मुंबई के बारे में पूरी जानकारी

मुंबई एक मायानगरी है

मुंबई एक मायानगरी है

मुम्बई का नाम आते ही दिलो दिमाग पे यह की चकाचौंध जिंदगी अपने आप छा जाती है | मुम्बई  का नाम आते है बॉलीवुड और अपने सितारों की याद जाती बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान हो या बेताज बादशाह अमिताभ बच्चन की या फिर सलमान खान की सभी की दुनिया यही आबाद होती है | भारत के पश्चिमी तट पर महाराष्ट्र राज्य की कैपिटल सिटी मुंबई है | मुंबई को माया नगरी भी कहा जाता है ज्यादातर मुंबई सिटी फिल्म सिटी जानी जाती है | लोग फिल्म की दुनिया में अपना कैरियर बनाने मुंबई जाते हैं और जो भी लोग मुंबई जाते हैं वो वहां की माया देखकर वहीं रह जाते हैं | इस लिए हमें यहां की कुछ बारीकियों का उड्डयन करना पड़े गा जिस से यहां की हक़ीक़त जिंदगी की पहलुओं को जादिक से जान सकते है |  आये हम यहां कुछ मुम्बई  की बारीकियों का अध्यन करे | Luxury Hotels in Mumbai मुंबई एक मायानगरी है

मुम्बई  की जमीनी हकीकत

मुम्बई भारत के पश्चिमी तट पर मजूद है मुम्बई (पहले मुम्बई को लोग बम्बई बुलाते थे ), भारतीय राज्य महाराष्ट्र की राजधानी है। इसकी अनुमानित जनसंख्या ३ करोड़ २९ लाख है जो देश की पहली सर्वाधिक आबादी वाली नगरी है।  इसका गठन लावा निर्मित सात छोटे-छोटे द्वीपों द्वारा हुआ है एवं यह पुल द्वारा प्रमुख भू-खंड के साथ जुड़ा हुआ है। मुम्बई बन्दरगाह भारतवर्ष का सर्वश्रेष्ठ सामुद्रिक बन्दरगाह है। मुम्बई का तट कटा-फटा है जिसके कारण इसका पोताश्रय प्राकृतिक एवं सुरक्षित है। यूरोप, अमेरिका, अफ़्रीका आदि पश्चिमी देशों से जलमार्ग या वायुमार्ग से आनेवाले जहाज यात्री एवं पर्यटक सर्वप्रथम मुम्बई ही आते हैं इसलिए मुम्बई को भारत का प्रवेशद्वार कहा जाता है।

मुम्बई शहर,जैसा हम सभी जानते है की मुम्बई  को  बंबई के नाम से जानते थे, यह महाराष्ट्र, राज्य की राजधानी भी  है। मुम्बई को भारत का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। यह दक्षिण-पश्चिम भारत देश का वित्तीय व वाणिज्यिक केंद्र और अरब सागर में स्थित प्रमुख बंदरगाह है। मुम्बई दुनिया के विशालतम व सबसे घनी आबादी वाले शहरों में से एक है।  मुम्बई एक प्राचीन बस्ती के स्थल पर बसा हुआ है और इसका नामकरण भगवान शंकर की पत्नी पार्वती देवी के एक रूप, स्थानीय देवी मुंबा के नाम पर किया गया है जिनका मंदिर उस स्थल पर था, जहाँ पर अब नगर का दक्षिण-पूर्वी हिस्सा अवस्थित है। मुम्बई लंबे समय से भारत के सूती वस्त्र उद्योग के केंद्र के रूप में विख्यात रहा है, लेकिन अब यहाँ विविध निर्माण उद्योग भी हैं और इसके वाणिज्यिक व वित्तिय संस्थान सशक्त और सबल हैं। इस शहर में अधिकांश बड़े, विकासशील औद्योगिक नगरों की पुरानी समस्या वायु व जल प्रदूषण , झुग्गी, बस्ती और अत्यधिक भीड़भाड़ मौजूद है। द्वीपीय अवस्थिति के कारण मुम्बई का विस्तार सीमित है। ITC Maratha Mumbai

मुम्बई भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक केन्द्र है। जिसकी भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 5% की भागीदारी है। यह सम्पूर्ण भारत के औद्योगिक उत्पाद का 25%, नौवहन व्यापार का 40%, एवं भारतीय अर्थ व्यवस्था के पूंजी लेनदेन का 70% भागीदार है। मुंबई विश्व के सर्वोच्च दस वाणिज्यिक केन्द्रों में से एक है। भारत के अधिकांश बैंक एवं सौदागरी कार्यालयों के प्रमुख कार्यालय एवं कई महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थान जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक, बम्बई स्टॉक एक्स्चेंज, नेशनल स्टऑक एक्स्चेंज एवं अनेक भारतीय कम्पनियों के निगमित मुख्यालय तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियां मुम्बई में अवस्थित हैं। इसलिए इसे भारत की आर्थिक राजधानी भी कहते हैं। नगर में भारत का हिन्दी चलचित्र एवं दूरदर्शन उद्योग भी है, जो बॉलीवुड नाम से प्रसिद्ध है। मुंबई की व्यवसायिक अपॊर्ट्युनिटी, व उच्च जीवन स्तर पूरे भारतवर्ष भर के लोगों को आकर्षित करती है, जिसके कारण यह नगर विभिन्न समाजों व संस्कृतियों का मिश्रण बन गया है। मुंबई पत्तन भारत के लगभग आधे समुद्री माल की आवाजाही करता है। ITC Grand Central, Mumbai

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मुम्बई का इतिहास

पहले के समय में मुंबई एक महा शक्तिशाली राक्षस की नगरी थी वह राक्षस प्रेम और वासना मैं डूबा रहता था | राक्षस को जो भी कन्या पसंद आ जाती थी उसे वह अपने पास रख लेता था |  एक बार वहां से एक राज कन्या पसार हुई तब राक्षस ने उसे बंदी बना लिया और अपनी नगरी में रख लिया | जब भी राक्षस उस राज कन्या के पास जाता था तब राजकन्या घर जाने की जीद पकड़ी हुई थी और इसी जिद के कारण राजकन्या ने खाना पीना छोड़ दिया था |  राक्षस राजकन्या को मनाने के लिए हर रोज जाता था लेकिन राज कन्या कि एक ही जीद थी कि “मुझे घर जाना है” पर वह राक्षस राज कन्या को घर जाने नहीं देता था | ऐसे ही थोड़े दिनों बाद राजकन्या की मृत्यु हो गई | राजकन्या की मृत्यु से दुखी होकर राक्षस भगवान शिव की कठोर तपस्या करने लगा और फिर तपस्या करने के बाद भगवान शिव उस राक्षस को प्रसन्न हुए और राक्षस ने वरदान मांगा |  तब राक्षस ने अपनी नगरी को मायानगरी में बदलने का वरदान माँगा कि यहाँ जो भी एक बार आये वो लौटकर वापस नहीं जाना चाहिए और भोज विलास वासना में लिप्त रह कर अपना पूरा जीवन बिताये |  तब से मुंबई मायानगरी में बदल गई और यहाँ आने वाला हर इंसान मुंबई मायानगरी के भोग, विलास और वासना से भरपूर जीवन को सहजता से स्वीकार करता गया | आज भी जो एक बार मुंबई आता है, वो लौटकर वापस नहीं जाता |

मछुआरों की मूल जनजाति, कोली यहाँ के आरम्भिक ज्ञात निवासी थे, हालाँकि वृहद मुम्बई के कान्दीवली में पाए गए पुरापाषाण काल के पत्थर के औज़ार यहाँ पाषाण काल के दौरान मानव बस्ती की ओर संकेत करते हैं। प्राचीन यूनानी खगोलशास्त्री व भूगोलविज्ञानी टॉलमी के समय में यह क्षेत्र हेप्टेनिशिया के रूप में जाना जाता था और यह 1000 वर्ष ई. पू. में फ़ारस व मिस्र के साथ समुद्री व्यापार का प्रमुख केन्द्र था। तीसरी शताब्दी ई. पू. में यह अशोक के साम्राज्य का हिस्सा था और छठी से आठवीं शताब्दी में यहाँ चालुक्यों का शासन रहा, जिन्होंने अपनी छाप घरपुरी (एलीफ़ेन्टा द्वीप) पर छोड़ी। मालाबार पॉइन्ट पर बना वाकेश्वर मन्दिर सम्भवतः कोंकण तट के शिलाहर प्रमुखों के शासन (9वीं से 13वीं शताब्दी) के दौरान निर्मित किया गया था। दोगिरि के यादवों (1187-1318) के समय में इस द्वीप (जो बाम्बे द्वीप बना) पर महिकावती (माहिम) बस्ती की स्थापना हुई, जो 1924 में हिन्दुस्तान के ख़िलजी वंश के आक्रमणों के जवाब में बनाई गई। इन्हीं के वंशज वर्तमान मुम्बई में पाए जाते हैं और बहुत से स्थानों के नाम आज भी उसी युग से हैं। 1348 में आक्रमणकारी मुस्लिम सेनाओं ने इस द्वीप को जीत लिया और यह गुजरात राज्य का हिस्सा बन गया। माहिम को जीतने की पुर्तग़ाली कोशिश 1507 में असफल रही, लेकिन 1534 में गुजरात के शासक सुल्तान बहादुरशाह ने यह द्वीप पुर्तग़ालियों को सौंप दिया। 1661 में किंग चार्ल्स द्वितीय व पुर्तग़ाल के राजा की बहन कैथरीन आफ़ ब्रैगेंज़ा के विवाह के बाद यह ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया। राजा ने इसे 1668 में ईस्ट इंडिया कम्पनी को सत्तांतरित कर दिया। शुरुआत में कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) व मद्रास (वर्तमान चेन्नई) की तुलना में बंबई कम्पनी की बहुत बड़ी सम्पत्ति ने होकर केवल पश्चिमी तट पर कम्पनी की पैर जमाए रखने में सहायता करता था। Grand Hyatt Mumbai

बिज़नेस केपिटल ऑफ़ इंडिया मुम्बई को पहले बॉम्बे के नाम से जाना जाता था। मुम्बई शहर को बिजनेस केपिटल ऑफ इंडिया के नाम से भी जाना जाता है। यहां देश के प्रमुख वित्तीय और संचार केन्द्र है। भारत का सबसे बड़ा शेयर बाज़ार, जिसका विश्व में तीसरा स्थान है, मुम्बई में ही स्थित है। मुम्बई भारत के पश्चिमी समुद्र तट पर स्थित है। यह अरबियन समुद्र के सात द्वीपों का एक हिस्सा है। इसलिए इसे सात टापुओं का नगर भी कहा जाता है। मुम्बई सामान्य रूप से सात द्वीपों जिनके नाम कोलाबा , माजागांव, ओल्ड वूमन द्वीप, वाडाला, माहीम, पारेल और माटूंगा-सायन पर स्थित है।

सन् 1661 में इंग्लैंड के महाराजा चार्ल्‍स ने पुर्तग़ाल की राजकुमारी कैटरीना डे ब्रिगेंजा से शादी की थी। शादी में दहेज के रूप में चार्ल्‍स को बम्बई शहर मिला था, जो वर्तमान समय में मुम्बई के नाम से जाना जाता है। लेकिन सन् 1668 में मुम्बई ईस्ट इंडिया कम्पनी के हाथों में चला गया। सन् 1868 में महारानी विक्टोरिया ने शहर के प्रशासन को ईस्ट इंडिया कम्पनी से वापस ले लिया।

