खूबसूरत ताजमहल की दिलचस्प सच्‍चाई

ताजमहल

खूबसूरत ताजमहल की दिलचस्प सच्‍चाई

वाकई में ताजमहल; जो हमारे दिलो ही नहीं दुनिया के कोने कोनो पर प्‍यार की मिसाल माना जाने वाला दुनिया का अजूबा है और हम भारत वाशियो का गौरव भी है। इस अद्धुत स्‍मारक को सफेद संगमरमर से शाहजहां द्वारा उनकी बेगम मुमताज की याद में बनवाया गया था।

हर कोई ताजमहल देखने की इच्‍छा रखता है क्‍योंकि इसे मोहब्‍बत का मंदिर माना जाता है। यमुना नदी के तट पर स्थित यह स्‍मारक एक विस्‍मरणीय स्‍थल है।

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ताजमहल के बारे में आपको कई कहानियां और बातें सुनने को मिल जाएगी। ताजमहल के बारे में ऐसी ही कुछ निराली बातों को अब हम बताएंगे:

Taj Mahal, Agra

शाहजहां ने अपनी तीसरी बेगम मुमताज की याद में ताजमहल को बनवाने का निर्णय 1631 में लिया। मुमताज, बच्‍चे को जन्‍म देने के दौरान चल बसी थी। कहा जाता है कि शाहजहां कुछ ऐसा करना चाहते थे जो कभी किसी ने अपनी प्रियतमा के लिए न किया हों।

ताजमहल को बनाने की शुरूआत 1632 में हुई और इसे बनाने में 22 साल का समय लग गया। कुल 22000 कलाकारों और चित्रकारों ने काम किया और 1653 में इसे बनाकर तैयार कर दिया। उस समय ताजमहल को बनाने में 32 मिलियन का खर्च आया था।

Agra

ताजमहल के आर्किटेक्‍ट का नाम अहमद लाहौरी था। इसे बनाने में 1000 हाथियों को इस्‍तेमाल में लाया गया, जो पत्‍थर ढोने का काम करते थे

शाहजहां चाहते थे कि उनकी बेगम की याद में जो स्‍मारक बना है उसकी नकल कभी कोई न कर पाएं। इसलिए उन्‍होने कलाकारों के अंगूठों को कटवा दिया। लेकिन इसके बदले उन्‍होने भारी कीमत अदा की थी।

Agra - Jaipur

इस स्‍मारक में एक मुख्‍य हॉलनुमा स्‍थल है जिसके चारों चार गुम्‍बदें हैं। पूरा ताजमहल संगमरमर से ही निर्मित है। 17 हेक्‍टेयर में बना यह स्‍मारक, बेहद सुंदर है जिसकी संरचना मुस्लिम धर्म के वास्‍तु के हिसाब बनाई गई है। कहते हैं कि इसमें लगा हुआ संगमरमर, राजस्‍थान, चीन, अफगानिस्‍तान और तिब्‍बत से आया था। 28 तरह के बेशकीमती पत्‍थर इसमें जड़े हुए हैं।

ताजमहल में कई आयतों को लिखा गया है, जो कि अरबी भाषा में हैं। कैलीग्राफ का इस्‍तेमाल भी ताजमहल में देखने को मिलता है। अल्‍लाह के 99 विभिन्‍न नामों को ताजमहल में गुम्‍बद की ओर पत्‍थर पर उकेरा गया है।

जिस तरह सफेद संगमरमर का ताजमहल शाहजहां ने अपनी बेगम के लिए बनवाया था, वैसा ही ताजमहल वह अपने लिए काले संगमरमर का बनवाना चाहते थे, वो भी नदी के उस पार। लेकिन उनके बेटे ने उन्‍हे ऐसा करने से रोक दिया और न मानने पर उन्‍हे बंदी बना लिया।

ताजमहल का रंग, प्रदूषण और अन्‍य कारकों के चलते बदल सा गया है। सफेद से हल्‍का गुलाबी हो गया है। लेकिन ताजमहल के रंग पर चंद्रमा की रोशनी का प्रभाव भी पड़ता है, चंद्रमा की स्थिति के हिसाब से ताजमहल की रंगत बदलती रहती है। पूर्णिमा के दिन यह हल्‍का सुनहरा चमकता है।

ताजमहल को 1857 में एक हमले में थोड़ा नुकसान झेलना पड़ा। लेकिन लॉर्ड कर्जन ने इसे 1908 में दुबारा सही करवा दिया, क्‍योंकि तब तक इसे विश्‍व भर में ख्‍याति मिल चुकी थी।

