह एक पवित्र स्थान है। शीतकाल में यह जमी रहती है। मई से अगस्त के बीच इसके चारों ओर फैली पर्वतश्रृंखला व घाटियों में विभिन्न प्रकार के फूल खिले होते हैं। यहां खिलने वाले फूलों में रोडोडेंड्रोन, कई प्रकार के प्रिमुला, नीले और पीले पॉपीज, आइरिस आदि प्रमुख हैं। लाल पांडा तथा कई प्रजातियों के पक्षियों का यह पसंदीदा स्थान है।

इसी दिशा में गंगटोक से 56 किलोमीटर दूर समुद्रतल से 14200 फुट की ऊंचाई पर स्थित नाथू ला है। ला अर्था पास या एक पहाड़ को लांघकर दूसरी ओर जाने का रास्ता। नाथू ला भारत-चीन (तिब्बत का पठार) सीमा पर स्थित है। यहां जाने के लिए पंजीकृत ट्रेवल एजेंसी के माध्यम से सिक्किम पर्यटन विभाग से परमिट लेनी पड़ती है। नाथू ला की ओर जाने की परमिट केवल भारतीय नागरिक ही पा सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियां और पेड़-पौधे देखने के शौकीन लोगों के लिए इसी क्षेत्र में स्थित सरमसा गार्डन और जवाहरलाल नेहरू बोटेनिकल गार्डन दर्शनीय हैं। जबकि वन्य जीवन में रुचि लेने वालों के लिए हिमालयन जूलोजिकल पार्क तथा फेम्बोंग लो वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी दिलचस्प जगहें हो सकती हैं। इनके अलावा दो द्रुल छोरटेन, रुमटेक धर्म चक्र केंद्र, पाल जुरमांग कागयुद मॉनेस्ट्री, वाटर गार्डन, बाबा हरभजन सिंह मेमोरियल, ताशी व्यू प्वाइंट, गोन्जांग मॉनेस्ट्री, गणेश टोंक, हनुमान टोंक, नोर छो सुक तथा अरितार यहां के अन्य दर्शनीय स्थल हैं। Shimla Manali Tour Packages

पवित्र छांगू झील

सिक्किम में जहां मिट जाते हैं पाप

पश्चिमी सिक्किम में पेमायांगसे मॉनेस्ट्री सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में से एक है। राज्य की पहली राजधानी युकसम यहीं है। तीन विद्वान लामाओं द्वारा सन् 1641 में सिक्किम राज्य के प्रथम छोग्याल (राजा) का पवित्रीकरण संस्कार यहीं किया गया था। इसका प्रमाण नोरबूगांग छोरटेन में आज भी मौजूद है, जहां पत्थरों के सिंहासन और एक पत्थर पर मुख्य लामा के पैर की छाप देखी जा सकती है। वस्तुत: इस राज्य का इतिहास यहीं से शुरू होता है। स्थानीय लोग इस क्षेत्र को अत्यंत पवित्र मानते हैं। जोंगरी-जेमाथांग तथा कंचनजंगा बेस कैंप के लिए ट्रेकिंग कार्यक्रम भी युकसम से ही शुरू होते हैं। युकसम के बाद कुछ ही दूरी पर स्थित राबडेंसे राज्य की दूसरी राजधानी बनी थी। यहां अब केवल खंडहर शेष हैं। सन् 1814 तक यहीं से राजा ने राज्य का संचालन किया।

