उत्तराखंड पर्यटन के बारे में पूरी जानकारी

उत्तराखंड के दर्शनीय स्थल

उत्तराखंड इतिहास के बारे में

जस हम लोग उत्तराखण्ड  के बारे में जानते है की इस का पूर्व नाम उत्तरांचल था |  जिसका निर्माण ९ नवम्बर २००० को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात इस राज्य का निर्माण हुआ यह भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप जो उत्तर भारत में स्थित है | इस राज्य नाम सन २००० से २००६ तक यह उत्तराञ्चल के नाम से जाना जाता था। जनवरी २००७ में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया | राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं। पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं। सन २००० में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग था। पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है। हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं।

देहरादून, उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी होने के साथ इस राज्य का सबसे बड़ा नगर है। गैरसैण नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थाई राजधानी बना हुआ है। राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है।

राज्य सरकार ने हाल ही में हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कुछ पहल की हैं। साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए आकर्षक कर योजनायें प्रस्तुत की हैं। राज्य में कुछ विवादास्पद किन्तु वृहत बाँध परियोजनाएँ भी हैं जिनकी पूरे देश में कई बार आलोचनाएँ भी की जाती रही हैं, जिनमें विशेष है भागीरथी-भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बाँध परियोजना। इस परियोजना की कल्पना १९५३ मे की गई थी और यह अन्ततः २००७ में बनकर तैयार हुआ। उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है

उत्तराखंड की भूगोलिक स्थिति

उत्तराखंड की भूगोलिक स्थिति

उत्तराखंड हिमालय के किनारे पर स्थित है। इसकी सीमा चीन (तिब्बत) और नेपाल से लगती है। इस उत्तरी राज्य के उत्तर-पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण दिशा में उत्तर प्रदेश है। उत्तराखण्ड का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल २८° ४३’ उ. से ३१°२७’ उ. और रेखांश ७७°३४’ पू से ८१°०२’ पू के बीच में ५३,४८३ वर्ग किमी है, जिसमें से ४३,०३५ कि.मी.२ पर्वतीय है और ७,४४८ कि.मी.२ मैदानी है, तथा ३४,६५१ कि.मी.२ भूभाग वनाच्छादित है। राज्य का अधिकांश उत्तरी भाग वृहद्तर हिमालय श्रृंखला का भाग है, जो ऊँची हिमालयी चोटियों और हिमनदियों से ढका हुआ है, जबकि निम्न तलहटियाँ सघन वनों से ढकी हुई हैं जिनका पहले अंग्रेज़ लकड़ी व्यापारियों और स्वतन्त्रता के बाद वन अनुबन्धकों द्वारा दोहन किया गया। हाल ही के वनीकरण के प्रयासों के कारण स्थिति प्रत्यावर्तन करने में सफलता मिली है। हिमालय के विशिष्ठ पारिस्थितिक तन्त्र बड़ी संख्या में पशुओं (जैसे भड़ल, हिम तेंदुआ, तेंदुआ और बाघ), पौंधो और दुर्लभ जड़ी-बूटियों का घर है। भारत की दो सबसे महत्वपूर्ण नदियाँ गंगा और यमुना इसी राज्य में जन्म लेतीं हैं और मैदानी क्षेत्रों तक पहुँचते-२ मार्ग में बहुत से तालाबों, झीलों, हिमनदियों की पिघली बर्फ से जल ग्रहण करती हैं।  फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।