कहा जाता है कि ताजमहल, भगवान शिव के मंदिर के स्‍थान पर बनवाया गया है, जिसे राजा परमार देव ने बनवाया था और इसका नाम तेजो महालया था। इस मंदिर पर मुगल शासकों ने कब्‍जा कर लिया था और उन्‍होने अपने ढंग से इसे बनवाया। यह बात अभी तक रहस्‍य ही बनी हुई है लेकिन ताजमहल, अब दुनिया के अजूबों में से एक है और यहां साल लाखों पर्यटक सैर करने आते हैं।

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ताजमहल के बारे में कुछ ऐसी रहस्यमयी बातें, जिनसे शायद आप जानते नहीं है |…

मुग़ल बादशाह शाहजहां एक ऐसा नाम, जिसने आने वाली कई पीढ़ियों को मोहब्बत करना सिखाया, लेकिन कुछ प्रेमियों ने उन्हें मोहब्बत का मज़ाक उड़ाने वाला भी कहा। शाहजहां स्वयं मुसलमान थे और उनकी प्रजा हिन्दू। उनकी प्रजा ने ऐसा साम्राज्य बनाया, जो लगभग पूरे भारत में फैला हुआ है। आईये जानें शाहजहां के ताजमहल से जुड़ी कुछ ऐसी दिलचस्प और रहस्यमयी बातें, जिन्हें बहुत ही कम लोग जानते हैं।

बात सन् 1631 की है, मुग़ल बादशाह शाहजहां हिन्दुस्तान की सरज़मीं पर अपनी बेग़म मुमताज़ महल की मृत्यु का मातम मना रहे थे और उस मातम में एक धड़कन उनकी पीछे छूटी मोहब्बत की भी थी, जिसे आने वाली पीढ़ियों के सामने वे मिसाल के रूप में देना चाहते थे। मोहब्बत के बाद यदि उनका दिल किसी चीज़ में लगता था, तो वो था आर्किटेक्चर। मुगल बादशाह होने के साथ-साथ वे आर्किटेक्चर की दुनिया के भी बादशाह थे। इमारतों के लिए उनका परफेक्शनिस्ट जुनून आजीवन बरकरार रहा।

मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी तमाम दौलत अपने उस ख़्वाब के नाम कर दी थी, जिसे हम ताजमहल के नाम से जानते हैं। शांत यमुना नदी के एकांत तट पर इस शानदार मकबरे की नींव डाली गयी थी। जिन हिन्दू कारीगरों पर शाहजहां राज करते थे, वे अपने पत्थर तराशने के हुनर के लिए बेहद मशहूर थे। उन कारीगरों ने कभी सोचा भी नहीं होगा, कि जिन पत्थरों को वे तराश रहे हैं, उन पत्थरों से निर्मित इमारत दुनिया भर के चुनिन्दा अजूबों में शामिल होगी। वे कारीगर जिस विश्वप्रसिद्ध इमारत का निर्माण करने में दिन-रात लगे हुए थे, उनकी मिसालें सिर्फ बीत चुकी और मौजूदा पीढ़ियों ने ही नहीं दी, बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी देंगी। ताजमहल को बनाने का पैमाना इतना विशाल था, कि आगरा शहर की ज़मीन पर पूरा शहर उभर आया था। उस अनोखी इमारत के निर्माण में बीस साल तक बीस हज़ार मजदूर लगे रहते थे। एक बेग़म की कब्र के नाम से प्रसिद्ध इस इमारत के निर्माण में आज के समय के बीस करोड़ डॉलर से कहीं अधिक रुपये खर्च हुए थे (जैसा कि माना जाता है)। ताजमहल जैसी खूबसूरत इमारत को किसने किसके लिए बनाया, क्यों बनवाया, कैसे बनवाया और कहां बनवाया, ये बातें सभी लोग जानते हैं और इसे लेकर कई तरह के मत भी प्रचलित है, लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें अधिकतर लोग नहीं जानते। हालांकि इंटरनेट के ज़माने में सबकुछ जान जाना आसान है, फिर भी जो नहीं जानते उनके लिए ताजमहल के इन रहस्यमयी तथ्यों पर नज़र डालना बेहद ज़रूरी है, जो इस खूबसूरत इमारत की चकाचौंध में दिखाई नहीं पड़ते।