मुम्बई का भौतिक एवं मानव भूगोल

मुम्बई का भौतिक एवं मानव भूगोल

मुम्बई शहर प्रायद्विपीय स्थल पर बसा हुआ है, जो मूलतः पश्चिम भारत के कोंकण तट के पास स्थित सात द्वीपिकाओं से मिलकर बना है। 17 वीं शताब्दी से अपवाह व भूमि फिर से हासिल करने की परियोजनाओं और जलमार्गों व जल अवरोधकों के निर्माण के कारण ये द्वीपिकाएं मिलकर एक बड़े भूभाग का निर्माण करती हैं, जिसे बंबई द्वीप के नाम से जाना जाता था। इस द्वीप के पूर्व में मुम्बई बंदरगाह का स्थिर जलक्षेत्र है। यह द्वीप निम्न मैदान से बना है, जिसका एक चौथाई हिस्सा समुद्र तल से भी नीचा है; इस मैदान के पूर्वी और पश्चिमी किनारों में निचली पहाड़ियों की दो समानांतर पर्वतश्रेणियाँ हैं। इनमें से लंबी पर्वतश्रेणी द्वारा सुदूर दक्षिण में निर्मित कोलाबा पॉइंट मुम्बई बंदरगाह को खुले समुद्र से बचाता है। पश्चिमी पर्वतश्रेणी मालाबार हिल पर समुद्र तल से 55 मीटर की ऊँचाई पर समाप्त होती है, जो मुम्बई की सबसे ऊँचे इलाकों में से एक है। इन दो पर्वत श्रेणियों के बीच पश्च खाड़ी (बैक बे) का छिछला विस्तार है। इस खाड़ी के शीर्ष और बंदरगाह के बीच कुछ ऊँची भूपट्टिकाओं पर दुर्ग स्थित है, मूलतः इसी के चारों ओर शहर का विस्तार हुआ। अब यहाँ मुख्यतः सार्वजनिक एवं वाणिज्यिक कार्यालय हैं। पश्च खाड़ी से उत्तर की ओर भूतल मध्यवर्ती मैदान की दिशा में ढलान वाली है। बंबई के सुदूर उत्तर में विशाल खारे दलदल हैं।
शहर की संरचना The Lalit Mumbai

मुंबई में पुराने हिस्से ज़्यादा निर्मित हैं, लेकिन अधिक समृद्ध क्षेत्रों, जैसे मालाबार हिल में कुछ हरियाली है। यहाँ कई खुले मैदान व पार्क हैं। मुंबई में लगातार शहरीकरण के इतिहास के कारण शहर के कई हिस्सों में झुग्गी बस्तियाँ बन गईं हैं। इस शहर में अनेक कारख़ानों, बढ़ते यातायात और निकट स्थित तेलशोधनशालाओं के कारण वायु एवं जल प्रदूषण ख़तरे के स्तर तक बढ़ गया है। शहर के दक्षिणी हिस्से में वित्तीय ज़िला (पुराने फ़ोर्ट बंबई के आसपास) स्थित है। सुदूर दक्षिण (कोलाबा के आसपास) और पश्चिम में नेताजी सुभाष चंद्र रोड (मरीन ड्राइव ) तथा मालाबार हिल आवासी क्षेत्र हैं। फ़ोर्ट क्षेत्र के उत्तर में प्रमुख व्यापारिक ज़िला है, जो धीरे-धीरे वाणिज्यिक आवासीय क्षेत्र में शामिल हो रहा है। अधिकांश पुराने कारख़ाने इसी क्षेत्र में स्थित हैं। सुदूर उत्तर में आवासीय क्षेत्र हैं और उनके बाद हाल ही में विकसित औद्योगिक क्षेत्र और झुग्गी बस्तियों के इलाक़े हैं।

मुम्बई की अर्थव्यवस्था

मुम्बई की अर्थव्यवस्था

मुम्बई भारत की आर्थिक धुरी एवं वाणिज्यिक व वित्तीय केन्द्र है। कुछ मायनों में इसकी आर्थिक संरचना भारत में नाभिकीय और पुरातन कालों के संयोजन को प्रदर्शित करती है। इस नगर में भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग स्थित है, जिसमें परमाणु रिऐक्टर और प्लूटोनियम विलग्नक स्थित है। नगर के कई हिस्सों में अब भी ईंधन और ऊर्जा के पारम्परिक जैविक साधनों का इस्तेमाल होता है।

मुम्बई की परिवहन

मुम्बई की परिवहन

मुम्बई सड़क संजाल द्वारा भारत के अन्य हिस्सों से जुड़ा हुआ है। यह पश्चिम तथा मध्य रेलवे का मुख्यालय है और इस नगर से चलने वाली रेलगाड़ियाँ भारत के सभी हिस्सों तक सामान व यात्रियों को ले जाती हैं। छत्रपति शिवाजी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा कई विदेशी हवाई सेवाओं के आगमन का महत्त्वपूर्ण स्थल है। जबकि निकटस्थ सान्ताक्रूज़ हवाई अड्डे से घरेलू उड़ानें भरी जाती हैं। JW Marriott Hotel, Mumbai

मुम्बई में भारत के अंतर्राष्ट्रीय हवाई यातायात का 60 प्रतिशत और घरेलू यातायात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा केन्द्रित है। यहाँ के बंदरगाह पर उपलब्ध सुविधाओं ने मुम्बई को देश का प्रमुख पश्चिमी बंदरगाह बना दिया है। हालाँकि पश्चिमी तट पर मुम्बई के उत्तर में कांडला और दक्षिण में गोवा व कोच्चि जैसे कई अन्य प्रमुख बंदरगाह बन गए हैं, लेकिन यहाँ से अब भी भारत के समुद्री व्यापार का 40 प्रतिशत हिस्सा संचालित होता है। दो उपनगरीय विद्युत रेलप्रणालियाँ मुख्य सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराती हैं और रोज़ महानगरीय क्षेत्र के लाखों लोगों को ढोती हैं। मुम्बई में नगरपालिका के स्वामित्व वाली बस सेवा भी है।

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मुम्बई की प्रशासनिक एवं सामाजिक विशेषताएँ

महाराष्ट्र की राजधानी के रूप में यह शहर राज्य प्रशासन का समेकित राजनीतिक खण्ड है, जिसके मुख्यालय को मंत्रालय कहा जाता है। राज्य सरकार पुलिस बल को नियंत्रित करती है और नगर के कुछ विभागों पर प्रशासनिक नियंत्रण रखती है। डाक एवं टेलीग्राफ़ प्रणाली, रेल, बंदरगाह और हवाई अड्डों जैसे संचार साधनों पर केन्द्र सरकार का नियंत्रण है।

मुम्बई में भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमान का मुख्यालय भी है और यह भारतीय फ़्लैगशिप का बेस भी है। शहर का प्रशासन वृहद (ग्रेटर) मुम्बई के पूर्णतःस्वायत्त नगर निगम के अंतर्गत है। इसकी विधायी संस्था का निर्वाचन हर चार वर्ष में वयस्क मताधिकार द्वारा होता है और यह विभिन्न स्थायी समितियों के माध्यम से काम करती है। राज्य सरकार के द्वारा तीन वर्षों के लिए नियुक्त मुख्य कार्यकारी यहाँ का निगम आयुक्त होता है। महापौर का चुनाव हर वर्ष नगर निगम द्वारा किया जाता है; महापौर निगम की बैठकों की अध्यक्षता करता है और शहर में सर्वाधिक सम्मानित माना जाता है, लेकिन वस्तुतः उसके पास कोई सत्ता नहीं होती। 1885 में कांग्रेस के प्रथम स्थापना अधिवेशन मुम्बई में उत्तर प्रदेश से भाग लेने वाले मुख्य प्रतिनिधि गंगाप्रसाद वर्मा थे।

मुम्बई की शिक्षा

मुम्बई की शिक्षा

मुम्बई की साक्षरता दर समूचे राष्ट्र की साक्षरता दर से काफ़ी अधिक हैं। प्राथमिक शिक्षा मुफ़्त व अनिवार्य है और यह नगर निगम का दायित्व है। माध्यमिक शिक्षा सरकारी व निजी विद्यालयों द्वारा सरकार की देखरेख में कराई जाती है। यहाँ सार्वजनिक एवं निजी पालिटेक्निक व संस्थान हैं, जो विद्यार्थियों को यांत्रिकी, विद्युत तथा रासायनिक इंजीनियरी में विभिन्न डिग्री व डिप्लोमा देते हैं। केन्द्र सरकार के द्वारा संचालित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई. आई. टी.) भी यहाँ पर स्थित है। अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों में:-

सरदार पटेल कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग
वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलाज़िकल इंस्टिट्यूट
के. जी. एस. कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग
एम. एच. एस. एस. कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग
डी. जे. एस. कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग
थोडोमल शाही इंजीनियरिंग कॉलेज
विवेकानन्द इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलोज़ी शामिल हैं।

1857 में स्थापित बाम्बे विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कला, विज्ञान, वाणिज्य व शिक्षा सम्बन्धी महाविद्यालय, चिकित्सा, होमियोपैथी, यूनानी चिकित्सा, फ़ार्मेसी व दन्त चिकित्सा महाविद्यालय, वास्तुशिल्प, शारीरिक शिक्षा एवं प्रबन्धन संस्थान हैं। मुम्बई में महिलाओं के लिए एस. एन. डी. टी. विश्वविद्यालय भी है। 1857 में स्थापित मुम्बई विश्वविद्यालय से बहुत से महाविद्यालय और कई शिक्षण विभाग जुड़े हुए हैं। गोवा में स्थित बहुत से महाविद्यालय इस विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हैं।
कला और संस्कृति

मुम्बई का सांस्कृतिक जीवन इसकी जातीय विविधतायुक्त जनसंख्या को प्रतिबिम्बित करता है। शहर में बहुत से संग्रहालय, पुस्तकालय, साहित्यिक एवं कई अन्य सांस्कृतिक संस्थान, कला, दीर्घाएँ व रंगशालाएँ हैं। भारत

का कोई अन्य शहर अपनी सांस्कृतिक एवं मनोरंजन सुविधाओं के मामले में इतनी उच्च श्रेणी की विविधता और गुणवत्ता का शायद ही दावा कर सके।

साल भर यहाँ पश्चिमी व भारतीय संगीत सम्मेलन एवं महोत्सव और भारतीय नृत्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इंडो-सार्सेनिक वास्तुशिल्प की एक इमारत में द प्रिंस आफ़ वेल्स म्यूज़ियम आफ़ वेस्टर्न इंडिया है, जिसमें कला, पुरातत्त्व Also Visit: Hotels in Goa