उत्तराखण्ड, हिमालय श्रृंखला की दक्षिणी ढलान पर स्थित है और यहाँ मौसम और वनस्पति में ऊँचाई के साथ-२ बहुत परिवर्तन होता है, जहाँ सबसे ऊँचाई पर हिमनद से लेकर निचले स्थानों पर उपोष्णकटिबंधीय वन हैं। सबसे ऊँचे उठे स्थल हिम और पत्थरों से ढके हुए हैं। उनसे नीचे, ५,००० से ३,००० मीटर तक घासभूमि और झाड़ीभूमि है। समशीतोष्ण शंकुधारी वन, पश्चिम हिमालयी उपअल्पाइन शंकुधर वन, वृक्षरेखा से कुछ नीचे उगते हैं। ३,००० से २,६०० मीटर की ऊँचाई पर समशीतोष्ण पश्चिम हिमालयी चौड़ी पत्तियों वाले वन हैं जो २,६०० से १,५०० मीटर की उँचाई पर हैं। १,५०० मीटर से नीचे हिमालयी उपोष्णकटिबंधीय पाइन वन हैं। उचले गंगा के मैदानों में नम पतझड़ी वन हैं और सुखाने वाले तराई-दुआर सवाना और घासभूमि उत्तर प्रदेश से लगती हुई निचली भूमि को ढके हुए है। इसे स्थानीय क्षेत्रों में भाभर के नाम से जाना जाता है। निचली भूमि के अधिकांश भाग को खेती के लिए साफ़ कर दिया गया है।

भारत के निम्नलिखित राष्ट्रीय उद्यान इस राज्य में हैं, जैसे जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान) रामनगर, नैनीताल जिले में, फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान और नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान, चमोली जिले में हैं और दोनो मिलकर यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं, राजाजी राष्ट्रीय अभयारण्य हरिद्वार जिले में और गोविंद पशु विहार और गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान उत्तरकाशी जिले में हैं। अगर आप  उत्तराखंड  टूर पैकेजेस  बुक करना चाहते है तो आप स्वान टूर से संपर्क करे और अपनी  उत्तराखंड की यात्रा उचित देर पे प्राप्त करे अधिक जानकर के लिए यहाँ क्लिक करे  Uttarakhand Tour Packages

उत्तराखंड की जलवायु

उत्तराखंड की जलवायु

उत्तराखंड राज्य तीन प्रमुख मौसमों का अनुभव करता है जिनमें गर्मी, मॉनसून और सर्दी शामिल हैं। यहाँ की जलवायु बहुत हद तक यहाँ की भौगोलिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है। यहाँ जहाँ एक तरफ विशाल पहाड़ियां हैं  वहीँ दूसरी तरफ छोटे प्लेन भी है । उत्तराखंड की यात्रा का सबसे अच्छा समय गर्मियों का मौसम है इस समय यहाँ का मौसम बहुत ही अच्छा रहता है। उत्तराखंड आने वाले पर्यटक अपनी यात्रा को सर्दियों में भी प्लान कर सकते हैं। हालांकि भीषण बर्फ़बारी के चलते कुछ स्थानों पर आने वाले पर्यटक नहीं जा सकते हैं फिर भी अगर आप चाहें तो इस मौसम में भी उत्तराखंड की यात्रा की जा सकती है।

उत्तराखंड की भाषाएँ

उत्तराखंड की भाषाएँ

उत्तराखंड की आधिकारिक भाषा हिन्दी है, लेकिन यह विभिन्न बोलियों में विविध क्षेत्रों में बोली जाती हैं। कुमाऊंनी और गढ़वाली यहाँ  ज़्यादातर बोली जाती है।  इसके अलावा, पहाड़ी बोली भी कुछ क्षेत्रों में लोकप्रिय है। ‘कुमाऊं’ व्यापक श्रेणी के तहत, लोकप्रिय उप बोलियाँ हैं – जोहरी, दानपुरिया, अस्कोटी, सिराली, गंगोला, खास्पर्जिया, फल्दाकोती, पच्चायी, रौचौभैसी, माझ कुमैया, सोरयाली, चौघरख्याली और कुमैया।  गढ़वाली बोली की उप श्रेणियों में जौनसारी, सैलानी और मर्ची शामिल हैं। यहाँ की प्रमुख बोलियां  संस्कृत, केंद्रीय पहाड़ी, और सौरसेनी प्राकृत से प्रभावित हैं और ये भाषाएँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं।

उत्तराखंड  पर्यटन के बारे में जानकारी

उत्तराखंड  पर्यटन के बारे में जानकारी

उत्तराखंड का नाम आते ही स्वतः ही मन मनमोहक ख़याल आने लगते है की यहाँ  खूबसूरती का समागम है यहाँ लगभग १३ जिलों में अनेक पर्यटक स्‍थल हैं नए स्थलों की खोज के साथ यहाँ की सूची बढती ही जा रही है। पूजा से  ट्रैकिंग तक, हर स्थल अपने  में अलग अहमियत रखता है । यहाँ  अनेक तीर्थस्थल  मौजूद हैं और यहाँ की खूबसूरत वादियाँ  यात्रियों के लिए रोमांचक गतिविधियों की एक विशाल रेंज प्रदान करती है।