सबसे पहली बात, जिसका रहस्य आज तक उजागर नहीं हुआ, वह ये कि ताजमहल के मकबरे की छत पर एक छेद है। मकबरे की छत के इस छेद से टपकती बूंद के पीछे कई रहस्य प्रचलित हैं, जिसमें सबसे प्रचलित रहस्य यह है, कि ताजमहल के बनने के बाद शाहजहां ने जब सभी मज़दूरों के हाथ काटने की घोषणा की, तो मजदूरों ने ताजमहल को पूरा करने के बावजूद इसमें एक ऐसी कमी छोड़ दी, जिससे शाहजहां का एक कंपलीट इमारत बनाने का सपना पूरा नहीं हो सके।

शाहजहां ने जब पहली बार ताजमहल का दीदार किया तो कहा, कि ‘ये इमारत सिर्फ प्यार की कहानी बयां नहीं करेगी, बल्कि उन सभी लोगों को दोषमुक्त करेगी जो मनुष्य का जनम लेकर हिन्दुस्तान की इस पाक ज़मीन पर अपने कदम रखेंगे और इसकी गवाही चांद-सितारे देंगे।’

कहा जाता है, कि जिन मजदूरों ने ताजमहल को बनाया था, शाहजहां ने उनके हाथ कटवा दिये थे। लेकिन इतिहास में वापिस लौटा जाये, तो ताजमहल के बाद भी कई इमारतों को बनवाने में उन लोगों ने अपना योगदान दिया जिन्होंने ताजमहल बनाया था। उस्ताद अहमद लाहौरी उस दल का हिस्सा थे, जिन्होंने ताजमहल जैसी भव्य इमारत का निर्माण किया था और उस्ताद अहमद की देखरेख में ही लाल किले के निर्माण का कार्य शुरू हुआ था।

यदि ताजमहल की मीनारों पर गौर किया जाये, तो आप देंखेंगे की चारों मीनारें सीधी खड़ी न होकर एक दूसरे की ओर झुकी हुई हैं। इमारतों का ये झुका हुआ निर्माण बिजली और भूकंप के दौरान मुख्य गुंबद पर न गिरने के लिए किया गया था। कुछ लोग तो कहते हैं, कि चारों मीनारें गुंबद को झुक कर सलाम कर रही हैं, इसीलिए झुकी हुई हैं।

क्या आपको मालूम है, कि एक बार ताजमहल को बेचा भी जा चुका है? बिहार के सुप्रसिद्ध ठग नटवरला के बारे में यह कहानी प्रचलित है, कि एक बार उसने ताजमहल को मंदिर बता कर बेच दिया था।

कहा जाता है, कि जिन मजदूरों ने ताजमहल को बनाया था, शाहजहां ने उनके हाथ कटवा दिये थे। लेकिन इतिहास में वापिस लौटा जाये, तो ताजमहल के बाद भी कई इमारतों को बनवाने में उन लोगों ने अपना योगदान दिया जिन्होंने ताजमहल बनाया था। उस्ताद अहमद लाहौरी उस दल का हिस्सा थे, जिन्होंने ताजमहल जैसी भव्य इमारत का निर्माण किया था और उस्ताद अहमद की देखरेख में ही लाल किले के निर्माण का कार्य शुरू हुआ था।

जब ताजमहल बना था, तो उसकी कलाकृति में 28 तरह के कीमती पत्थरों को लगाया गया था। उन पत्थरों को शाहजहां ने चीन, तिब्बत और श्रीलंका से मंगवाया था। ब्रिटिश काल के समय इन बेशकीमती पत्थरों को अग्रेजों ने निकाल लिया था, जिसके बारे में यह कहा जाता है, कि वे बेशकीमती पत्थर किसी की भी आंखें चौंधियाने की काबिलियत रखते थे।

किसी भी इमारत के बनने के पहले और बाद में, जो बात सबसे पहले हमारे मन में आती है, वो ये है, कि इस इमारत के निर्माण में खर्च कितना आया था? तो हम बता देते हैं, कि ताजमहल के बनने में 32 मिलियन खर्च हुए थे, जिसकी आज की कीमत 106.28 से भी अधिक है।

और सबसे मज़ेदार बात तो यह है, कि कुतुब मीनार नाम की जिस इमारत को हम सबसे ऊंची इमारत कहते हैं, ताजमहल उससे भी ऊंचा है। कुतुबमीनार को देश की सबसे ऊंची इमारत के तौर पर नापा जाता है, लेकिन इसकी ऊंचाई ताजमहल के सामने छोटी पड़ जाती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ताजमहल कुतुब मीनार से 5 फीट ज्यादा ऊंचा है।