व प्राकृतिक इतिहास के तीन प्रमुख विभाग हैं। निकट ही जहाँगीर आर्ट गैलरी है, जो मुम्बई की पहली स्थायी कला दीर्घा है और सांस्कृतिक व शैक्षिक गतिविधियों का केन्द्र है। मुम्बई भारतीय मुद्रण उद्योग का महत्त्वपूर्ण केन्द्र है और यहाँ सशक्त प्रेस है। यहाँ अंग्रेज़ी , मराठी , हिन्दी , गुजराती , सिन्धी व उर्दू में समाचार पत्र प्रकाशित होते हैं। बहुत-सी मासिक, पाक्षिक व साप्ताहिक पत्रिकाएँ भी यहाँ से प्रकाशित होती हैं। आल-इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) का क्षेत्रीय केन्द्र भी मुम्बई में ही है और इस शहर के लिए दूरदर्शन सेवाएँ 1972 में शुरू हुईं। शहर के उत्तर में कृष्णगिरि वन एक राष्ट्रीय उद्यान और छुट्टियाँ बिताने के लिए ख़ूबसूरत सैरगाह है, कन्हेरी गुफ़ाओं के निकट एक प्राचीन बौद्ध विश्वविद्यालय था, यहाँ 100 से अधिक गुफ़ाओं में दूसरी से नौवीं शताब्दी तक के विशालकाय बौद्ध मूर्तिशिल्प हैं। यहाँ पर कई सार्वजनिक उद्यान हैं। जिसमें जीजामाता उद्यान शामिल है, यहाँ पर मुम्बई का चिड़ियाघर स्थित है, यहाँ पर बैपटिस्टा गार्डन भी है, जो मज़गाँव में एक जलाशय पर स्थित है; इसके अलावा मालाबार हिल पर स्थित फ़िरोज़शाह मेहता गार्डन, कमला नेहरू पार्क व स्लोपिंग पार्क हैं। समूचे भारत में लोकप्रिय क्रिकेट के मैच भारतीय क्रिकेट क्लब (ब्रेबोर्न स्टेडियम) और वानखेड़े स्टेडियम में खेले जाते हैं। दौड़ व साइकिल चालन प्रतियोगिताएँ वल्लभ भाई पटेल स्टेडियम में आयोजित की जाती है। स्नान व तैराकी के लिए जुहू समुद्र तट एक प्रसिद्ध स्थान है। Also Visit: Taj Exotica Goa

मुम्बई की पर्व और त्यौहार

मुम्बई की पर्व और त्यौहार

मुंबई के निवासी भारतीय त्यौहार मनाने के साथ-साथ अन्य त्यौहार भी मनाते हैं। दीपावली, होली, ईद, क्रिसमस, नवरात्रि, दशहरा, दुर्गा पूजा, महाशिवरात्रि, मुहर्रम आदि प्रमुख त्यौहार हैं। इनके अलावा गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी भी अधिक धूम-धाम के साथ मनाये जाते हैं। गणेश-उत्सव में शहर में जगह जगह बहुत विशाल एवं भव्य पंडाल लगाये जाते हैं, जिनमें भगवान गणपति की विशाल मूर्तियों की स्थापना की जाती है। ये मूर्तियां दस दिन बाद अनंत चौदस के दिन समुद्र में विसर्जित कर दी जाती हैं। जन्माष्टमी के दिन सभी मुहल्लों में समितियों द्वारा बहुत ऊंचा माखन का मटका बांधा जाता है। इसे मुहल्ले के बच्चे और लड़के मिलकर जुगत लगाकर माखन के मटके को फोड़ते हैं।

मुम्बई की सिनेमा

मुम्बई की सिनेमा

मुम्बई भारतीय फ़िल्म उद्योग का गढ़ है। दादा साहेब फाल्के ने यहां मूक चलचित्र के द्वारा इस उद्योग की स्थापना की थी। इसके बाद ही यहाँ मराठी चलचित्र का भी आरंभ हुआ। आरंभिक बीसवीं शताब्दी में यहां सबसे पुरानी फ़िल्म प्रसारित हुई थी। मुंबई में बड़ी संख्या में सिनेमा हॉल हैं, जो हिन्दी, मराठी और अंग्रेज़ी फ़िल्में दिखाते हैं। विश्व में सबसे बड़ा आईमैक्स (IMAX) डोम रंगमंच भी मुंबई के वडाला में स्थित है। मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म उत्सव और फ़िल्मफेयर पुरस्कार की वितरण कार्यक्रम सभा मुंबाई में ही आयोजित होती हैं। हालांकि मुंबई के ब्रिटिश काल में स्थापित अधिकांश रंगमंच समूह 1950 के बाद भंग हो चुके हैं, फिर भी मुंबई में एक समृद्ध रंगमंच संस्कृति विकसित हुई हुई है। ये हिन्दी, मराठी और अंग्रेज़ी, तीनों भाषाओं के अलावा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी विकसित है। यहां सिने प्रेमियों की कमी नहीं है। अनेक निजी व्यावसायिक एवं सरकारी कला-दीर्घाएं खुली हुई हैं। इनमें जहांगीर कला दीर्घा और राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा प्रमुख हैं। 1833 में बनी बंबई एशियाटिक सोसाइटी में शहर का पुरातनतम पुस्तकालय स्थित है। Also Visit: Vivanta by Taj Holiday Village Goa

मुम्बई का भोजन

मुम्बई का भोजन

मुम्बई में कोलाबा बड़े मियां, मुसाफिर खानं गुलशन-ए-ईरान, हाजी अली जूस सेंटर, शिव सागर जूहू स्थित है। यह सब अरबन तड़का के लिए प्रसिद्ध है। चॉकलेट चाय के लिए दादर स्थित पश्चिम स्टेशन जा सकते हैं। जबकि पानी पूरी के लिए बांद्रा के कराची स्वीट जाया जा सकता है। गर्म पोहा और साबूदाना वड़ा के लिए महापालिका मार्ग जा सकते हैं। होर्नीमन सर्कल के नजदीक अपूर्वा में मंगलोरियन सीफ्रूड का मजा ले सकते हैं। भिंडी बाज़ार और नूर मोहम्मदी में रमजान के महीने में यहां सड़क किनारे लगने वाली रेहड़ी से फिरनी और मालपुआ का स्वाद चख सकते हैं। स्वाति स्नैक्स जो टारडियो मार्ग में स्थित है। भारत के बेहतरीन स्नैक्स मिलते हैं। सिन्धुद्वार जो आर.के. विद्या रोड़, दादर पश्चिम में स्थित है; मछली के लिये प्रसिद्ध है। इसके अलावा यहां के चिड़वा और लड्डू का स्वाद भी ले सकते है। बहुत ही कम दाम में दक्षिण भारतीय शाकाहारी खाने के लिए रामानायक उद्दुपी, माटूंगा केंद्रीय स्टेशन के समीप। अगर आप बांद्रा (पश्चिम) में है तो लक्की रेस्तरां में जा सकते हैं। यह रस्तरां बिरयानी से लिए प्रसिद्ध है। गांधी नगर स्थित गोमांतक हाईवे, अपना बाज़ार, बांद्रा (पूर्व) में कोकर्णी के विभिन्न व्यंजन परोसे जाते हैं। इसके अलावा कोकर्णी खाने के लिए सायबा, बांद्रा (पूर्व) में स्थित है। Also  Visit: Vivanta by Taj Fort Aguada Goa

Mumbai

मुंबई शहर के नजारे

सैर कर दुनिया की गाफ़िल जिंदगानी फिर कहां, जिंदगानी गर रही तो, नौजवानी फिर कहां…’

वाकई यह उम्र होती ही घूमनेफिरने की है और मेरा भी शौक रहा है नईनई जगह देखने, वहां के लोगों से मिलने और नए, अनूठे अनुभवों को महसूस करने का. मेरा ऐसा ही एक यात्रा वृत्तांत है. लंबे समय से इच्छा थी मुंबई घूमने की, लेकिन मुंबई बहुत बड़ा और महंगा शहर है और मैं ठहरा एक स्टूडैंट, जिस का हाथ हमेशा तंग रहता है. होस्टल और कालेज फीस देने के बाद मेरे पास इतने रुपए नहीं बचते कि मुंबई जाना, रहना और घूमना अफोर्ड कर सकूं. लेकिन कहते हैं न कि ‘जहां चाह वहां राह’ तो मैं ने 5-6 दोस्तों को तैयार किया जो मुंबई घूमना चाहते थे. हम पांचों फक्कड़ थे लेकिन सब ने कुछ न कुछ जुगाड़ लगाया और आनेजाने के टिकट के बाद हमारे पास 1 हजार रुपए जमा थे, लेकिन इतने में 2 दिन के लिए मुंबई प्रवास संभव नहीं था.

मन में खयाल आया कि अगर किसी तरह मुंबई में कोई जानपहचान वाला या फिर कोई यारदोस्त ऐसा निकल आए जिस के घर पर रुका जा सके और खानापीना भी हो जाए तो इतने कम बजट में भी मुंबई घूमने का अरमान पूरा हो सकता है. सोचविचार कर मैं ने तुरंत अपना फेसबुक अकाउंट खोला, काफी जद्दोजेहद के बाद मेरी स्कूल टाइम के फ्रैंड रवि से मुलाकात हुई, जो अब मुंबई में अच्छी जौब कर रहा था. उसे फोन मिलाया औैर पुराने दिनों की यादें ताजा करने के साथसाथ अपनी ख्वाहिश भी बताई. रवि ने मुझे अपने पूरे ग्रुप के साथ मुंबई आमंत्रित कर लिया. हम सब दोस्त नियत तिथि पर ट्रेन से मुंबई के लिए रवाना हुए. मुंबई सैंट्रल पर उतरे तो बेहिसाब भीड़ व शोरगुल से नर्वस हो गए. गनीमत थी कि रवि हमें लेने आ गया था. Also Visit: W Goa

मुंबई सैंट्रल से चैंबूर जहां रवि रहता था, तक का सफर हम ने लोकल ट्रेन से तय किया. खचाखच भरी लोकल ट्रेन में फुरती से चढ़नाउतरना भी अपनेआप में अनोखा अनुभव रहा. रवि ने हमें बताया कि लोकल टे्रन ही मुंबई की लाइफलाइन है. आम आदमी इन के जरिए ही यात्रा कर अपने गंतव्य तक कम से कम समय और खर्च में पहुंच पाता है. रवि के घर पहुंच कर ही हम सब ने नाश्ता किया. हम रवि को बजट के बारे में तो पहले ही बता चुके थे, लेकिन कहां, कैसे जाना है, इस बारे में कोईर् नहीं जानता था. तभी रवि हमें चिंतित देख कर बोला कि चिंता मत करो, मैं कुछ ऐसा प्लान करता हूं जिस से कम खर्च में तुम ज्यादा से ज्यादा घूम सको और भरपूर ऐंजौय कर सको.