उत्तराखंड के झीलों के जिले  के रूप में जाना जानेवाला, नैनीताल एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है जो की समुद्र तल से 1938 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। स्वर्ग का यह टुकड़ा अंग्रेजों द्वारा वर्ष 1841 में खोजा गया था  और एक हॉलिडे रिसोर्ट में बदल दिया गया। शब्द ‘नैनी’ हिंदू देवी नैनी के नाम से पड़ा,जिनका मंदिर झील के किनारे स्थित है।

नैनीताल आगंतुकों को नौका विहार, नौकायन और मछली पकड़ने के अवसर प्रदान करता है। नैनीताल के विभिन्न खूबसूरत  पर्यटक स्थल दुनिया भर से पर्यटकों की एक बड़ी संख्या कोअपनी ओर  आकर्षित करते हैं। इन स्थानों में हनुमानगढ़ी, खुरपाताल, किलबरी,लारिअकंता, और लैंसडाउन शामिल हैं।

इसके अलावा इन स्थानों से नैनी पीक, स्नो व्यू , नैनीताल रोपवे, भीमताल, नौकुचियाताल, और सात ताल नैनीताल के पास के स्थल हैं जो अपनी सुंदरता के लिए जाने जाते है। ‘पहाड़ियों की रानी’ मसूरी देखने लायक जगह है। इसकी खूबसूरत  हरी भरी पहाड़ियां और शक्तिशाली हिमालय की बर्फ से ढकी पर्वतमाला दून घाटी जो की दक्षिणी दिशा में स्थित है, का एक मनोरम दृश्य प्रदान करते हैं।

यमुना ब्रिज, नाग टिब्बा, धनौल्टी, और सुरखंडा देवी मसूरीके आस पास के पर्यटक स्थल हैं। कौसानी कत्युरी घाटी , गोमती नदी और पंचचुली  की बर्फीली चोटियों, नंदा कोट, नंदा देवी, त्रिशूल, नंदा घुंटी, चौखम्बा और केदारनाथ के लुभावने दृश्य प्रदान करता है। अनासक्ति आश्रम, पंत संग्रहालय, और लक्ष्मी आश्रम भी पर्यटकों में लोकप्रिय हैं।

कौसानी कत्युरी घाटी , गोमती नदी और पंचचुली  की बर्फीली चोटियों, नंदा कोट, नंदा देवी, त्रिशूल, नंदा घुंटी, चौखम्बा और केदारनाथ के लुभावने दृश्य प्रदान करता है। अनासक्ति आश्रम, पंत संग्रहालय, और लक्ष्मी आश्रम भी पर्यटकों में लोकप्रिय हैं।

अपने प्राकृतिक सौंदर्य और एक विविध वन्य जीवन के लिए जाने जानेवाले जगहों में, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, राजाजी नेशनल पार्क, केदारनाथ अभयारण्य, गोविंद वन्यजीव अभयारण्य, बिनसर वन्य जीव अभयारण्य, आस्सन बैराज पक्षी अभयारण्य, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क, और अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य जैसी जगहें शामिल है।

कई तीर्थयात्री आदि कैलाश, अल्मोड़ा, अगस्त्य मुनि, बद्रीनाथ, देवप्रयाग, द्वारहाट, गंगनानी,गंगोलीहाट, गंगोत्री और गौरीकुंड  जैसे स्थानों पर देवताओं के दर्शन हेतु उत्तराखंड आते हैं। अन्य प्रसिद्ध स्थलों हरिद्वार, केदारनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर, और जागेश्वर शामिल हैं।

हिमालय और काराकोरम पर्वतमाला ट्रेकिंग, पर्वतारोहण, स्कीइंग, और रिवर राफ्टिंग के लिए आदर्श स्थल हैं।यहाँ बाइकिंग, पैराग्लाइडिंग और कैम्पिंग का भी आनंद लिया जा सकता है।