ताजमह के प्रांगण में लगे सारे फव्वारे एक ही समय पर काम करते हैं, और सबसे अश्चर्य में डाल देने वाली बात ये है, कि ताजमहल में लगा हुआ कोई भी फव्वारा किसी पाईप से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि हर फव्वारे के नीचे तांबे का टैंक बना हुआ है, जो एक ही समय पर भरता है और दबाव बनने पर एकसाथ काम करता है।

इस इमारत को देखने के लिए एक दिन में सबसे ज्यादा भीड़ इकट्ठी होती है। पूरी दुनिया में कोई ऐसी दूसरी इमारत नहीं है, जहां एक दिन में इतने सैलानी इकट्ठे होते हों। ताजमहल को देखने के लिए पूरी दुनिया से 12,000 के आसपास सैलानी हर रोज़ आगरा की ओर रवाना होते हैं।

शाहजहां के उस सपने के बारे में आपको मालूम है, जो उन्होंने अपनी बेग़म मुमताज महल के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए देखा था। काले ताजमहल का सपना। शाहजहां चाहते थे, कि मुमताज के लिए बने सफेद तामहल के बाद वे अपने लिए काला ताजमहल बनवायें, लेकिन जब उन्हें उनके बेटे औरंगज़ेब ने कैद कर लिया तो ये सपना हमेशा-हमेशा के लिए सपना बनकर ही रह गया।

एक बात जो हैरान करती है वो ये है, कि ताजमहल का रंग बदलता है। ताजमहल अलग-अलग पहर में अलग अलग रंगों में दिखाई देता है और इस हैरानी की वजह है ताजमहल का संगमरमरीय सफेद रंग का होना। सफेद रंग हर रंग में मिल कर उसी का रंग ले लेता है। सुबह देखने पर ताजमह गुलाबी दिखता है, शाम को दूधिया सफेद, शाम होते-होते तक नारंगी और रात की चांदनी में सुनहरा दिखता है।

कहा जाता है, कि ताजमहल शाहजहां ने नही बल्कि समुद्रगुप्त ने छठवीं शताब्दी में बनवाया था। जिस जगह पर हम आज की तारीख में ताजमहल जैसी भव्य इमारत देख पा रहे हैं, वहां पहले शिव मंदिर था, जिसे तेजोमहालय के नाम से जाना जाता था और उसकी छत से टपकने वाले पानी शिव जी के शिवलिंग पर बूंद-बूंद करके टपकता था।

(किसी भी बात के पीछ कई तरह के रहस्य और मान्यताएं छुपी होती हैं। हमारी यह स्टोरी किसी भी तरह के सच के होने न होने का दावा नहीं करती। इस कॉलम के द्वारा हम सिर्फ उन चीज़ों के बारे में बात करेंगे, जो रहस्यमयी हैं और लोगों के कहे सुने पर आधारित हैं, इसलिए रहस्य अब भी बरकरार है।)

taj juma mubarka

फ्राइडे या शुक्रवार (जुम्मे) ताजमहल में हिन्दुओ को एंट्री नहीं मिलती, इस दिन मुस्लिमो का प्रवेश मुफ्त मिलती है !

दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में शुमार और दुनिया के आठ अजूबो में शामिल रहे ताजमहल के बारे में क्या आप ये सच्चाई जानते है, के इसमें हिन्दू और दूसरे धर्मो के लोगो को प्रवेश की अनुमति नही है. अगर आप इस दिन आगरा जाने और ताजमहल देखने का कार्यक्रम बना रहे है तो रद्द कर दीजिये.

हालाँकि ये जानकारी ताजमहल की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है लेकिन इसमें इसका कोई कारन नही बताया गया है, और वो ये है ई शुक्रवार( जुम्मे के दिन) हिन्दू या दुनिया के और किसी भी धर्मावलम्बी को ताजमहल में जाने की इजाजत नही मिलती है. ऐसा क्यों है इसका कारन भी धार्मिक है और पता नही ये कब से शुरू किया गया है.

दरअसल शुक्रवार के दिन वंहा के मुस्लिम धर्म के लोग जुम्मे की नमाज ताजमहल में ही अदा करते है, और इस कारन किसी और धर्म के लोगों को इस दिन प्रवेश की इजाजत नही है. हालाँकि आप इस दिन बाकि हेरिटेज देख सकते है लेकिन ताजमहल में प्रवेश वर्जित होगा.