ताशीडिंग मॉनेस्ट्री हृदय के आकार की पहाड़ी पर बनाई गई है, जिसके पीछे पवित्र कंचनजंगा पर्वत है। बौद्ध धर्मग्रंथों के अनुसार 8वीं शताब्दी में गुरु पद्मसंभाव, जिन्हें गुरु रिम्पूछे भी कहा जाता है, ने इस स्थान से ही सिक्किम की पवित्र भूमि को आशीर्वाद दिया था। ऐसा माना जाता है कि आज भी यहां आने वालों को गुरु रिम्पूछे का आशीर्वाद प्राप्त होता है। लेपचा समुदाय की बहुलता वाली इस घाटी में स्थित पवित्र गुरु इहेदू में गुरु रिम्पूछे के पैरों और हाथों के चिन्ह अभी भी सुरक्षित हैं। ताशीडिंग पवित्र छोरटेन (स्तूप) ‘थोंग वा रांग डोल’ के लिए भी प्रसिद्ध है। इसका अर्थ है देखने भर से जीवनरक्षा करने वाला। ऐसा विश्वास है कि इस स्तूप को देखने मात्र से श्रद्धालु के सभी पाप मिट जाते हैं। प्रतिवर्ष पवित्र जल उत्सव भी केवल यहीं होता है, जब यहां का जल दूर और पास से आए श्रद्धालुओं को दिया जाता है। यहां पेलिंग, सांगा-छोलिंग मोनास्ट्री, सिंगशोर ब्रिज उट्टारे, कंचनजंगा वाटर फॉल, खेद्दोपालरी लेक, दुबकी मोनास्ट्री, रंगित वाटर व‌र्ल्ड, कोगरी लाबडांग, बारसे, सोरेंग, रिनछेंगपोंग कालुक, ही बुरीमयोक तथा डेंटाम आदि भी दर्शनीय हैं। Himachal Travel Package

पवित्र छांगू झील

सिक्किम में यही आकर्षण का मुख्य केंद्र

संधि भाईचारे की उत्तरी सिक्किम में जेमू ग्लेशियर से निकलने वाली तीस्ता नदी राज्य का गौरव बढ़ाती है। व्हाइट वाटर राफ्टिंग और कयाकिंग आदि वाटर स्पो‌र्ट्स के शौकीन लोगों के लिए सिक्किम में यही आकर्षण का मुख्य केंद्र है। मई-जून में यहां साहसिक पर्यटन के शौकीन लोगों की खासी भीड़ जुटी होती है। भारत ही नहीं, दुनिया के अन्य देशों से भी लोग यहां रोमांचक खेलों का मजा लेने तथा प्रकृति की सुंदरता को निहारने के लिए आते हैं।

अगर आप वन्य प्राणियों के जीवन में रुचि लेते हैं तो उत्तरी सिक्किम में ही स्थित कंचनजंगा नेशनल पार्क बहुत मुफीद जगह है। 850 वर्ग किलोमीटर में फैले इस वन्य जीव अभ्यारण्य को बायोस्फीयर रिजर्व के नाम से भी जानते हैं। यहां तमाम दुर्लभ प्रजातियों के कई जीव स्वच्छंद विचरण करते हैं। इसके क्षेत्र में कई ग्लेशियर भी हैं, जिनमें जेमू ग्लेशियर सबसे लंबा और नयनाभिराम है। चिडि़यों की यहां कुल 550 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें ब्लड फेजेंट, सेटायर ट्रैगोपन, ऑस्प्रे,

हिमालयन ग्रिफॉन, लैमर्जियर, बर्फीला कबूतर, इंपेयन फेजेंट, सन ब‌र्ड्स और गरुड़ शामिल हैं। जंगली पशुओं में यहां क्लाउडेड लेपर्ड, हिमालय क्षेत्र में पाया जाने वाला काला भालू, लाल पांडा, ब्लू शीप, कस्तूरी हिरन, हिमालयन थार, लेसर बिल्लियां, तिब्बती भेडि़ये और भेड़ आदि भारी मात्रा में देखे जा सकते हैं। कंचनजंगा का शाब्दिक अर्थ है देवताओं का ऐसा आवास जिसमें पांच घर हों। कंचनजंगा के पांच घरों के रूप में नरशिंग, पंदिम, सिम्वो, कब्रू और सिनिओल्चू नामक पर्वतशिखरों की गिनती की जाती है। इनमें पंदिम, नरशिंग और सिनिओल्चू इसी पार्क के क्षेत्र में ही हैं। दुनिया भर से तमाम प्रकृतिप्रेमी पर्यटक तो इन पर्वतशिखरों को ही देखने के लिए इस अभ्यारण्य में आते हैं।
उत्तरी सिक्किम में ही एक ऐतिहासिक स्थान है काबीलंगचोक। सिक्किम के इतिहास में यह जगह अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां लेपचा जाति के मुखिया ते कुंग तेक तथा भुटिया जाति के मुखिया खे बुम सा के बीच आपसी भाईचारे की संधि हुई थी। घने जंगल के बीच जिस स्थान पर यह संधि हुई थी वहां पत्थर के स्तंभ के रूप में एक स्मारक भी बनाया गया है। इसके अतिरिक्त यहां फेनसांग मॉनेस्ट्री, फोडोंग मॉनेस्ट्री, सिंघिक, छुंगथांग, लाछुंग, युमथांग, लाछेन मॉनेस्ट्री, थांगु एवं गुरु डोंगमार लेक भी दर्शनीय स्थल हैं। Manali Dharamshala Tour Package