क्यों न उत्तराखंड प्रकृति का दर्शन किया जाये

क्यों न उत्तराखंड प्रकृति का दर्शन किया जाये

इस खूबसूरत राज्य के उत्तर में जहाँ तिब्बत है वहीँ इसके पूरब में नेपाल देश है। जबकि इसके दक्षिण में उत्तर प्रदेश और उत्तर पश्चिम में हिमाचल प्रदेश है। इस राज्य का मूल नाम उत्तरांचल था जिसे बदलकर जनवरी 2007 में  उत्तराखंड कर दिया गया था। राज्य में कुल 13 जिलें हैं जिन्हें प्रमुख  डिवीजनों, कुमाऊं और गढ़वाल के आधार पर बांटा गया है।

उत्तराखंड के पर्यटन स्थल

उत्तराखंड के पर्यटन स्थल

नैनीताल, उत्तर-काशी, मसूरी और चमौली जैसे उत्तर भारत के लगभग सभी प्रमुख हिल स्टेशन उत्तराखंड में ही हैं। हरे-भरे और घने जंगल इसे 12 नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ अभ्यारण्यों के लिए आदर्श स्थान बनाते हैं।

हिल स्टेशनों की सुरम्यता के साथ-साथ धार्मिक महत्व के स्थान होने के कारण देश और दुनियाभर के लोग यहां आते हैं। उत्तराखंड ट्रैकिंग, क्लाइंबिंग और वाटर राफ्टिंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स का केंद्र भी है और इस कारण युवाओं की पहली पसंद है।

उत्तराखंड के हिल स्टेशन

उत्तराखंड के हिल स्टेशन

उत्तराखंड अपने हिल स्टेशनों मसूरी, चोपटा, अल्मोड़ा, नैनीताल, धनौल्टी, लैंसडाउन, वैली ऑफ फ्लॉवर और सत्तल के लिए प्रसिद्ध है। ये भारत के कुछ अनुपम हिल स्टेशन हैं, जो हरियाली से ओतप्रोत, बर्फ की चादर ओढ़े चोटियों और रंगबिरंगे फूलों से भरे हैं। वैली ऑफ फ्लॉवर में तो 250 प्रकार के फूलों की प्रजातियां हैं जो आंखों को सुकून देते हैं। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून अंग्रेजों के शासनकाल से ही सबसे खूबसूरत हिल स्टेशन है। यह प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल और भारत के सबसे पुराने शहरों में से एक है। मसूरी अपनी हरी-भरी पहाड़ियों और विविध वनस्पतियों और जीवों के लिए जानी जाती है। आप इस शहर से हिमालय की बर्फ से ढंकी लंबी पर्वतमाला के विहंगम दृश्य देख सकते हैं। इनके अलावा नैनीताल भी अपनेआप में ऐसी ही खूबसूरती समेटे हुए है और आप यहां भी यादगार पर्यटन के लिए जा सकते हैं।

उत्तराखंड के वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान

उत्तराखंड के वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान

इस राज्य में विभिन्न वाइल्डलाइफ अभ्यारण्य और पार्क पाए जाते हैं। देहरादून जिले में मशहूर आसन बैराज भी है, जहां यमुना और आसन का संगम है। कस्तूरी मृग के संरक्षण के लिए स्थापित एस्काट कस्तूरी मृग अभयारण्य भी यहीं है। तेंदुआ, हिरण, भालू, जंगली बिल्ली, उदबिलाव जैसे कई जंगली जानवर यहां बहुलता से पाए जाते हैं। नैनीताल जिले में सबसे बड़ा और पुराना नेशनल पार्क ‘जिम कार्बेट नेशनल पार्क’ स्थित है। यह पार्क विभिन्न जंगली जानवरों के अलावा बाघों के लिए जाना जाता है। भारत सरकार यहां प्रोजेक्ट टाइगर अभियान चला रही है। उत्तरकाशी जिले में गोविंद वाइल्डलाइफ अभ्यारण्य लुप्तप्राय: जानवरों के लिए महत्वपूर्ण स्थान और शरणस्थली है। यहां आयुर्वेदिक से लेकर एलोपैथिक दवाओं से जुड़े पौधे और वनस्पतियां मिलती हैं। बर्फीला तेंदुआ भी यहां देखा जा सकता है। अगर आप नैनीताल टूर पैकेजेस  बुक करना चाहते है तो आप स्वान टूर से संपर्क करे और अपनी  उत्तराखंड की यात्रा उचित देर पे प्राप्त करे अधिक जानकर के लिए यहाँ क्लिक करे  Nainital Corbett Tour 