ये कब से शुरू हुआ है इसके बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नही मिल गई है लेकिन अगर आप शुक्रवार के दिन ताजमहल देखने पहुँच गए तो आपको काफी फ़्रस्ट्रेटेड फील हो सकता है.

 

ताजमहल के बारें में फैलाई जा रही है ये झूठी बातें, जबकि ये है सच्चाई

दुनिया के सात अजूबों में से ताजमहल भी आता है, इसको बनाने वाले मुग़ल शासक शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताजमहल की याद में बनवाया था। दुनियाभर में ताजमहल को एक प्रेम के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। दुनियाभर के लोग इस अजूबे को देखने के लिए आते है, क्योंकि भारत में ऐसी कई प्राचीन इमारते है जिन्हें विदेशी पर्यटक देखना चाहते है और उनमें से सबसे पहले ताजमहल का ही नंबर आता है। ताजमहल का निर्माण उत्तर प्रदेश के आगरा में है और यह ताजमहल यमुना नदी के किनारे पर बना हुआ है जिसकी वजह से इसकी सुंदरता पर चार चाँद लग जाते है।

इस ताजमहल को बिलकुल सफ़ेद संगमरमर से बनाया गया है और इसे बनाने के लिए बीस हजार मजदूरों ने काम किया था और इसको बनाने में तकरीबन बीस साल का समय भी खर्च हुआ था। हमारे देश में ताजमहल को लेकर कई अफवाहे है और लोग उन्हें सच भी मानते है। जैसे कि, सबसे ज्यादा लोगों में यह भ्रम फैलाया गया है कि, ताजमहल को बनाने के बाद उन सभी मजदूरों के हाथ बादशाह ने कटवा दिए थे, लेकिन इस बात में ज़रा भी सच्चाई नहीं है और इसी तरह की हकीक़त बताने के लिए आज हम आपको ताजमहल के बारें में बताने जा रहे है।

अफवाह No1: ये अफवाह संघियों द्वारा फैलाई गई है कि, ताजमहल एक शिव मंदिर है।

ताजमहल एक शिव मंदिर है

ताजमहल एक शिव मंदिर है

हकीक़त: एएसआई ने आगरा के कोर्ट में जवाब देकर कहा कि, ताजमहल का निर्माण शाहजहाँ ने ही करवाया था और इसके हिन्दू मंदिर होने का कोई सबूत ही मौजूद नहीं है।

अफवाह No. 2 : ताज महल के बारें में यह अफवाह भी फैलाई जाती है कि, ‘ताज महल को भूत और जिन्न इसको बनने नहीं दे रहे थे।

ताज महल को भूत और जिन्न इसको बनने नहीं दे रहे थे

ताज महल को भूत और जिन्न इसको बनने नहीं दे रहे थे

ताज महल को भूत और जिन्न इसको बनने नहीं दे रहे थे

सच्चाई: एएसआई के एक ऑफिसर के अनुसार, भूतों और जिन्नों के जरिये से ताजमहल की नींव को क्षतिग्रस्त करने के कोई सबूत ही मौजूद नहीं है इसलिए यह सिर्फ एक अफवाह ही है।

अफवाह No3: ताजमहल के बारें में यह अफवाह भी फैलाई जाती है कि, ‘ताजमहल रंग बदलता है पूरे दिन भर में।

ताजमहल रंग बदलता है पूरे दिन भर में

 ताजमहल की हकीक़त

हकीक़त: लेकिन दरअसल हकीक़त ये है कि, ताजमहल सफ़ेद संगमरमर से बना हुआ है इसलिए सूरज की किरणें ताजमहल पर पड़ती है और दिन के हिसाब से सूरज में भी बदलाव होता है तो इसलिए ऐसा प्रतीत होता है कि, ताजमहल रंग बदल रहा है। वक़्त के हिसाब से भी ताजमहल सुबह-सवेरे के वक़्त सुनहरें रंग में नजर आता है और जब शाम की लाली छा जाती है तो इसका रंग कुछ गुलाबी नजर आता है।

अफवाह No 4: शाहजहाँ की बेगम मुमताज के बारें में यह अफवाह फैलाई जाती है कि, ताजमहल में शाहजहाँ की बेगम मुमताज की ममी दफन की हुई है।

ताजमहल में शाहजहाँ की बेगम मुमताज की ममी दफन की हुई है।

 ताजमहल की हकीक़त

हकीक़त: एएसआई के पास भी मुमताज की ममी के कोई सबूत नहीं है, दरअसल जब शाहजहाँ की बेगम मुमताज का इन्तेकाल हुआ था तब उनकी लाश को बुहारनपुर, इसके बाद फिर निर्माणाधीन ताजमहल के परिसर में दफन किया गया था, उसके 22 साल बाद शाहजहाँ की बेगम मुमताज को ताजमहल के मुख्य स्मारक में दफ़न किया गया।