आकाश जितना ऊंचा सिक्किम हमारा 

पर्यटन की दृष्टि से इन तीन क्षेत्रों के बाद बारी आती है दक्षिणी सिक्किम की। गंगटोक से 78 किलोमीटर दूर है नामची। इसका अर्थ है आकाश जितना ऊंचा। यहां से बर्फ से ढके पहाड़ तथा दूर तक फैली घाटी के दृश्य देखे जा सकते हैं। नामची दक्षिण सिक्किम का जिला मुख्यालय भी है। पर्यटन सुविधाओं के मामले में अब इसका तेजी से विकास हो रहा है। हर साल फरवरी में यहां फूलों का त्योहार मनाया जाता है। नामची से साढ़े तीन किलोमीटर की दूरी पर हाल ही में राज्य सरकार ने गुरु पद्मसंभाव की 135 फुट ऊंची मूर्ति स्थापित की है। यह मूर्ति मिश्रित धातु से बनाई गई है, जिसमें कीमती पत्थर जड़े गए हैं।

टेंडोंग हिल 8530 फुट की ऊंचाई पर स्थित एक छोटा सा स्थान है, जहां घना हरा प्राचीन जंगल है। यह स्थल बौद्ध लामाओं की तपोभूमि रही है जहां वे वर्षो तक शांत वातावरण में रहकर ध्यान लगाते आए हैं। कहा जाता है कि किसी युग में हुई प्रलयंकारी वर्षा के दौरान इसी स्थान पर लेपचा जाति के लोगों को संरक्षण मिला था। आज भी लेपचा लोग इस स्थान को पूजते हैं।

पवित्र छांगू झील

सिक्किम एक साहसिक पर्यटन का गढ़

समुद्रतट से 10300 फुट की ऊंचाई पर स्थित मीनम हिल से कंचनजंगा और अन्य पर्वत श्रृंखलाओं, दक्षिण बंगाल के कलिम्पोंग और दार्जिलिंग तथा उत्तर में भारत-चीन सीमा को देखा जा सकता है। नरसिंह तथा पाकिलु पर्वतों के आधार से आने वाली रंगित नदी दक्षिण सिक्किम से बहती हुई तीस्ता नदी में मिलती है। इन दोनों ही नदियों के तटों पर मौजूद मनोरम दृश्य बरबस ही सबका मन मोह लेते हैं। टेमी टी गार्डन, रावांगला, बोरोंग, सिंगछुथांग सिक्किम तथा फुर सा छू अन्य देखने योग्य स्थान हैं। Shimla to Manali via Kinnaur Tour Packages

साहसिक पर्यटन के शौकीन लोगों के बीच सिक्किम बेहद लोकप्रिय है। यहां ट्रेकिंग और राफ्टिंग के कई अड्डे हैं। कई पर्यटक स्थलों से एक-दो दिन के लिए ट्रेकिंग पर जाना आम बात है। इसके अलावा यहां सुनियोजित ढंग से लंबे ट्रेकिंग प्रोग्राम भी आयोजित किए जाते हैं। ट्रेकिंग रूटों में मोनास्टिक ट्रेक, रोडोडेंड्रन ट्रेक, कंचनजंगा ट्रेक, कोरोनेशन ट्रेक, खेडी ट्रेक, सिंगालीला ट्रेक, कस्तूरी ओरार ट्रेक, सामरट्रेक, रिनछेनपोंग या सोरेंग ट्रेक और हिमालय ट्रेक प्रमुख हैं। अधिकतर ट्रेकिंग कार्यक्रम अप्रैल से जून तथा अक्टूबर से दिसंबर के बीच किए जाते हैं। रिवर राफ्टिंग के लिए अक्टूबर से दिसंबर का समय सबसे उपयुक्त है। तीस्ता तथा रंगित दोनों नदियों में रिवर राफ्टिंग होती है। कयाकिंग केवल तीस्ता में ही होती है। सिक्किम में याक सफारी का भी आनंद लिया जा सकता है।