सब से पहले हम ने विक्टोरिया टर्मिनस देखने का प्लान बनाया, जिस के लिए हम लोकल ट्रेन पकड़ कर चैंबूर से कुर्ला उपनगर पहुंचे. यहां से विक्टोरिया टर्मिनस तक लोकल टे्रन से ही गए, जिस का किराया मात्र 15 रुपए था. विक्टोरिया टर्मिनस का नया नाम छत्रपति शिवाजी टर्मिनस है. यह एक हैरिटेड बिल्डिंग है. हम ने यहां उतर कर सब से पहले इसे ही देखा. इस के रखरखाव व साफसफाई ने इस की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए थे. विक्टोरिया टर्मिनस से बाहर निकले तो रवि ने हमें फेमस मनीष मार्केट में घुमाया, जो यहां की बड़ी सस्ती मार्केट थी. कुछ आगे बहुप्रसिद्घ जहांगीर आर्ट गैलरी थी, जिसे हम ने बाहर से ही देखा. इसी क्षेत्र में मशहूर फैशन स्ट्रीट भी है, जिस के बारे में अधिकांश लोग जानते हैं. यहां लेटैस्ट टैं्रड के कपड़े बहुत कम कीमत पर मिलते हैं. हम ने भी यहां से थोड़ी शौपिंग की.

रवि ने मसजिद बंदर नाम की मार्केट का भी जिक्र किया, जहां सस्ते में अच्छा सामान मिलता था, लेकिन हम सब को जुहू बीच जाने की जल्दी थी. सो हम वापस विक्टोरिया टर्मिनस आए और लोकल टे्रन पकड़ कर मैरीन लाइंस स्टेशन पहुंचे. वहां से जुहू बीच चौपाटी पहुंचे. दोपहर का समय था और उस पर मुंबई का हौट और उमस भरा मौसम. सारा बदन चिपचिप कर रहा था. मगर बीच पर पहुंचते ही जब नजर पड़ी दूर तक फैले विशाल समुद्र पर तो गरमी में भी ठंडक का एहसास होने लगा. हम दौड़ते हुए लहरों से जा मिले. जी भर कर नहाए व सैल्फी ली. फिर हम चौपाटी पहुंच गए, वहां की रौनक भी देखने लायक थी. मुंबई के फेमस पावभाजी, सेवपूरी व पानीपूरी के स्टौल देख कर हमारे मुंह में पानी आने लगा. भले ही पावभाजी थोड़ी महंगी थी लेकिन उस का टेस्ट इतना बढि़या था कि पैसे वसूल हो गए. अब हम सब थकान महसूस करने लगे, सो कुछ देर रेत पर लेट कर आराम किया. Also Visit: Radisson Blu Resort Goa

अब हमें मैरीन ड्राइव व नरीमन पौइंट जाना था जो यहां से आधे घंटे के वौकिंग डिस्टैंस पर थे. रवि ने बताया कि बस हमें जल्दी पहुंचा सकती है, लेकिन हम ने पैदल ही चलने का निर्णय लिया, क्योंकि शाम होने से मौसम सुहाना हो गया था औैर फिर बजट का भी खयाल रखना था. चारों ओर के नजारे देखते हुए हम नरीमन पौइंट पहुंचे. यहां बड़ीबड़ी कंपनियों के शानदार औफिस और फाइव स्टार होटल देखने को मिले. कतार में चलती देशीविदेशी महंगी कारों का सैलाब भी था. यहां की हवा में ही जैसे अमीरी की महक रचीबसी थी. सड़क के दूसरी तरफ रोशनी से जगमगाता मैरीन ड्राइव, रात को भी दिन का नजारा पेश कर रहा था. अधिकतर लोग मैरीन ड्राइव की चौड़ी मुंडेर पर बैठे सड़क की रौनक देख रहे थे, तो कई कपल समुद्र की ओर मुंह किए बैठे थे. हम भी यहीं बैठ गए और चारों ओर बिखरी खूबसूरती को देखने लगे. फिर हम मैरीन लाइंस स्टेशन से लोकल ट्रेन पकड़ कर चर्चगेट स्टेशन पहुंचे और फिर वहां से 20 मिनट कदमताल कर विश्वप्रसिद्ध गेट वे औफ इंडिया पहुंचे. चांदनी रात में इस की भव्यता औैर खूबसूरती देखते ही बनती थी, रात में भी यहां काफी पर्यटक मौजूद थे.

गेट वे औफ इंडिया से ही एलीफेंटा केव्स के लिए समुद्र के बीचोंबीच से फेरी बोट जाती है. इस में आनेजाने व केव्स घूमने में आधे दिन से भी ज्यादा समय लगता है. इसी क्षेत्र में कोलाबा कासवे नामक मशहूर मार्केट है, जहां शौपिंग के शौकीन लोग हमेशा जाते हैं. लेकिन हम गेट वे औफ इंडिया का लुत्फ ले कर चर्चगेट स्टेशन आए औैर वहां से लोकल ट्रेन पकड़ कर चैंबूर वापस आ गए.

अगले दिन चैंबूर से सिद्धिविनायक मंदिर तक हम बस में आए और फिर दादर उपनगर की ओर रुख किया, जो शौपिंग के लिए काफी फेमस है. यहीं पर जंबो किंग के नाम से फेमस शौप है, जहां हम ने जंबो वड़ापाव खाया जो काफी स्वादिष्ठ और बड़ा था. पेट भर गया. रवि ने कहा कि वड़ापाव मुंबई के लोकप्रिय रोड साइड स्नैक्स में से है. अब हम ने हाजी अली दरगाह का रुख किया. यहां पहुंचने का रास्ता बड़ा ही मनमोहक है. समुद्र के बीचोंबीच रास्ता है, जब उस पर चलते हैं तो दोनों तरफ उछाल मारती लहरें हमारा स्वागत करती प्रतीत होती हैं. यह रास्ता थोड़ा गीला होने के कारण फिसलन भरा भी था. दरगाह भव्य थी. यहां कई हिंदी फिल्मों के मशहूर दृश्य फिल्माए गए हैं. हम ने वहां जा कर मस्ती की. फिर रवि हम सब को 80 नंबर की बस में बैठा कर बांद्रा, जोकि अमीरों का इलाका है, ले गया. यहां लिंकिंग रोड खरीदारी के लिए मशहूर है, खासतौर पर फुटवियर औैर कपड़ों के लिए. मेरे कुछ दोस्तों ने यहां थोड़ीबहुत खरीदारी की.

फिर हम बैंड स्टैंड पहुंचे. यह भी काफी खूबसूरत जगह है. जहां रात को लोगों का हुजूम उमड़ता है. हमें तो देखना था शाहरुख खान का बंगला मन्नत, जो बैंड स्टैंड के पास ही है. बंगले को देख कर लगा जैसे शाहरुख खान को ही देख लिया. हम ने सिक्योरिटी गार्ड को पटा कर मन्नत के सामने सैल्फी भी ली. फिर सलमान खान का गैलेक्सी अपार्टमैंट भी देखा. यह सब देख हम वापस चैंबूर पहुंचे. यहां रवि ने हमें मोनोरेल में सफर करवाया. रवि ने हमें बताया कि देश की प्रथम मोनोरेल मुंबई में चैंबूर से वडाला के बीच चली है. हम भी चैंबूर से वडाला गए. इस का टिकट मात्र 12 रुपए था. अगले दिन सुबह ही हमें अपने घर के लिए रवाना होना था, रवि ने हमें मुंबई सैंट्रल पहुंचाया. उसे धन्यवाद दे कर हम सब ट्रेन में चढ़ गए. रवि जैसे दोस्त की वजह से ही हम कम बजट में मुंबई घूम पाए.मुंबई शहर की जिंदादिली, यहां के लोगों का दोस्ताना व्यवहार, अनुशासन हमें बहुत अच्छा लगा. मीठी, खूबसूरत यादों की पोटली साथ लिए हम वापस आ गए.

बॉम्बे से मुंबई बनते-बनते कितना बदल गया ये महानगर, जानिए मायानगरी को करीब से

भारत देश के 29 राज्यों में सबसे ज्यादा जो शहर अट्रैक्ट करता है तो वो महाराष्ट्र में स्थित मायानगरी ‘मुंबई’ है. जो साल 1995 से पहले ‘बॉम्बे’ के नाम से लोकप्रिय था. मुंबई को भारत की आर्थिक राजधानी कहा जाता है क्योंकि यहां स्थित भारतीय हिन्दी सिनेमा (जिसे बॉलीवुड के नाम से जाना जाता है) से हर साल कई हज़ार करोड़ रूपये का व्यापार होता है. इसके अलावा कई मल्टीनेशनल कम्पनियां भी यहां स्थित हैं. मुंबई महाराष्ट्र की राजधानी है. दुनिया के सबसे अमीर परिवारों में से एक अंबानी परिवार भी मुंबई में ही रहते हैं. यहां घूमने के लिए भी बहुत से आकर्षक जगह हैं. तो चलिए आज आपको मुंबई नगर से रूबरु करवाते हैं….

मुंबई शहर के बारे में 20 रोचक बातें

मुंबई शहर के बारे में 20 रोचक बातें 

1. मछुआरों की मूल जनजाति, कोली यहाँ के शुरुआती समय के निवासी थे, हालांकि मुम्बई के कान्दीवली में पाए गए पुरापाषाण काल के पत्थर के औज़ार यहाँ पाषाण काल के दौरान मानव बस्ती की ओर संकेत करते हैं.

2. मानव आबादी के लिखित प्रमाण 250 ई.पू तक मिलते हैं, जब इसे हैप्टानेसिया कहा जाता था. तीसरी शताब्दी ई.पू. में ये द्वीपसमूह मौर्य साम्राज्य का भाग बना, जब बौद्ध सम्राट अशोक महान का शासन था.

3. साल 1661 में किंग चार्ल्स द्वितीय व पुर्तग़ाल के राजा की बहन कैथरीन आफ़ ब्रैगेंज़ा के विवाह के बाद यह ब्रिटिश नियंत्रण में आ गया. राजा ने इसे साल 1668 में ईस्ट इंडिया कम्पनी को दे दिया. Also Visit: Ramada Caravela Beach Resort

4. शुरुआत में कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) व मद्रास (वर्तमान चेन्नई) की तुलना में बंबई कम्पनी की बहुत बड़ी सम्पत्ति से होकर केवल पश्चिमी तट पर कम्पनी के पैर जमाए रखने में सहायता करता था.

5. मुम्बई को पहले बॉम्बे के नाम से जाना जाता था. मुम्बई शहर को बिजनेस केपिटल ऑफ इंडिया के नाम से भी जाना जाता है. यहां देश के प्रमुख वित्तीय और संचार केन्द्र है.

6. भारत का सबसे बड़ा शेयर बाज़ार, जिसका विश्व में तीसरा स्थान है, मुंबई में ही स्थित है. मुंबई भारत के पश्चिमी समुद्र तट पर स्थित है. यह अरबियन समुद्र के सात द्वीपों का एक हिस्सा है। इसलिए इसे सात टापुओं का नगर भी कहा जाता है.

7. मुम्बई सामान्य रूप से सात द्वीपों जिनके नाम कोलाबा, माजागांव, ओल्ड वूमन द्वीप, वाडाला, माहीम, पारेल और माटूंगा-सायन पर स्थित है.

8. साल 1661 में इंग्लैंड के महाराजा चार्ल्‍स ने पुर्तग़ाल की राजकुमारी कैटरीना डे ब्रिगेंजा से शादी की थी. शादी में दहेज के रूप में चार्ल्‍स को बंबई शहर मिला था, जो वर्तमान समय में मुम्बई के नाम से जाना जाता है.

9. साल 1668 में मुम्बई ईस्ट इंडिया कम्पनी के हाथों में चला गया. साल 1868 में महारानी विक्टोरिया ने शहर के प्रशासन को ईस्ट इंडिया कम्पनी से वापस ले लिया.