उत्तराखंड के धार्मिक स्थल

उत्तराखंड के धार्मिक स्थल

भगवान शिव के और अनेक पवित्र मंदिरों के कारण उत्तराखंड हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थानों में गिना जाता है। बद्रीनाथ और केदारनाथ, दो ऐसे तीर्थस्थल हैं, जो यहां सदियों पहले से हैं। बद्रीनाथ चार धामों में से एक है और सबसे पवित्र स्थलों में से है। केदारनाथ भी बद्रीनाथ जितना ही पवित्र और दर्शनीय स्थल है। यहां प्राचीन शिव मंदिर है, जहां 12 ज्योर्तिलिंग में से एक शिवलिंग विराजमान हैं। गंगोत्री धरती का वह स्थान है, जिसे माना जाता है कि गंगा ने सबसे पहले छुआ। देवी गंगा यहां एक नदी के रूप में आई थीं। यमुनोत्री यमुना नदी का स्रोत है और इसके पश्चिम में पवित्र मंदिर है। हरिद्वार गंगा नदी के तट पर स्थित है। यह हिंदुओं का प्राचीन तीर्थस्थल है। ऋषिकेश सभी पवित्र स्थानों के लिए प्रवेश द्वार है।

कैसे पहुंचें उत्तराखंड

उत्तराखंड के वायु मार्ग  

राज्य का सबसे महत्वपूर्ण हवाई अड्डा देहरादून में जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। यहां से दिल्ली के लिए नियमित उड़ानें हैं। इसके अलावा कुमाऊं क्षेत्र में पंतनगर एयरपोर्ट है, जहां घरेलू विमान सेवाएं उपलब्ध हैं।Toy Train Kalka to Shimla

उत्तराखंड के रेल मार्ग

राज्य में सिर्फ 345 किमी. रेलवे ट्रैक है। नैनीताल से 35 किमी. दूर काठगोदाम रेलवे स्टेशन है, जो उत्तर-पूर्वी रेलवे का करीब-करीब अंतिम स्टेशन है। यह नैनीताल को देहरादून, दिल्ली और हावड़ा से जोड़ता है। राज्य के पंतनगर, लालकुआं और हलद्वानी में भी रेल सुविधा उपलब्ध है। देहरादून और हरिद्वार राज्य के दो प्रमुख स्टेशन हैं, जो देश के अधिकतर शहरों और हिस्से से जुड़े हुए हैं। ऋषिकेश, रामनगर और कोटद्वार में भी रेल सुविधा उपलब्ध है।

Travel Tips:

उत्तराखंड के बस मार्ग

राज्य में सड़कों का जाल अच्छी तरह फैला हुआ है। यहां 28,508 किमी. सड़कों का जाल है। इसमें से 1,328 किमी. सड़क नेशनल हाइवे और 1,543 किमी. स्टेट हाइवे के अंतर्गत आता है। सड़क मार्ग के लिए उत्तराखंड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन बसें चलाता है। निजी ऑपरेटर भी बस, टैक्सी जैसी सुविधाएं देते हैं। राज्य के हर प्रमुख स्थान तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है।

उत्तराखंड में घूमने का सर्वश्रेष्ठ समय

गर्मियों के दिनों में राज्य में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है। लेकिन सर्दियों में यह बेहद ठंडा होता है। इस पहाड़ी राज्य में, देश के मुकाबले सामान्य या इससे अधिक बारिश होती है। उत्तराखंड में घूमने का सर्वश्रेष्ठ समय मार्च से जून के बीच और सितंबर-अक्टूबर का महीना होता है।

घूमने लायक जगह उत्तराखंड में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जिन्हें देश के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों की सूची में रखा जा सकता है। इनमें से इन प्रमुख स्थानों पर जरूर घूमना चाहिए:

बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, पंच केदार, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, हरिद्वार, अल्मोड़ा, राजाजी नेशनल पार्क, ऋषिकेश, हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा, रूपकुंड, औली, नंदा देवी और गोमुख।

उत्तराखंड घूमने के लिए सलाह

दुर्गम इलाकों में सुरक्षित यात्रा के लिए ध्यान से गाड़ी चलाना जरूरी है।

ट्रैकिंग या अन्य किसी कारण से, बाहर निकलें तो अपने साथ एक नक्शा रखें।

यह पहाड़ी क्षेत्र है। आमतौर पर शाम के बाद बहुत ठंडक हो जाती है। गर्म कपड़े हमेशा साथ रखें।

बरसात के मौसम में पहाड़ियों में यात्रा करने से बचें। इस मौसम में भूस्खलन का खतरा होता है।

उत्तराखंड यात्रा के दौरान खर्च

उत्तराखंड, देश के उन प्रमुख राज्यों में हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग घूमने जाते हैं। लोगों के यहां आने की अनेक वजहें हैं, जैसे: एडवेंचर स्पोर्ट्स, तीर्थयात्रा, प्रकृतिप्रेम, वाइल्डलाइफ का रोमांच और स्वास्थ्य लाभ लेना। आप अपनी सुविधा और पसंद के मुताबिक टूर पैकेज का विकल्प चुन सकते हैं। टूर पैकेज उत्तराखंड टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (यूटीडीबी) और अनेक निजी ऑपरेटरों द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं। चार धाम पैकेज पर प्रति व्यक्ति करीब 15,000 रुपए का खर्च आ सकता है। दो धाम का खर्च भी करीब 10000 रुपए तक लग सकता है।

उत्तराखंड के लोकप्रिय स्थान

उत्तराखंड के लोकप्रिय स्थान

उत्तराखंड खूबसूरत पर्यटन स्थलों के अलावा कई दिलचस्प गतिविधियों का केंद्र भी है। इनमें औली में स्कीइंग की सुविधा, उत्तराखंड में कैंप लगाना, हेमकुंड साहिब में ट्रैकिंग, वैली ऑफ फ्लॉवर्स, ऋषिकेश में राफ्टिंग, माउंटेनिंग, रॉक क्लाइंबिंग, बर्ड वाचिंग, पैराग्लाइडिंग, वाइल्डलाइफ सफारी और गंगोत्री ग्लेशियर में ट्रैकिंग शामिल हैं।

उत्तराखंड के लोकप्रिय होटल

उत्तराखंड में बड़ी संख्या में होटल, गेस्ट हाउस और रिसोर्ट हैं। यहां हर स्तर के व्यक्ति के लिए रहने-खाने की सुविधा उपलब्ध है। राज्य की पहचान पर्यटन के लिए है और यहां हर बजट के होटल उपलब्ध हैं।

उत्तराखंड में कितने दिन रहें

उत्तराखंड में घूमने लायक अनेक स्थान हैं। इन स्थानों में भी बड़ी विविधता है। इसलिए यहां घूमने के लिए कितने दिन पर्याप्त होंगे, यह अलग-अलग कारणों (तीर्थयात्रा, एडवेंचर ट्रिप या सामान्य छुटि्टयां) पर निर्भर करेगा।

उत्तराखंड में क्या खाएं

उत्तराखंड में गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों के अलग-अलग खाद्य पदार्थों की बड़ी विविधता है, जो आपको अपना मुरीद बना लेगी। उत्तराखंड में स्थानीय साग-पत्ते और मसाले का मिश्रण खाने का स्वाद और बढ़ा देते हैं। आप यहां के खाने के लिए पारंपरिक स्वाद वाले भोजन भी चुन सकते हैं, जैसे मठरी और तिल लड्‌डू, मडुआ रोटी, दुबके के साथ चोलाई रोटी, गहत सूप, गहत रास्मी बड़ी (कोफ्ता), उड़द के पकौड़े (वडा), भांगजीरा की चटनी, आलू के गुटके, ितल की चटनी, बाल मिठाई, सिंगोडी, सिनसुक साग, झिंगारा की खीर, कापा की दाल और सिंघल।