पवित्र छांगू झील

 

सिक्किम का खानपान तिब्बत जैसा

सिक्किम और तिब्बत के खान-पान में बड़ी समानता है। चिकन मोमो, पोर्क मोमो, शाकाहारी और पनीर मोमो, थुकपा (सूप या तरीदार सब्जी की तरह खाया जाने वाला), टी मोमो व शाभाले यहां के प्रमुख एवं विशेष व्यंजन हैं। वैसे तो गंगटोक के रेस्टोरेंट्स में तो भारत के हर प्रांत का भोजन मिल जाता है, लेकिन यहां आने के बाद स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेने का भी अपना अलग आनंद है। इनमें थुकपा वेज और नॉन वेज दोनों प्रकार का बनता है। टी मोमो स्टीम ब्रेड की तरह बनाई जाती है। मैदे में खमीर मिलाकर और गर्म पानी से गूंदकर इसे तैयार किया जाता है। शाभाले नामक रोटी में मीट भरा जाता है और पूरी की तरह तलकर इसे तैयार किया जाता है।

सिक्किम की यात्रा पर एक नजर

सिक्किम कैसे पहुंचें

पृथ्वी की भौगोलिक असमानताओं में बिखरे प्राकृतिक सौंदर्य का अद्वितीय पक्ष सिक्किम राज्य सड़क, रेल तथा हवाई मार्गो के जरिये देश के विभिन्न महानगरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। उत्तरी बंगाल में बागडोगरा हवाई अड्डा राजधानी गंगटोक के सबसे समीप है। हवाई अड्डे से 124 किलोमीटर की दूरी सड़क मार्ग से लगभग चार घंटों में तय हो जाती है। बागडोगरा विमान पत्तन कोलकाता, गुवाहाटी और नई दिल्ली से इंडियन एयरलाइंस और दूसरी एयरलाइनों की उड़ानों से जुड़ा हुआ है। सिक्किम पर्यटन विभाग का पांच सीटों वाला हेलीकॉप्टर बागडोगरा और गंगटोक के बीच प्रतिदिन हवाई सेवा प्रदान करता है। रेलमार्ग पर सबसे समीप दो स्टेशन सिलीगुड़ी तथा न्यू जलपाईगुड़ी हैं। गंगटोक से इनकी दूरी क्रमश: 114 व 125 किलोमीटर है।

सिक्किम की यात्रा करने के लिए परमिट की जरूरत

सीमांत प्रदेश होने के कारण विदेशी नागरिकों को यहां आने के लिए इनर लाइन परमिट (आईएलपी) लेना होता है। यह परमिट उन्हें भारत में प्रवेश हेतु मिले वीजा के आधार पर मिल जाता है। भारतीय दूतावासों तथा देश में पर्यटन कार्यालयों से या सिक्किम पहुंच कर भी यह परमिट प्राप्त किया जा सकता है, जिसकी अवधि 15 दिन होती है। यह अवधि बढ़वाई भी जा सकती है।

पवित्र छांगू झील

सिक्किम के होटल एवं लॉज

पूर्वी सिक्किम में अकेले गंगटोक और उसके आसपास ही सौ से अधिक होटल, चालीस से अधिक लॉज तथा पांच सरकारी होटल एवं लॉज हैं। निजी क्षेत्र में अनोला, ब्लू स्काई, सेंट्रल होटल, डोमा, ग्रीन, हिल व्यू, काबुर, ल्हाकपा, मेलोंग, नोरबू घांग, ओबेरॉय, रेड रूबी, पालीखल, सैंफेल, सोनम, त्रिशूल, वीनस बुडलैंड, युमथांग आदि अच्छे होटल तथा मानसारी, कामेलिया, सनशाइन, नाहन आदि सुंदर लॉज है। सरकारी क्षेत्र में ब्लू शीप रेस्टोरेंट, माउंट जोपुनो, माउंट पंडिम, सिनियोल्छु तथा टूरिस्ट सेंटर आदि प्रमुख होटल एवं लॉज हैं।
इसी तरह पश्चिमी सिक्किम में आंचल, बिनटाम, डेमाजोंग, ग्रीन वैली, सोरेंग, कंचनजंगा, नोरबूगांग रिजॉर्ट, ताशी गांग अच्छे होटल हैं। उत्तर में डाबला इन, कान्डेन, न्यू नॉथ वे, प्रिमुला लॉज, सोनम, टोगा व याक एंड यति तथा दक्षिण में बेबिला फ्लोरोडा, हॉली डे, माउंट नरसिंह, संजीवनी, जोंगरी आदि दक्षिण में अच्छे होटल एवं लॉज हैं।