10. यह महानगर, मुंबई उपनगर जिलों व नवी मुंबई और ठाणे शहरों को मिलाकर बनता है. मुंबई शहर भारत के पश्चिमी तट पर कोंकण तटीय क्षेत्र में उल्हास नदी पर स्थित है.

11. यहां पर रेलगाड़ियां छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, दादर, लोकमान्य तिलक टर्मिनस, मुंबई सेंट्रल, बांद्रा टर्मिनस एवं अंधेरी से शुरु या खत्म होती हैं. जिसमें हर रोज करीब 6.3 मिलियन यात्री सफर करते हैं.

12. मुंबई का छत्रपति शिवाजी अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट है. जो दक्षिण एशिया सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है. जुहू विमानक्षेत्र भारत का प्रथम विमानक्षेत्र है, जिसमें फ्लाइंग क्लब व एक हैलीपोर्ट भी हैं.

13. मुंबई में बहुत से समाचार-पत्र, प्रकाशन गृह, दूरदर्शन और रेडियो स्टेशन हैं. मराठी पत्रों में नवकाल, महाराष्ट्र टाइम्स, लोकसत्ता, लोकमत, सकाल प्रमुख हैं.

14. मुंबई में प्रमुख अंग्रेज़ी अखबारों में टाइम्स ऑफ इंडिया, मिड डे, हिन्दुस्तान टाइम्स, डेली न्यूज़ अनालिसिस एवं इंडियन एक्स्प्रेस आते हैं.

15. मुंबई में हर साल गणपति पूजन का बहुत बड़ा महोत्सव होता है. इसके अलावा यहां का जन्माष्टमी भी बहुत लोकप्रिय है.

16. मुंबई में घूंमने के लिए मरिन ड्राइव, जुहू चौपाटी, गेटवे ऑफ इंडिया, सिद्धीविनायक मंदिर, एलिफेंटा की गुफाएं, एस्सेल वर्ल्ड, हाजी अली दरगाह, हैंगिंग गार्डन, मुंबई का टिफिन वाला, ताज होटल बहुत लोकप्रिय है.

17. मुंबई नगर में भारतीय हिन्दी सिनेमा (बॉलीवुड) के नाम से पूरी दुनिया में लोकप्रिय है. जिसमें बहुत से सितारे जो अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हैं वे सब यहीं रहते हैं. Also Visit: Zuri White Sands Goa

18. बॉलीवुड के दो दिग्गज अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान के बंगले मन्नत और जलसा, प्रतीक्षा के नाम से बहुत ज्यादा लोकप्रिय है.

19. मुंबई में मराठी भाषा का प्रचलन है. यहां बालठाकरे और राजठाकरे की शिवसेना बहुत प्रचलित है. उनका राज मुंबई शहर पर चलता है.

20. गेटवे ऑफ इंडिया को 2 दिसम्बर, 1911 को भारत में सम्राट जॉर्ज पंचम व महारानी मैरी के आगमन पर स्वागत हेतु बनाया गया, जो कि 4 दिसम्बर, 1924 को पूरा हुआ.

मुंबई शहर के बारे में 20 रोचक बातें

मुंबई सपनो का शहर

मुंबई सपनो का शहर माना जाता है ..वह सपने जो जागती आँखों से देखे जाते हैं ..और बंद पलकों में भी अपनी कशिश जारी रखते हैं ..पर सपना ही तो है जो टूट जाता है यही लगा मुझे मुंबई शहर दो बार में देख कर हम्म शायद मुंबई वाले मुझसे इस कथन पर नाराज हो जाएँ ..हम जिस शहर में रहते हैं वही उसकी आदत हो जाती है .दूसरा शहर तभी आकर्षित करता है जब वह अपनी उसकी सपने की जगमग लिए हो | हर शहर को पहचान वहां के लोग और वहां बनी ख़ास चीजे देती हैं | और मुख्य रूप से सब उनके बारे में जानते भी हैं ..जैसे मुंबई के बारे में बात हो तो वहां का गेट वे ऑफ इंडिया और समुंदर नज़रों के सामने घूम जायेंगे | उनके बारे में बहुत से लोग लिखते हैं और वह सब अपनी ही नजर से देखते भी हैं …और वही नजर आपकी यात्रा को ख़ास बना देती है | किसी भी शहर को जानना एक रोचक अनुभव होता है ..ठीक एक उस किताब सा जो हर मोड़ पर एक रोमांच बनाए रखती है और मुंबई के समुन्दर में तो हर लहर में यह बात लागू होती है ..कि लोगो की भीड़ की लहर बड़ी व तेज रफ़्तार से भाग रही है या समुन्दर की लहरे तेजी से आपको खुद में समेट रहीं है |

मैं अभी हाल में ही मैं दूसरी बार मुंबई गयी .पहली बार ठीक शादी के बाद जाना हुआ था .तब उम्र छोटी थी और वो आँखों में खिली धूप से सपने देखने की उम्र थी जम्मू शहर से शादी दिल्ली में हुई थी और उस वक़्त मनोरंजन का जरिया बहुधा फिल्म देखना होता था ..कोई भी कैसी भी बस फिल्म लगी नहीं और टिकट ले कर सिनेमा हाल में ..लाजमी था जब इतनी फिल्मे देखी जाती थी तो उस वक़्त नायक नायिका ही जिंदगी के मॉडल थे ..खुद को भी किसी फिल्म की नखरीली हिरोइन से कम नहीं समझा करते थे ..और नयी नयी शादी फिर उसी वक़्त मुंबई जाना एक सपने के सच होने जैसा था ..पर वहां पहुँचते ही ऐसे वाक्यात और ऐसी भागमभाग देखी कि तोबा की वापस कभी इस नगरी में न आयेंगे ..जम्मू स्लो सीधा सा शहर दिल्ली में रहने की आदत मुंबई के तेज रफ़्तार से वाकई घबरा गयी ..लोकल पर भाग कर चढना और बेस्ट बस के भीड़ के वह नज़ारे कभी भूल नहीं पायी ..तीस साल के अरसे में ..याद रहा तो सिर्फ एलिफेंटा केव्स और जुहू चौपाटी पर घूमना ( तब वह कुछ साफ़ सा था ) खैर वह किस्से तो फिर कभी ..चर्च गेट के किसी रेस्ट हाउस में ठहरे थे ..अधिक दिन नहीं थे सिर्फ पांच दिन .जिस में एक दिन ससुर जी के किसी दोस्त के यहाँ लंच था ..लोकल ट्रेन पकड कर टाइम पर आने का हुक्म था और वहां अधिक जान पहचान न होने के कारण मुश्किल से सिर्फ खाना खाने जितना समय बिताया और यह मन में बस गया की मुंबई के लोग बहुत रूखे किस्म के होते हैं ..वरना नयी नवेली दुल्हन घर आये खाने पर और उसके कपड़ों की गहनों की ( जो सासू माँ ने सिर्फ वही पहन कर जाने की ताकीद की थी बाकी घूमते वक़्त पहनना मना था ) क्या फायदा कोई बात ही न करें और तो और घर के लोगों के बारे में भी अधिक न पूछे …दिल्ली वाले तो खोद खोद के एक पीढ़ी पीछे तक की बात पूछ डालते हैं .:) सो अधिक सोच विचार में समय नष्ट नहीं किया और यही सोच के दिल को तस्सली दी खुद ही “कौन से रिश्ते दार थे जो अधिक पूछते 🙂 पर वही अपने में मस्त रहने वाली आदत इस बार भी दिखी …एक वहां के मित्र से वापस आने पर कहा कि आपका शहर पसंद नहीं आया ..तो जवाब मिला .” हाँ लगता है कि आपको साफ़ बात बोलने वाले लोग पसंद नहीं अधिक “:) मैंने कहा साफ़ बोलने वाले लोग तो पसंद है पर उन लोगों में शहर को साफ़ रखने की भी तो आदत होनी चाहिए ..:)

मुंबई के दर्शनीय स्थल की सूची

मुंबई के दर्शनीय स्थल की सूची

मुंबई – एक ऐसा शहर, जो कभी नहीं सोता. यहाँ सभी अपनी जिंदगी की गाड़ी पर दौड़ रहे हैं और साथ में दौड़ता हैं ये शहर भी. सपनों की नगरी कहे जाने वाले मुम्बई शहर में जब लोग इस आपा – धापी से भरी जिंदगी से थक जाते हैं, कुछ देर ठहर कर, रूककर आराम करना चाहते हैं, दिन भर की चिलचिलाती धूप से बचकर सुनहरी शाम का मज़ा लेना चाहते हैं, तो वे कहाँ जाएँ? इस एहसास को जीने के लिए, कहाँ बिताएं सुकून के दो पल?? तब याद आती हैं मुंबई की ऐसी कुछ जगहें, जहाँ वे शांति से बैठे, कोई सुकून भरा लम्हा गुजारें.

आज हम मुंबई की कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में जानकारी साझा करेंगे, जहाँ मुम्बईवासी और अन्य स्थानों के लोग भी घूमने जाते हैं और कई सुनहरी यादों को संजोते हैं.

मुंबई के दर्शनीय स्थल की सूची

मुंबई के दर्शनीय स्थल की सूची

मुंबई दर्शन आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मदद से भी कर सकते है. मुंबई में मुंबई दर्शन के लिए विशेष बस, टैक्सी चलती है, जो मुंबई के मुख्य स्थल को कवर करती है. मेरे हिसाब से मुंबई दर्शन के लिए इसकी बस सबसे अच्छी है. 7-8 घंटे में ये बस आपको मुंबई के बहुत से प्लेस दिखा देगी. साथ ही ये काफी किफायती होती है, 500-600 रुपय मे बड़ों को और 300-400 रुपय में बच्चों को ये मिल जाती है. ये बस मुंबई के अलग स्थान से मिल जाया करती है, लेकिन मुंबई के बीचों बीच के गेटवे ऑफ़ इंडिया में उपलब्ध होती है, जिसे बुक कर आप मुंबई दर्शन कर सकते है. मुंबई दर्शन के लिए टैक्सी भी होती है, लेकिन उनका खर्चा अधिक होता है.

गेट वे ऑफ़ इंडिया

गेट वे ऑफ़ इंडिया

गेट वे ऑफ़ इंडिया

गेट वे ऑफ़ इंडिया : भारत में पश्चिमी तट से आने वालों के लिए सबसे बड़ा गेट था खासकर ब्रिटिश शासन के लिए | गेटवे ऑफ इंडिया समुद्र तट पर है | इसलिए वहां लोग बोटिंग करने और अलग-अलग तरह के जहाजों को देखने के लिए आते हैं | इसे हमारे देश भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता हैं. यह शहर की एक अलग ही पहचान कराता हैं. इसका निर्माण सन 1924 में ब्रिटिश राज में किया गया था. इसके निर्माण का उद्देश्य ब्रिटिश महाराज जॉर्ज वी और महारानी मेरी के भारत आगमन पर उनका स्वागत करने का था. चूँकि मुंबई देश के प्रमुख बंदरगाहों में से एक हैं, इसीलिए इसे प्रवेश द्वार मानते हुए, इसे गेट वे ऑफ़ इंडिया नाम दिया गया. यह ब्रिटिशों के महाराज के आगमन पर उनके उत्कर्ष का प्रतिक था. गेट वे ऑफ़ इंडिया अपोलो बन्दर के जल क्षेत्र के सामने बनाया गया हैं और आज पूरे विश्व के लोगों के लिए सबसे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों में से एक हैं.