पारंपरिक के साथ-साथ देश-विदेश की रसोई में बनने वाला भोजन भी विभिन्न होटलों में उपलब्ध रहता है। आप इन प्रमुख स्थानों में ये भोजन कर सकते हैं: साकल्ले रेस्टोरेंट, पिरामिड कैफे, चोटीवाला, लवली ऑमलेट सेंटर, लिटिल बुद्धा कैफे, कास्मांदा पैलेस रेस्टोरेंट, चेतन पूरीवाला और देवराज कॉफी कॉर्नर।

उत्तराखंड में क्या खरीदारी करे

उत्तराखंड में खरीदारी के विकल्प ज्यादा नहीं हैं। फिर भी आप स्मृतिचिन्ह के रूप में निम्नलिखित सामान ले सकते हैं।  लकड़ी की नक्काशीदार आकृतियां, ऊनी कपड़े, रूद्राक्ष की माला, हाथ से बनी मोमबत्तियां, ऑर्गनिक वस्तुओं, पत्तियों और छालों से बने शो पीस, अचार और जैम और बहुत कुछ |

उत्तराखंड में अधिकतर खरीदारी हिल स्टेशन के बाजारों से की जाती है। सरकारी एंपोरियम के साथ-साथ निजी दुकान भी खरीदारी के अच्छे विकल्प और सुविधाएं देते हैं। पलटन बाजार और तिब्बती बाजार भी वे स्थान हैं, जहां से आप खरीदारी कर सकते हैं।

उत्तराखंड टूरिस्ट हेल्पलाइन नंबर

उत्तराखंड टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (यूटीडीबी)
टेलीफोन: 91-135-2559898, 2559987

उत्तराखंड में घूमने लायक स्थान

उत्तराखंड देवभूमि है, हिमालय का घर है। यह पूरी दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर लुभाता है। उत्तराखंड में अनेक पर्यटन स्थल हैं, जो या तो प्राकृतिक दृश्य हैं या धार्मिक महत्व के स्थान हैं। यह पहाड़ी राज्य भौगोलिक रूप से दो क्षेत्रों कुमाऊं और गढ़वाल में विभाजित है। दोनों ही क्षेत्रों में अनेक पर्यटन स्थल हैं। अगर आप ऋषिकेश और मुस्सूरी टूर पैकेजेस  बुक करना चाहते है तो आप स्वान टूर से संपर्क करे और अपनी  उत्तराखंड की यात्रा उचित देर पे प्राप्त करे अधिक जानकर के लिए यहाँ क्लिक करे  Rishikesh Mussoorie

उत्तराखंड में देखने लायक स्थान

मसूरी के दर्शनीय स्थल

मसूरी के दर्शनीय स्थल

मसूरी देहरादून से 34 किमी. दूर स्थित है। यह गढ़वाल की पहाड़ी पर समुद्र तल से 2003 मी. ऊंचाई पर है। मसूरी देश के सबसे आकर्षक हिल स्टेशनों में से एक है। हिंदुओं के प्रमुख तीर्थस्थल, जैसेः केदारनाथ, गंगोत्री, बद्रीनाथ, हरिद्वार, यमुनोत्री और ऋषिकेश यहां से ज्यादा दूर नहीं हैं।

मसूरी में घूमने लायक प्रमुख स्थान ये हैं:

गन हिल्स

यह मसूरी की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है। गन हिल्स से हिमालय की खूबसूरती को बड़ी नजदीक से निहारा जा सकता है। यहां से मुख्यतः बुंदेरपुंछ, पिथौड़ा श्रीकांत और गंगोत्री ग्रुप करीब है। यहां से मसूरी शहर और दून घाटी को बर्ड व्यू (जैसा दृश्य चिड़िया को ऊंचाई से दिखता है) की तरह देख सकते हैं।

म्यूनिसिपल ग्राउंड

यह पिकनिक के लिए बेहद खूबसूरत जगह है। यहां एक सुंदर बाग और कृत्रिम झील है। झील में नौका विहार का मजा भी लिया जा सकता है।

चाइल्डर्स लॉज

यह मसूरी की सबसे ऊंची चोटी है, जो लाल टिब्बा के नजदीक है। यह पर्यटन कार्यालय से 5 किमी. दूरी पर है। यहां से बर्फ के दृश्य देखना बहुत रोमांचक अनुभव है।