सिक्किम मौसम एवं तापमान

ग्रीष्म ऋतु में गंगटोक का तापमान अधिकतम 21 डिग्री तथा न्यूनतम 13 डिग्री सेंटीग्रेड होता है तथा शरद ऋतु में अधिकतम 13 डिग्री तथा न्यूनतम 05.3 डिग्री सेंटीग्रेड। विश्व में सबसे अधिक वर्षा चेरापूंजी में होती है। यह स्थान सिक्किम से अधिक दूर नहीं है। अत: राज्य में भ्रमण के लिए सबसे उत्तम समय मार्च से जून तक तथा अक्टूबर से दिसंबर तक है। गंगटोक में प्रतिवर्ष औसतन वर्षा 3894 मिलीमीटर होती है। 15 साल के अंतराल के बाद गत फरवरी मास में यहां बर्फबारी हुई है।

गंगटोक का सफर एवं दर्शनीय स्थल

यहां देखने लायक कई स्थान हैं जैसे, गणेश टोक, हनुमान टोक तथा ताशि व्यू प्वांइट। अगर आप गंगटोक घूमने का पूरा लुफ्त उठाना चाहते हैं तो इस शहर को पैदल घूमें।…

यहां देखने लायक कई स्थान हैं जैसे, गणेश टोक, हनुमान टोक तथा ताशि व्यू प्वांइट। अगर आप गंगटोक घूमने का पूरा लुफ्त उठाना चाहते हैं तो इस शहर को पैदल घूमें। यहां से कंचनजंघा का नजारा बहुत ही आकर्षक प्रतीत होता है। इसे देखने पर ऐसा लगता है मानो यह पर्वत आकाश से सटा हुआ है तथा हर पल अपना रंग बदल रहा है।

अगर आपकी बौद्ध धर्म में रुचि है तो आपको इंस्टीट्यूट ऑफ तिब्बतोलॉजी जरुर घूमना चाहिए। यहां बौद्ध धर्म से संबंधित अमूल्य प्राचीन अवशेष तथा धर्मग्रन्थ रखे हुए हैं। यहां अलग से तिब्बती भाषा, संस्कृति, दर्शन तथा साहित्य की शिक्षा दी जाती है। इन सबके अलावा आप प्राचीन कलाकृतियों के लिए पुराने बाजार, लाल बाजार या नया बाजार भी घूम सकते हैं।

सोमगो झील

गंगटोक से 40 किलोमीटर की दूरी पर यह झील स्थित है। यह झील चारों ओर से बर्फीली पहाडियों से घिरा हुआ है। झील एक किलोमीटर लंबा तथा 50 फीट गहरा है। यह अप्रैल महीने में पूरी तरह बर्फ में तब्दील हो जाता है। सुरक्षा कारणों से इस झील को एक घंटे से अधिक देर तक नहीं घूमा जा सकता है। जाड़े के समय में इस झील में प्रवास के लिए बहुत से विदेशी पक्षी आते हैं। इस झील से आगे केवल एक सड़क जाती है। यही सड़क आगे नाथूला दर्रे तक जाती है। यह सड़क आम लोगों के लिए खुला नहीं है। लेकिन सेना की अनुमति लेकर यहां तक जाया जा सकता है। Best of Himachal Tour