अफवाह No 5: एक अफवाह ये भी फैलाई जाती है कि, ताजमहल को ख्वाब में देखकर इसका नक्शा तैयार किया गया था।

ताजमहल को ख्वाब में देखकर इसका नक्शा तैयार किया गया था।

 ताजमहल की हकीक़त

हकीक़त: जबकि सच्चाई ये है कि, ताजमहल को बनाने के लिए दुनियाभर के आर्किटेक्ट से मदद ली गई थी। लेकिन इस बात की पुख्ता जानकारी नहीं है कि, इसका डिजाईन किस आर्किटेक्ट ने तैयार किया था।

अफवाह No 6: शाहजहाँ के बारें में ताजमहल को लेकर यह अफवाह भी फैलाई जाती है कि, बादशाह काला ताजमहल का भी निर्माण करना चाहते थे।

शाहजहाँ काला ताजमहल का भी निर्माण करना चाहते थे।

 ताजमहल की हकीक़त

हकीक़त: एएसआई के अनुसार, काला ताजमहल को लेकर कोई पुख्ता सबूत नहीं है और यह कभी अस्तित्व में था ही नहीं और न ही इसके निर्माण को लेकर इसके कोई सबूत सामने आये है। बल्कि, यह कहानी तो वर्ष 1910 में गाइडों ने ही अपने आप गढ़ ली थी।

अफवाह No 7 : चांदनी रात को ताजमहल चमकने लगता है।

चांदनी रात को ताजमहल चमकने लगता है।

 ताजमहल की हकीक़त

हकीक़त: चांदनी रात में ताजमहल चमकने की हकीक़त ये है कि, इस इमारत को बनाने के लिए दुनियाभर के 28 तरह के पत्थरों से इसका निर्माण किया गया है। इन पत्थरों की ही ये खासियत है कि, जब शरद पूर्णिमा होती है तो उन पत्थरों की वजह से ताजमहल चमकता हुआ दिखाई देता है और बहुत ही खूबसूरत नजर आता है।

अफवाह No 8: बादशाह शाहजहाँ और उनकी बेगम मुमताज की कब्र पर पानी टपकता है।

मुमताज की कब्र पर पानी टपकता है।

 ताजमहल की हकीक़त

हकीक़त: उर्स के दौरान जब ताजमहल में भीड़ होती है तो इस दौरान नमी बढ़ जाती है और दीवार पर पानी की बूंदे आने लगती है। लेकिन जैसे ही भीड़ ख़त्म होती है तो वह बूंदे गायब हो जाती हैं।

अफवाह No 9: सबसे बड़ी अफवाह ये फैलाई जाती है कि, शाहजहाँ ने ताजमहल को बनाने के बाद 20 हजार कारीगरों के हाथों को कटवा दिया था।

ताजमहल को बनाने के बाद 20 हजार कारीगरों के हाथों को कटवा दिया था।

 ताजमहल की हकीक़त

हकीक़त: इतिहासकार राज किशोर के अनुसार, शाहजहाँ ने उनके हाथ नहीं काटे थे बल्कि, शाहजहाँ ने कारीगरों को आजीवन काम न करने का वडा लिया था और बदले में उन्हें पूरी जिंदगी वेतन देने का भी वादा किया। इसके अलावा एक बात यह भी सामने आती है कि, शाहजहाँ ने अपनी और कई इमारतें उन मजदूरों से ही बनवाई थी जिन्होंने ताजमहल का निर्माण किया था।

अफवाह No 10: शाहजहाँ की मृत्यु को लेकर भी यह अफवाह फैलाई जाती है कि, बादशाह की मौत उनकी बेगम की मौत के सदमे की वजह से हो गई थी।

शाहजहाँ की मृत्यु बेगम की मौत के सदमे की वजह से हो गई थी।

 ताजमहल की हकीक़त

हकीक़त: जबकि, सच्चाई ये है कि, शाहजहाँ की मौत की अफवाह के बाद उनके बेटों में युद्ध हो गया। इस लड़ाई में औरंगजेब की जीत हुई और उन्होंने शाहजहाँ को बंधी बना लिया और फिर उन्हें बीमारी लग गई जिसके कारण उनकी मृत्यु भी हो गई।

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