कैमल बैक रोड

कुल तीन किमी. लंबी यह रोड रिंक हॉल के करीब कुलरी बाजार से शुरू होती है और लाइब्रेरी बाजार पर जाकर समाप्त होती है। इस सड़क का सबसे बड़ा आकर्षण यहां पर घुड़सवारी करना होता है। यहां आकर हिमालय में सूर्यास्त का खूबसूरत दृश्य देखने का मौका नहीं गंवाना चाहिए।

झड़ीपानी फॉल

यह फॉल मसूरी-झड़ीपानी रोड पर मसूरी से 8.5 किमी. दूरी पर स्थित है। पर्यटक झड़ीपानी तक 7 किमी. की दूरी बस या कार से तय कर सकते हैं। इसके बाद अगले 1.5 किमी. पैदल चलकर फॉल तक पहुंच सकते हैं।

भट्टा फॉल

यह फॉल मसूरी-देहरादून रोड पर मसूरी से 7 किमी. दूरी पर स्थित है। कोई भी मसूरी से बस या कार से चार किलोमीटर दूर स्थित बाटला गांव तक जा सकता है। इसके बाद की 3 किमी. यात्रा पैदल चलकर पूरी करनी पड़ती है।

रानीखेत के दर्शनीय स्थल

राजा सुधारदेव की रानी पद्मावती उत्तराखंड के रानीखेत पर कभी मोहित हो गई थीं। उन्होंने यह जगह देखने के बाद इसे ही अपना आवास बना लिया था। इसीलिए इस जगह को रानीखेत के नाम से जाना गया। इस स्थान से नंदा देवी (7817 मी.) समेत हिमाच्छादित मध्य हिमालय की चोटियां और जंगली जानवरों से भरा घना जंगल स्पष्ट देखा जा सकता है। अगर आप  नैनीताल रानीखेत और कॉर्बेट टूर पैकेजेस  बुक करना चाहते है तो आप स्वान टूर से संपर्क करे और अपनी  उत्तराखंड की यात्रा उचित देर पे प्राप्त करे अधिक जानकर के लिए यहाँ क्लिक करे  Nainital Ranikhet Corbett Tour

झूला देवी मंदिर

यह देवी दुर्गा को समर्पित यहां का अनूठा मंदिर है। मंदिर की तराशी हुई घंटियां अति सुंदर हैं। इसके नजदीक ही भगवान राम का मंदिर भी है।

चौबटिया

चौबटिया बगीचों के लिए है। यह रानीखेत से 10 किमी. दूरी पर है और मोटर-बाइक से पहुंचा जा सकता है। यहां सरकार द्वारा स्थापित फल संरक्षण केंद्र भी है। आसमान साफ होने पर चौबटिया से हिमालय की 30 किमी. विस्तार तक बर्फ से ढंकी चोटियां देखी जा सकती हैं। नंदा देवी, नंदा घुंटी, त्रिशूल और नीलकंठ की चोटियों के यहां से विहंगम दृश्य देखते जा सकते हैं। भालूडैम यहां से तीन किमी. दूरी पर है और इससे सटा एक सुंदर कृत्रिम झील है।

उपट और कालिका

उपट यहां से अल्मोड़ा रोड पर स्थित है। यहां नौ होल का सुंदर गोल्फकोर्स है। कालिका में मां काली का मंदिर है। कालिका इस मंदिर और हरी-भरी नर्सरी के लिए मशहूर है।

कुमाऊं

कुमाऊं उत्तराखंड का बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल है जो बर्फीली पहाड़ियों, घाटियों, ग्लेशियरों, झीलों, हरे-भरे मैदानों और जंगलों से घिरा है। यह राज्य के दो भौगोलिक क्षेत्रों में से एक है। अगर आप अल्मोड़ा  और कौसानी टूर पैकेजेस  बुक करना चाहते है तो आप स्वान टूर से संपर्क करे और अपनी  उत्तराखंड की यात्रा उचित देर पे प्राप्त करे अधिक जानकर के लिए यहाँ क्लिक करे  Almora Kausani Tour

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