रूमटेक मठ

रुमटेक घूमे बिना गंगटोक का सफर अधूरा माना जाता है। यह मठ गंगटोक से 24 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मठ 300 वर्ष पुराना है। रुमटेक सिक्किम का सबसे पुराना मठ है। 1960 के दशक में इस मठ का पुननिर्माण किया गया था। इस मठ में एक विद्यालय तथा ध्यान साधना के लिए एक अलग खण्ड है। इस मठ में बहुमूल्य थंगा पेंटिग तथा बौद्ध धर्म के कग्यूपा संप्रदाय से संबंधित वस्तुएं सुरक्षित अवस्था में है। इस मठ में सुबह में बौद्ध भिक्षुओं द्वारा की जाने वाली प्रार्थना बहुत कर्णप्रिय होती है।

दो द्रूल चोर्टेन

दो द्रूल चोर्टेन

यह गंगटोक के प्रमुख आकर्षणों में एक है। इसे सिक्किम का सबसे महत्वपूर्ण स्तूप माना जाता है। इसकी स्थापना त्रुलुसी रिमपोचे ने 1945 ई. में की थी। त्रुलुसी तिब्बतियन बौद्ध धर्म के नियंगमा सम्प्रदाय के प्रमुख थे। इस मठ का शिखर सोने का बना हुआ है। इस मठ में 108 प्रार्थना चक्र है। इस मठ में गुरु रिमपोचे की दो प्रतिमाएं स्थापित है।

इनहेंची मठ

इनहेंची का शाब्दिक अर्थ होता है निर्जन। जिस समय इस मठ का निर्माण हो रहा था। उस समय इस पूरे क्षेत्र में सिर्फ यही एक भवन था। इस मठ का मुख्य आकर्षण जनवरी महीने में यहां होने वाला विशेष नृत्य है। इस नृत्य को चाम कहा जाता है। मूल रुप से इस मठ की स्थापना 200 वर्ष पहले हुई थी। वर्तमान में जो मठ है वह 1909 ई. में बना था। यह मठ द्रुपटोब कारपो को समर्पित है। कारपो को जादुई शक्ति के लिए याद किया जाता है।

ऑर्किड अभयारण्य

इस अभ्यारण्य में ऑर्किड का सुंदर संग्रह है। यहां सिक्किम में पाए जाने वाले 454 किस्म के ऑर्किडों को रखा गया है। प्राकृतिक सुंदरता को पसंद करने वाले व्यक्तियों को यह अवश्य देखना चाहिए।

ताशिलिंग

ताशिलिंग

ताशी लिंग मुख्य शहर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से कंचनजंघा श्रेणी बहुत सुंदर दिखती है। यह मठ मुख्य रुप से एक पवित्र बर्तन बूमचू के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि इस बर्तन में पवित्र जल रखा हुआ है। यह जल 300 वर्षों से इसमें रखा हुआ है और अभी तक नहीं सूखा है।

टिसुक ला खंग

यहां बौद्ध धर्म से संबंधित प्राचीन ग्रंथों का सुंदर संग्रह है। यहां का भवन भी काफी सुंदर है। इस भवन की दीवारों पर बुद्ध तथा संबंधित अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का प्रशंसनीय चित्र है। यह भवन आम लोगों और पर्यटकों के लिए लोसार पर्व के दौरान खोला जाता है। लोसार एक प्रमुख नृत्य त्योहार है।

आसपास दर्शनीय स्थान

पेलींग

पेलींग: यह स्थान गंगटोक के पश्चिम में 145 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां कुछ घर तथा अधिक संख्या में होटल हैं। यहां से कंचनजघां का अदभूत दृश्य दिखता है। यहां से पर्वत चोटी बहुत नजदीक लगती है। ऐसा लगता है मानो यह मेरे बगल में है और मैं इसे छू सकता हूं। यहां मौसम बहुत सुहावना होता है।

सांगो-चोलिंग

सांगो-चोलिंग: पिलींग से कुछ ही दूरी पर सिक्किम का दूसरा सबसे पुराना मठ सांगो-चोलिंग है। यह सिक्किम के महत्वपूर्ण मठों में से एक है। इस मठ में एक छोटा सा कब्रिस्तान भी है। इस मठ के दीवारों पर बहुत ही सुंदर चित्रकारी की गई है। पिलींग आने वाले को इस मठ को अवश्य घूमना चाहिए।