गेट वे ऑफ़ इंडिया के पास ही होटल ताज है, जो एक दर्शनीय स्थल से कम नहीं है. गेट वे ऑफ़ इंडिया से होटल ताज का व्यू देखने लायक होता है. इसे भी लोग देखने दूर दूर से जाते है. होटल ताज का निर्माण 1902 में जमशेद टाटा से कराया था. 2008 में आतंकवादीयों द्वारा 26/11 का हमला भी यही हुआ था.

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस को विक्टोरिया टर्मिनस भी कहा जाता है | यहाँ रेलवे स्टेशन टर्मिनल है | जहां मध्य रेलवे की मुंबई में, व मुंबई उपनगरीय रेलवे की मुंबई में समाप्त होने वाली रेलगाड़ियां रुकती व यात्रा पूर्ण करती हैं।  इस स्टेशन की इमारत ‘विक्टोरियन गोथिक शैली’ में बनी है। इस इमारत में विक्टोरियाई इतालवी गोथिक शैली एवं परंपरागत भारतीय स्थापत्य कला का संगम झलकता है।छत्रपति शिवाजी टर्मिनस गेटवे ऑफ इंडिया से 3 किलोमीटर दूरी पर है |

हाजी अली की दरगाह

हाजी अली की दरगाह

हाजी अली की दरगाह

हाजी अली की दरगाह : यह मुंबई के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक हैं. हाजी अली दरगाह मुंबई शहर के वरली समुद्र तट के निकट है | यहां मुस्लिम समुदाय और हिंदू धर्म के लिए धार्मिक समुदाय रखती है | हाजी अली दरगाह एक छोटे टापू पर स्थित है यहा सेतु के द्वारा जाया जाता है और सिटी के निकट समुद्र है इसलिए लोगों को यहां अच्छा लगता है | दरगाह के पीछे चट्टानों का एक समूह है। जब समुद्र की लहरें इन चट्टानों से टकराती हैं तो एक कर्णप्रिय ध्वनि उत्पन्न करती हैं। यह सब कुछ एक अत्यंत रोचक नज़ारा देखने लायक है |  जुहू चोपाटी एक समुद्र तट पर है इसलिए यहां देसी विदेसी लोग मौज मस्ती के लिए आते हैं | समुद्र तट पर होने के कारण ठंडा हवामान रहता है इसलिए ज्यादातर लोग गर्मियों के मौसम में यहां घूमने के लिए आते हैं एवं सबसे अच्छी जगह घूमने के लिए है |

यह अरब सागर के बीच में स्थित हैं और किनारे से 500 यार्ड्स की दूरी पर स्थित हैं. यह मुस्लिम संत पीर हाजी अली शाह बुखारी की दरगाह हैं. यह लगभग 400 साल पुरानी दरगाह हैं, जो हिन्दू – मुस्लिम कलाकारी का उत्कृष्ट उदाहरण हैं. इस दरगाह की मुख्य बात यह है कि समुद्र के बीचों बीच होने के बावजूद यह कभी नहीं डूबती है. कहते है, बाबा के दरबार तक कभी भी पानी नहीं घुसा है.

इसके अलावा इस बड़ी सी दरगाह के बाहर स्वादिष्ट पकवानों के अनेक लोकल स्टॉल लगे होते हैं. साथ ही हाजी अली मुंबई की पश्चिम लोकल रेलवे – लाइन का प्रमुख स्टॉप हैं, जिससे लोगों को यहाँ तक पहुँचने में आसानी होती हैं.

जुहू बीच

जुहू बीच

जुहू बीच

जुहू बीच – जुहू चौपाटी मुंबई का एक आकर्षित पर्यटन स्थल है और वह समुद्र तट पर है | जुहू चौपाटी फिल्म इंडस्ट्री के लिए काफी अच्छी जगह है | यहां लोग फिल्म बनाने के लिए आते हैं | हिंदी फिल्म एवं कई बार सारी फिल्में मिस चौपाटी पर शूटिंग होती है | इसलिए ज्यादातर लोग यहां देखने के लिए आते हैं जुहू चौपाटी पर्यटन के लिए मुंबई की सबसे अच्छी जगह है |

भारत में सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा देखी जाने वाली बीचों में से एक हैं – जुहू बीच. साथ ही यहाँ पर कई प्रसिद्ध हस्तियों और फ़िल्मी दुनिया के चमकते हुए सितारों के घर भी हैं, इसलिए भी यह बहुत प्रसिद्ध हैं और लोग इन्हें देखने भी यहाँ जाते हैं. इस बीच पर मिलने वाले पकवानों के लिए भी कई लोग यहाँ दूर – दूर से आते हैं. यहाँ की पाव भाजी, भेल, पानीपूरी जग प्रसिध्य है. यहाँ बीच पर रेत पर घूमते हुए लोग घुड़सवारी का मजा लेते हैं, बंदरों की उछल – कूद देखते हैं, बच्चे खिलौनों और गुब्बारों को खरीदकर उनसे खेलने में खुश होते हैं और भी कई मनोरंजन के साधनों से लोग यहाँ अच्छा समय व्यतीत करते हैं.

गिरगांव चौपाटी

गिरगांव चौपाटी समुद्र तट पर है | यहां लोग घूमने के लिए और मौज मस्ती के लिए आते हैं |  गिरगांव चौपाटी में गर्मियों के मौसम में ज्यादातर लोग आते हैं क्योंकि समुद्रतट होने के कारण गर्मियों के मौसम यहां ठंडा रहता है इसलिए ज्यादातर लोग यहां घूमने के लिए आते हैं

गिरगांव चौपाटी

गिरगांव चौपाटी

 

मरीन ड्राइव

मरीन ड्राइव – मरीन ड्राइव मुंबई का सबसे सुंदर स्थान में से एक है. इसकी सुन्दरता रात को तो देखते ही बनती है, गोलाई में बने मरीन ड्राइव की सड़कों में रात में जब स्ट्रीट लाइट जलती है, तो ऐसा लगता है मानों किसी रानी ने गले का हार पहना है. इसलिए इसे क्वीन नेकलेस भी कहते है. मरीन ड्राइव दक्षिणी मुंबई के 4 कि. मी. के क्षेत्र में फैला हुआ हैं. यह मुंबई की सबसे सुन्दर सड़कों में से एक हैं. यह रात को चमकती हुई रोशनी में बहुत ही मनमोहक लगता हैं. शाम के समय यह बहुत ही सुन्दर लगता हैं और इसी समय इसे देखने का आनंद आता हैं. चाय वाले और चाट वाले इस जगह को सुन्दर के साथ – साथ स्वाद – दार भी बना देते हैं. इसे लवर्स पॉइंट भी कहा जाता है. यहाँ के पत्थरों की आकृति देखते ही बनती है, जो मानव निर्मित है.

चौपाटी बीच

चौपाटी बीच – मरीन ड्राइव के पास ही चौपाटी बीच भी हैं, जिसे गिरगांव चौपाटी के नाम से जाना जाता है. जहाँ खानपान के शौक़ीन लोगों को बहुत ही आनंद आ जाता हैं. हाथ – गाड़ी पर विभिन्न स्वाद – दार चीजें बेचने वाले होते हैं, खिलौने बेचने वाले होते हैं और विभिन्न मनोरंजन के साधन होते हैं. यहाँ की भेलपुरी और पानी – पूरी बहुत प्रसिद्ध हैं. यहाँ बग्गी का भी आनंद लिया जाता है.
एलिफेंटा केव [घारापुरीची लेणी] – मध्य मुंबई बंदरगाह में गेट वे ऑफ़ इंडिया से 9 कि. मी. की दूरी पर एक बहुत ही प्रसिद्ध स्थल हैं, जिसका नाम हैं – एलिफेंटा केव. ये पहाड़ों को काटकर बनाया गया मंदिर हैं. ये भारत के सबसे पेचीदा और खुबसूरत नक्काशी को पेश करने वाले मंदिरों में से एक हैं.

एलिफेंटा केव / एलिफंटा गुफाये

एलिफेंटा केव / एलिफंटा गुफाये

एलिफेंटा केव / एलिफंटा गुफाये

एलिफेंटा केव में स्थित भगवान शिव का मंदिर बहुत प्रसिद्ध हैं. एलीफेंटा की गुफाएं विश्व की प्रसिद्ध गुफाओं में से एक है | यह गुफाएं मुंबई से 10 किलोमीटर दूर एलीफेंटा द्वीप पर है यहां अंदर-अंदर गुफाएं है और मैं गुफा में 24 स्तम्भ है और वहां भगवान शिव जी की अलग अलग तरह की मूर्ति अभी है |  हिन्दू इतिहास के मान्यताओं के अनुसार पाण्डव और भगवान शिव के दानव भक्त बाणासुर इन गुफाओ में रह चुके है | स्थानिक परम्पराओ और जानकारों के अनुसार ये गुफाये मानव निर्मित नही है |  एलीफेंटा की गुफाएं पर्यटन के लिए आकर्षित जगह है और बहुत सुंदर भी है   इसमें हॉल, आँगन, खम्बे आदि का सुन्दर निर्माण देखने को मिलता हैं, यहाँ त्रिमुखी शिवजी की प्रतिमा हैं, जो भगवान शिव को संसार का रचयिता, पालनकर्ता और संहारक के रूप में प्रस्तुत करती हैं. यह स्थान मुंबई के अभूतपूर्व सुन्दर और शांत स्थानों में से एक हैं.

एलिफेंटा केव / एलिफंटा गुफाये

एलिफेंटा केव / एलिफंटा गुफाये

सिद्धिविनायक मंदिर

सिद्धिविनायक मंदिर – सिद्घिविनायक गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है। गणेश जी जिन प्रतिमाओं की सूड़ दाईं तरह मुड़ी होती है वे सिद्घपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्घिविनायक मंदिर कहलाते हैं। सिद्धिविनायक मंदिर गणेश जी का मंदिर है | यहां लोग ज्यादातर जाते हैं क्योंकि यह धार्मिक स्थलों में से एक है |हिन्दू धार्मिक दर्शनीय स्थल है |

मुंबई में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर हिन्दुओं के इष्ट, प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेशजी का प्रसिद्ध मंदिर हैं. यहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं. इसमें बहुत ही सुन्दर निर्माण – कार्य किया गया है. इसका निर्माण सन 1801 में किया गया था.

कहा जाता हैं कि यहाँ मांगी हुई मन्नत हमेशा पूरी होती हैं, इसके आकर्षण का यह मुख्य कारण हैं. कई बड़ी हस्तियाँ भी यहाँ आकर अपने कार्य में सफलता का आशीर्वाद मांगती हैं.