पेमायनस्ती मठ

पेमायनस्ती मठ: यह मठ पिलींग से थोड़ी देर की पैदल दूरी पर स्थित है। ग्यालसिंग से इसकी दूरी 6 किलोमीटर पड़ती है। यह सिक्किम का सबसे महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित मठ है। यहां बौद्ध धर्म की पढ़ाई भी होती है। यहां बौद्ध धर्म की प्राथमिक, सेकेण्डरी तथा उच्च शिक्षा प्रदान की जाती है। यहां 50 बिस्तरों का एक विश्राम गृह भी है। पर्यटक को भी यहां ठहरने की सुविधा प्रदान की जाती है। इस मठ में कई प्राचीन धर्मग्रन्थ तथा अमूल्य प्रतिमाएं सुरक्षित अवस्था में हैं। पेमायनस्ती मठ का विशेष आकर्षण यहां लगने वाला बौद्ध मेला है।

सुक-ला-खंग

सुक-ला-खंग: शाही पूजा स्थल, जो बौद्धों के लिए पूजा का मुख्य स्थान है। यह एक सुंदर और आकर्षक भवन है, यहां भगवान बुद्ध की प्रतिमाओं और लकड़ी पर नक्काशी के कार्य का बहुत बड़ा संग्रह है।

रमटेक मठ

रमटेक मठ: यह मठ गंगटोक से 24 किमी दूर है। यह ग्यालवा करमापा का स्थान है, जो तिब्बत में बौद्ध धर्म के कगयूपा अनुयायियों के प्रमुख हैं। यहां तिब्बती धर्म से संबंधित अनेक पेंटिंग्स प्रदर्शित हैं। धर्मालाप के सत्रों में यहां अनेक यात्री आते हैं। मंदिर के पीछे बौद्ध धर्म के अध्ययन केलिए स्थित संस्थान में मठवासी अध्ययन करते हैं।

एंचे गोम्पा: निगमापा शैली में बना यह मोहक गोम्पा शहर के मध्य से 3 किमी उत्तर पूर्व में स्थित है।

ऑर्किड गार्डन्स सेंचुरी

ऑर्किड गार्डन्स सेंचुरी: सिक्किम स्थित इस सेंचुरी में 450 दुर्लभ किस्म के ऑर्किड हैं। इनमें से कुछ सुंदर अन्य कहीं नहीं पाए जाते। यहां आने के लिए अप्रैल और मई का प्रारंभ और सितंबर से दिसंबर के बीच का समय सर्वश्रेष्ठ है। आप गंगटोक से 12 किमी दक्षिण में स्थित एक और उत्कृष्ट ऑर्किड सेंचुरी ऑर्किडेरियम भी देख सकते हैं।

गंगटोक कब जाएं

पुष्प प्रदर्शनी केंद्र:

पुष्प प्रदर्शनी केंद्र: सुंदर कलियों और फू लों को यहां खिलते-महकते देखा जा सकता है। पुष्प प्रदर्शनी केंद्र में आप प्रकृति के विविध रंगों के खूबसूरत नज़ारे का आनंद ले सकते हैं, यहां ऑर्किड और फूलों की अन्य प्रजातियों की किस्में देखी जा सकती हैं।

डुड्रल चोर्टन एवं गोम्पा

डुड्रल चोर्टन एवं गोम्पा: यह विशाल सफेद चोर्टन 108 प्रेयर-व्हील्स (जिन्हें दक्षिणावर्त दिशा में घुमाना चाहिए) से घिरा हुआ है।

डीयर पार्क

डीयर पार्क: बच्चे इस स्थान को अवश्य पसंद करेंगे। आप प्राकृतिकवातावरण में विभिन्न प्रकार के हिरणों को देख सकते हैं। यदि आप प्रात: 7.30 बजे से 8.00 बजे के आसपास पार्क में आएं तो आपको हिरण चरते हुए मिल जाएंगे।

गंगटोक कब जाएं

इस जगह पर घूमने के लिये पूरे साल तक वातावरण अच्छा रहता है।

गंगटोक कैसे पहुँचें

आप गंगटोक वायु, रेल या सड़क मार्ग के माध्यम से गंतव्य तक पहुंच सकते हैं।

For more information about visit: http://www.swantour.com/

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