महालक्ष्मी मंदिर

महालक्ष्मी मंदिर

महालक्ष्मी मंदिर प्राचीन मंदिरों में से एक मंदिर है और यह हिंदू धर्म के लोगो के लिए सबसे धार्मिक और दर्शनीय स्थल है समुद्र के किनारे देसाई मार्ग के नजदीक है |  मान्यता के अनुसार मंदिर के पीछे की दीवार पर लोग मनौति के सिक्के चिपकाते हैं। यहां हजारों सिक्के अपने आप चिपक जाते हैं। मंदिर के पीछे की तरफ कुछ सीढ़ियां उतरने के बाद समुद्र का सुंदर नजारा देखा जा सकता है।

हिन्दू धर्मग्रंथों और पुराणों में धन और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी या लक्ष्मी को माना गया है। महालक्ष्मी की पूजा और आराधना के लिए यूं तो पूरे देश में अनेक मंदिर हैं, लेकिन ये हैं भारत के 6 विख्यात महालक्ष्मी मंदिर जहां धन और समृद्धि की मन्नतें लिए पूरी दुनिया से श्रद्धालु आते हैं: 

महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर

कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर न केवल महाराष्ट बल्कि देश का सबसे प्रसिद्ध लक्ष्मी मंदिर माना जाता है। इतिहास में दर्ज तथ्यों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण सातवीं सदी चालुक्य वंश के शासक कर्णदेव ने करवाया था। प्रचलित जनश्रुति के अनुसार यहां की लक्ष्मी प्रतिमा लगभग 7,000 साल पुरानी है।  इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां सूर्य भगवान अपनी किरणों से स्वयं देवी लक्ष्मी का पद-अभिषेक करते हैं। जनवरी और फरवरी के महीने में सूर्य की किरणें देवी की पैरों का वंदन करती हुई मध्य भाग से गुजरते हुए फिर देवी का मुखमंडल को रोशनी करती हैं, जो कि एक अतभुत दृश्य प्रस्तुत करता है।

धोबी घाट

धोबी घाट : यहां पूरे मुंबई शहर के कपड़े धुलते हैं। महालक्ष्मी स्थित नगर निगम के इस घाट में लगभग 5,000 व्यक्ति शहर भर से लाए गए कपड़ों की धुलाई करते हैं। कपड़े धोने के लिए खुले स्थान पर हौदियां बनी हैं। आप महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन के पुल से यहां का शानदार नजारा ले सकते हैं।

क्राफोर्ड मार्केट

क्राफोर्ड मार्केट

क्राफोर्ड मार्केट : यह फूलों, फलों, सब्जियों, मांस और मछली की होलसेल मार्केट है। इस नॉर्मन-गॉथिक भवन पर रुडयार्ड किपलिंग के पिता लॉकवुड किपलिंग द्वारा आकृतियां उकेरी गई हैं। मार्केट के दक्षिण में जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट है। यहीं पर रुडयार्ड किपलिंग का जन्म हुआ था, उसका जन्म-स्थान अब डीन के आवास के रूप में उपयोग होता है।

ताज महल होटल

ताज महल होटल : शहर की सबसे बड़ी पहचान और भारत के सर्वश्रेष्ठ होटलों में से एक। 1903 में जे.एन.टाटा द्वारा निर्मित इस होटल के नए और पुराने दो विंग हैं। नए विंग की अपेक्षाकृत पुराना विंग अधिक महंगा और भव्य है। पुराने विंग में ग्रांड सेंट्रल स्टेयरकेस देखने लायक है।

फ्लोरा फाउंटेन

फ्लोरा फाउंटेन : इस फाउंटेन का नाम रोम में समृद्धि के देवता के नाम पर पड़ा, इसका निर्माण 1869 में सर बार्टले फरेरे के सम्मान में किया गया, जिन्होंने आज दिखने वाले मुंबई के निर्माण में बहुत सहयोग दिया था। अब यह फाउंटेन उस क्षेत्र में है, जहां महाराष्ट्र राज्य के लिए शहीद होने वालों की याद में स्मारक बनाया गया है।

mumbai high school

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मुंबई विश्वविद्यालय एवं उच्च न्यायालय

मुंबई विश्वविद्यालय एवं उच्च न्यायालय : 1860 से 70 के दौरान जब भवनों का निर्माण तेजी से किया जा रहा था, उस समय, विशेषकर ओवल मैदान के किनारे, अधिकांश विक्टोरियन भवनों का निर्माण हुआ। उन दिनों मैदान समुद्र के नजदीक हुआ करता था और मुंबई विश्वविद्यालय, पश्चिम रेलवे मुख्यालय का भवन तथा उच्च न्यायालय सीधे अरब सागर के सामने थे। इनमें मुंबई विश्वविद्यालय भवन सबसे शानदार है। गिलबर्ट स्कॉट ने इसका डिजाइन तैयार किया था, यह 15वीं शताब्दी का इटेलियन भवन जैसा दिखता है। इसका भवन, इसका विशाल पुस्तकालय, कन्वोकेशन हॉल और 80 मी. ऊंचा राजाबाई टावर बहुत सुंदर है।

हॉर्निमन सर्किल

हॉर्निमन सर्किल : 1860 में फोर्ट एरिया में राज्य सरकारी भवनों का निर्माण किया गया था। इसके समीप ही क्लासिक टाउन हाल (मुंबई का गौरव) है।

मरीन ड्राइव

मरीन ड्राइव : 1920 में निर्मित, मरीन ड्राइव अरब सागर के किनारे-किनारे, नरीमन प्वाइंट पर सोसाइटी लाइब्रेरी और मुंबई राज्य सेंट्रल लाइब्रेरी से लेकर चौपाटी से होते हुए मालाबार हिल तक के क्षेत्र में है। मरीन ड्राइव के शानदार घुमाव पर लगी स्ट्रीट-लाइटें रात्रि के समय इस प्रकार जगमाती हैं कि इसे क्वीन्स नैकलेस का नाम दिया गया है। रात्रि के समय ऊंचे भवनों से देखने पर मरीन ड्राइव बहुत बेहतरीन दिखाई देता है।

mahabar hill

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मालाबार हिल

मालाबार हिल : यह मुंबई का सभ्रांत आवासीय क्षेत्र है। मालाबार हिल में हैंगिंग गार्डन है, जहां सायंकाल में अच्छी भीड़ रहती है। यहां झाड़ियों को काटकर जानवरों की शक्ल दी गई है, जो इस गार्डन की विशेषता बन गए हैं। यहां फूलों से बनी एक घड़ी भी है। यहां से आप शहर का अच्छा नजारा ले सकते हैं।

मणि भवन

मणि भवन : अपनी मुंबई यात्रा के दौरान महात्मा गांधी इस भवन में ठहरे थे। उनके कमरों को उसी रूप में रखा गया है और यहां उनके जीवन से संबंधित चित्रों को प्रदर्शित किया गया है। यह भवन रोजाना प्रात: 9.30 बजे से सायं 6.00 बजे तक खुला रहता है तथा यहां प्रवेश निशुल्क है।

aexal world in mimbai

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एस्सल वर्ल्ड

एस्सल वर्ल्ड : एस्सेल वर्ल्ड एक पार्क है और वोटर पार्क भी है मुम्बई का सबसे पहला मनोरंजन पार्क है |  यह पार्क डिज्नीलैंड जैसा ही है | यह पार्क बच्चों के लिए काफी आकर्षक ओर घूमने की जगह है | यहां अलग अलग तरह की राइट्स और वोटर पार्क भी है | यहां लोग देश विदेश से घूमने के लिए आते हैं | एस्सेल वर्ल्ड बहुत ही सुंदर और देखने लायक पार्क है |

90 के दशक से एस्सल वर्ल्ड मुंबई के साथ – साथ पूरे देश में ख्याति प्राप्त थीम पार्क हैं. यह मनोरंजन का बहुत अच्छा माध्यम हैं. इस अम्यूजमेंट पार्क की रोमांचक राइड्स यहाँ का आकर्षण – केंद्र होती हैं. इस पार्क की विशेषता यह हैं कि यहाँ किसी भी आयु – वर्ग का व्यक्ति जा सकता हैं और आनंद ले सकता हैं. यह साल के 365 दिन खुला रहता हैं और यही कारण हैं कि यह प्रतिदिन लगभग 10,000 लोगों का मनोरंजन करता हैं.

संजय गाँधी नेशनल पार्क

संजय गाँधी नेशनल पार्क : इसे पहले बोरीवली नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता था. यह मुंबई की उत्तर दिशा की ओर उपनगरीय क्षेत्र में स्थित हैं, जहाँ बड़े स्तर पर वन्य जीवन का संरक्षण किया जाता हैं. यह देश में स्थित अन्य राष्ट्रीय उद्यानों की तरह बहुत बड़ा तो नहीं हैं, परन्तु यहाँ जो वन्य प्राणियों और वन्य जीवन संरक्षण का काम किया जा रहा हैं, वह काबिल – ए – तारीफ हैं और यही इसकी ओर आकर्षण का कारण हैं. शहर की भाग – दौड़ भरी जिंदगी से दूर यहाँ प्रकृति के बीच समय गुजरने के लिए यह उत्तम स्थान हैं.

नेहरू म्यूजियम

नेहरू संगृहालय जवाहरलाल नेहरू के याद में स्थापित यह संग्रहालय है और पुस्तकालय भी है | इसमें जवाहरलाल नेहरु की यादें और उनके बारे में है मुंबई के बारे में ऐतिहासिक पुस्तके भी संग्राहलय में है |  इसका लक्ष्य भारत के स्वतंत्रता संग्राम संजोना तथा उसका पुनर्निर्माण अकरना है। यह तीन मूर्ति भवन के प्रांगण में स्थित है। इसकी स्थापना जवाहरलाल नेहरू के देहान्त के उपरान्त की गयी थी। यह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अन्तर्गत एक स्वतंत्रता संस्था है।

बाबुलनाथ मंदिर

बाबुलनाथ मंदिर भगवान शिव का बहुत प्राचीन मंदिर है | यह मंदिर गिरगांव चौपाटी के नजदीक एक पहाड़ी पर स्थित है और वहां एक बबूल का पेड़ है और उसके नीचे भगवान शिव जी का मंदिर है इसलिए भवन नाथ मंदिर कहा जाता है मुंबई के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक मंदिर है यह मंदिर धार्मिक दर्शनीय स्थल है |

कन्हेरी गुफाये

कन्हेरी गुफाएं प्राचीन गुफाएं हैं दुनिया की सबसे अच्छी गुफाओं में से एक गुफा यह कानेरी गुफा | भगवान बौध का मंदिर भी है कन्हेरी गुफाएं के अंदर अलग-अलग गुफाएं हैं और पर्यटन के लिए सबसे आकर्षित जगह है जहां लोग देश विदेश से देखने के लिए आते हैं |

मुंबा देवीमंदिर

मुंबा देवी मुंबई के भुलेश्वर में स्थित मंदिर है मुंबा देवी नाम मराठी भाषा से निकल आया है | माना जाता है कि कोली लोगों ने मोमा देवी की स्थापना की थी और इन देवी की कृपा से समुद्र लोगों को नुकसान पहुंचाना नहीं था | यह मंदिर धार्मिक पर्यटन स्थल देखने लायक है |
मुंबई तक कैसे जाएं:

माउन्ट मेरी चर्च :

माउन्ट मेरी चर्च :

माउन्ट मेरी चर्च :

माउन्ट मेरी चर्च : यह माउन्ट मेरी का महामंदिर [Basilica] हैं. यह एक रोमन केथोलिक चर्च हैं, जो कि मुंबई के बांद्रा नामक स्थान पर स्थित हैं. कहा जाता हैं कि इसका निर्माण सन 1760 में किया गया था. यहाँ कुमारी मेरी का जन्मोत्सव प्रति वर्ष 8 सितम्बर के पश्चात् 1 सप्ताह तक मनाया जाता हैं. इसे आम लोग ‘बांद्रा फेयर’ के नाम सेजानते हैं और यहाँ आकार इसका आनंद उठाते हैं.

छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय

छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय : यह संग्रहालय मुंबई के एम्. जी. रोड पर स्थित हैं, जो की मरीन ड्राइव व होटल ताज से वाल्किंग डिस्टेंस पर है. इसकी स्थापना 10 जनवरी, 1922 को हुई थी. इसका भवन मुग़लों, मराठों और जैनों के भवनों की निर्माण शैली का मिला – जुला रूप हैं, जिसके चारों ओर एक बगीचा हैं, जो खजूर के वृक्षों और फूलों से आच्छादित हैं. इस संग्रहालय में 3 फ्लोर है, जो भारत देश की पुरानी संस्कृति के बारे में लोगों को बताते है. यहाँ अंदर ऑडियो गाइड भी मिलता है, जिसे आप 40 रुपय में लेकर संग्रहालय के अंदर रखी वस्तुओं के बारे में विस्तार से सुन सकते है.

काला घोड़ा कला भवन :

काला घोड़ा कला भवन : यह मुंबई की सांस्कृतिक कलाओं का केंद्र हैं. यह किले और कोलाबा के बीच दक्षिणी मुंबई में स्थित हैं. यह मुंबई की सबसे अच्छी आर्ट गेलेरी और संग्रहालयों में से एक हैं. हर साल फरवरी में काला घोड़ा असोसिएशन 9 दिन का ‘काला घोड़ा कला महोत्सव’ का आयोजन करती हैं, जो बहुत ही आकर्षक होता हैं और कला प्रेमी जनता इसे देखने जाती हैं.

मुंबई के बाजार

मुंबई के बाजार : हम सभी जानते हैं कि महिलाओं को शोपिंग का कितना शौक होता हैं, मुंबई स्ट्रीट शोपिंग के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं. यहाँ बहुत सी चीजे कम दाम और अच्छी गुणवत्ता के साथ मिल जाती हैं. इस उद्देश्य हेतु सबसे ज्यादा नाम कमाया हैं चोर बाज़ार ने. कोलाबा कोज़वे यादगार चीजों के लिए, लिंकिंग रोड सस्ते जूतों, कपड़ो और चोर बाज़ार एंटीक चीजों को खरीदने के लिए प्रसिद्ध हैं.
हेरिटेज बिल्डिंग्स : मुंबई में कई मन्त्र – मुग्ध और आश्चर्य – चकित कर देने वाली इमारतें हैं, जो अपनी जटिल और मन – मोहक निर्माण के लिए जानी जाती हैं. इनमे से कुछ उदाहरण के तौर पर हैं – प्रिंस ऑफ़ वेल्स म्यूज़ियम, विक्टोरिया टर्मिनस रेलवे स्टेशन [CST], बॉम्बे हाई कोर्ट, आदि. ये सभी लगभग दक्षिणी मुंबई में या इसके पास स्थित हैं.

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बोलीवुड

बोलीवुड: मुंबई हिंदुस्तान की फिल्म इंडस्ट्री ‘ बोलीवुड ’का केंद्र हैं. यहाँ फिल्म सिटी हैं, यह मुंबई के पश्चिमी उपनगरीय इलाके में गोरेगांव में स्थित हैं, जहाँ विभिन्न फिल्मो और सीरियलों की शूटिंग चलती रहती हैं. आप वहाँ जाकर शूटिंग देख सकते हैं और यहाँ लगाये गये फिल्मों के सेट देखने के लिए भी बहुत से लोग जाते हैं.

इस प्रकार अगर देखा जाएँ तो मुंबई में घुमने के लिए बहुत सी जगह हैं, जैसे -:

क्रमांक विविध स्थल स्थलों के नाम

1. प्रसिद्ध मंदिर श्री सिद्धिविनायक मंदिर, मुम्बादेवी मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, अफगान चर्च, बाबुलनाथ मंदिर, बाबु अमीचंद पनालाल अदिश्वर्जी जैन मंदिर, श्री वालकेश्वर मंदिर, इस्कोन मंदिर, ग्लोबल पेगोडा, आदि.

2. प्रसिद्ध अम्यूजमेंट पार्क स्नो वर्ल्ड, एस्सल वर्ल्ड, वाटर किंगडम, कमला नेहरु पार्क, इमेजिका थीम पार्क, आदि.

3. प्रसिद्ध बीच जुहू बीच, मड आईलेंड, अक्सा बीच, वर्सोवा बीच, गिर्गौम चौपाटी बीच, मार्वे बीच, दादर चौपाटी बीच, गोराई बीच, मनोरी बीच, आदि.

4. अन्य दर्शनीय स्थल हैंगिंग गार्डन, शिवाजी पार्क, फ़्लोरा फाउंटेन, RBI मोनेटरी म्यूज़ियम, जोगर्स पार्क, महाकाली केव्स, मालाबार हिल्स, नरीमन पॉइंट, पवाई लेक, प्रियदर्शिनी पार्क एंड स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स, धोबी घाट, महालक्ष्मी रेस कोर्स, मुंबई पोर्ट ट्रस्ट गार्डन, नेहरु साइंस सेंटर, जिजामाता उद्यान, आदि.

मुंबई के दर्शनीय स्थलों की सूची बहुत बड़ी हैं. साथ ही आप एक बार के टूर में मुंबई नहीं घूम पाते, कुछ न कुछ छुट ही जाता हैं. परन्तु इस माया – नगरी की बात ही निराली हैं, इसलिए कहा जाता हैं कि जो एक बार मुंबई जाता हैं, वो वहीँ का होकर रह जाता हैं.

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मुंबई कैसे जाये / मुंबई की यात्रा कैसे करे 

मुंबई हवाई अड्डा :  छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एरपोर्ट

मुंबई ट्रेन : छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेल्वे स्टेसन

मुंबई  रोड द्वारा :  अहमदाबाद से मुबई [8 h 23 min (524.2 km)],

उदयपुर से मुंबई [11 h 40 min (752.9 km)]

जयपुर से मुंबई [17 h 52 min (1,146.0 km)]

दिल्ली से मुंबई [22 h 47 min (1,415.5 km)]

गोवा से मुंबई [9 h 39 min (583.4 km)]

मुंबई तक कैसे पहुंचें

मुंबई भारत का सबसे प्रमुख वित्तीय केंद्र है और साथ ही बॉलीवुड उद्योग भारत की अर्थव्यवस्था के विकास के सबसे महत्वपूर्ण भागों में से एक है। दलाल स्ट्रीट, मरीन ड्राइव, वरली, बांद्रा, दादर और अंधेरी शहर में हलचल वाले क्षेत्रों के रूप में कार्य करते हैं। इसके बावजूद मुंबई भारत के सबसे अधिक आबादी वाला शहर है और साथ ही यह सबसे बड़ा शहर भी है और इसलिए यह भारत के अन्य सभी बड़े शहरों के साथ-साथ विश्व के साथ जुड़ा हुआ है। अरब सागर की ओर अग्रसर, शहर में जलमार्ग का एक अच्छा बुनना भी है जो भारत के वाणिज्यिक विकास को तैयार करने में एक महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में चिह्नित करता है। इसलिए जो मुंबई से कैसे पहुंचे, इसके बारे में पूछताछ करने वाले व्यक्ति को केवल चिंता ही करना चाहिए कि मॉनसून के दौरान बाढ़ की सड़कों से कैसे बचें। आप जूनियर से सितंबर के बीच यात्रा कर रहे एक कॉर्पोरेट यात्री होने के नाते, उपद्रव का मामला है। वैसे भी मुंबई अच्छी तरह से भारत के सभी प्रमुख शहरों के लिए सड़क के मार्ग, रेलवे और वायुमार्ग से जुड़ा हुआ है और साथ ही अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा दुनिया के सभी प्रमुख शहरों को शहर से जोड़ता है।

पास के एक शहर से यात्री एक तरफ पश्चिमी घाट के रंगों और दूसरी तरफ अरब सागर के क्रिस्टल तरंगों के रास्ते मुंबई में जा सकता है। नासिक से सड़कों पर मुंबई पहुंचने की योजना लगभग 170 किलोमीटर है, जो नासिक मुम्बई एक्सप्रेसवे को ले सकती है जो पूर्वी एक्सप्रेसवे से जुड़ती है या नासिक को मुंबई बस में ले जा सकती है, जो लगभग 2 घंटे 20 मिनट लगते हैं। पुणे से मुंबई तक की दूरी लगभग 150 किलोमीटर है और पुणे से मुंबई की बस 2 बजे 30 मिनट और औरंगाबाद लगभग 340 कि.मी. है। सायन-पनवेल एक्सप्रेस राजमार्ग और पूर्वी एक्सप्रेस राजमार्ग मुंबई से महाराष्ट्र के सभी प्रमुख शहरों को जोड़ता है। जबकि एक गोवा से मुंबई तक ड्राइव की योजना बना रही है, जो कि लगभग 580 किमी दूर है, को राष्ट्रीय राजमार्ग 66 का पालन करना होगा जो राज्य राजमार्ग 21 से जुड़ा है, उसके बाद सायन-पनवेल एक्सप्रेसवे। फिर भी अहमदाबाद से मुम्बई तक मार्ग पर जाने के लिए सूरत में लगभग 8 घंटे लगेंगे।

रेलवे मुंबई शहर की जीवन रेखा है और इसीलिए शहर भारत के अन्य प्रमुख शहरों से बहुत अच्छे नेटवर्क के माध्यम से जुड़ा हुआ है। मुंबई में छत्रपति शिवाजी टर्मिनल और मुंबई सेंट्रल दो प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं जबकि दादर रेलवे स्टेशन और कल्याणी रेलवे स्टेशन एक विकल्प के रूप में कार्य करते हैं। इस प्रकार ट्रेन से मुंबई तक पहुंचने की योजना बना या तो इनमें से किसी भी स्टेशन का चयन कर सकते हैं। कल्याणी रेलवे स्टेशन जो उपनगरों में स्थित है, अच्छी तरह से सड़क और टैक्सी और बसों से जुड़ा मुंबई शहर के लिए प्लाई।

छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे देश में सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है। यह शहर को दुनिया के सभी प्रमुख शहरों में जोड़ता है। घरेलू हवाई अड्डे में भारत के अन्य सभी शहरों के लिए लगातार उड़ानें हैं। इस प्रकार मुंबई से उड़ान भरने की योजना बना रही है, जो केवल टिकट बुकिंग करने की चिंता करना चाहिए। नई दिल्ली से मुम्बई की उड़ान अक्सर जाम पैक की जाती है और इसलिए पहले से ही अपने टिकट को अच्छी तरह से बुक करने की आवश्यकता है।

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