हम लोग गणतंत्र दिवस क्यों मनाते है ?

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रत के स्वतंत्र लोक्ततंत्र के 68वें गणतंत्र दिवस की तैयारियां जोरों पर! गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 26 से 31 जनवरी 2017 तक लाल किला परिसर में भारत पर्व का आयोजन है।  भारत पर्व में गणतंत्र दिवस परेड में शामिल झाँकियों के साथ पूरे देश के लोक संस्कृति, व्यंजन और परिधान को देखने अवश्य पधारें ।

गणतंत्र दिवस

पहली बार इस वजह से अलग होगी रिपब्लिक डे परेड

देश के इतिहास में पहली बार 68वें गणतंत्र दिवस पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सेना राजपथ पर परेड करेगी. अबू धाबी के राजकुमार शेख मोहम्मद बिन जाएद अल नाह्यां बतौर गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में मंगलवार को दिल्ली पहुंच गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें लेने स्वयं एयरपोर्ट पर पहुंचे. शेख मोहम्मद यूएई आर्म्ड फोर्सेज के डिप्टी सुप्रीम कमांडर भी हैं और उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई का समर्थन किया है.

पिछले साल फ्रांस के बाद यह दूसरा मौका है, जब कोई विदेशी सेना राजपथ की परेड में हिस्सा ले रही है. सोमवार को फुल ड्रेस रिहर्सल में यूएई की टुकड़ी शामिल रही. परेड में इस बार 23 झांकियां नजर आएंगी.

राजकुमार शेख मोहम्मद तीन दिन के दौरे पर भारत आए हैं. उनके सम्मान में पहले राष्ट्रपति भवन में भोज आयोजित किया जाएगा फिर वे महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने राजघाट जाएंगे. वे 25 जनवरी को भारतीय प्रधानमंत्री के साथ हैदराबाद हाउस में एक बैठक में शामिल होंगे.

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गणतंत्र दिवस क्यों मनाते है

हम लोग गणतंत्र दिवस क्यों मनाते है ?

रिपब्लिक डे (गणतंत्र दिवस )2017: जानिए क्यों मनाया जाता है गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस: 26 जनवरी 1950 भारतीय इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि भारत का संविधान, इसी दिन अस्तित्व मे आया था

गणतंत्र दिवस हर भारतीय के लिए बहुत मायने रखता है। यह दिन हम सभी के लिए बहुत महत्व का दिन है जिसे हम बेहद ही उत्साह के साथ मनाते हैं। भारत एक महान देश है और सिर्फ भारत में ही विविधता में ही एकता देखने को मिलती है। जहां विभिन्न जाति और धर्म के लोग प्यार से रहते हैं। 26 जनवरी और 15 अगस्त दो ऐसे राष्ट्रीय दिवस हैं जिन्हें हर भारतीय खुशी और उत्साह के साथ मनाता है।

26 जनवरी 1950 भारतीय इतिहास में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि भारत का संविधान, इसी दिन अस्तित्व मे आया था और भारत दिन पूर्ण गणतंत्र देश बना। भारत का संविधान लिखित सबसे बङा संविधान है। संविधान निर्माण की प्रक्रिया में 2 वर्ष, 11 महिना, 18 दिन लगे थे। भारतीय संविधान के वास्तुकार डॉ.भीमराव अम्बेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। भारतीय संविधान के निर्माताओं ने विश्व के अनेक संविधानों के अच्छे लक्षणों को अपने संविधान में आत्मसात करने का प्रयास किया है। इस दिन भारत एक सम्पूर्ण गणतांत्रिक देश बन गया था । देश को गौरवशाली गणतंत्र राष्ट्र बनाने में जिन देशभक्तों ने अपना बलिदान दिया उन्हें 26 जनवरी दिन याद किया जाता और उन्हें श्रद्धाजंलि दी जाती है।

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आखिर क्यों मनाएं हम गणतंत्र दिवस?

पूरे देश में गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी शुरू हो गई है। गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय उत्सव भी कहा जाता है। स्कूलों और सरकारी संस्थानों में यह उत्सव मनाना अतिआवश्यक है। सवाल यह उठता है कि क्या कोई भी उत्सव थोपा जाना चाहिए?

कितने लोग इसे मन से मनाते होंगे? उत्सव क्या बाध्यता से मनाए जाने चाहिए? ऐसा उत्सव जिसे बाध्य करके मनवाया जाता हो उसे उत्सव कहना क्या उचित होगा।

इसे राष्ट्रीय उत्सव कहना राष्ट्र और उत्सव दोनों शब्दों के साथ मजाक करना है। इसे राजकीय उत्सव तो कहा जा सकता है, परंतु राष्ट्रीय उत्सव कभी नहीं। क्या मतलब है उस राष्ट्रीय उत्सव का, जिसको राष्ट्र के सभी नागरिक ही अपने मन से नहीं मनाते हों।

म सभी को इस पर भी अवश्य विचार करना चाहिए कि आखिर वह कौन-सा कारण है कि देश के नागरिकों को इसका मतलब समझ में नहीं आता है। और अगर मतलब समझ में आता है और फिर भी स्वयं से मनाना नहीं चाहते हैं। तो ये तो और भी ज्यादा चिंता का विषय है।

क्या इसे हम सरकार कि विफलता नहीं कहेंगे कि साठ साल बाद भी उसका राष्ट्रीय उत्सव देश के आम आदमी तक नहीं पहुंच पाया है। आम आदमी तो इसके पीछे के इतिहास को समझ ही नहीं सका, तो वह इसे हर्षोउल्लास से कैसे मना सकता है।

वास्तव में आजादी मिलने के बाद अपने देश में एक नई संस्कृति और नया राष्ट्र बनाने कि कोशिश शुरू की गई थी। इसलिए इस राष्ट्र से जुड़ी सारी प्राचीन चीजों को नष्ट करके नई संस्कृति को शुरू करने का प्रयास किया गया। नए नेताओं ने व महापुरुषों ने नया इतिहास रचाने कि कोशिश की।

अगर पुरानी अस्मिता को नष्ट करके हमारे देश की और राष्ट्र की भलाई होती तो लोग आज परेशान न होते बल्कि आज हम देखते हैं कि पुराने जीवन मूल्यों और परंपराओं कि उपेक्षा करने से समस्याए बड़ी ही हैं कम नहीं हुई।

गणतंत्र दिवस को यदि संविधान स्थापना समारोह के रूप में मनाया जाए तो फिर भी सही है। परंतु इसे राष्ट्रीय उत्सव कहना उचित नहीं है। जो उत्सव देश के आम आदमी को उत्साहित नहीं करता उसे राष्ट्रीय उत्सव कैसे कहें।

गणतंत्र दिवस को मनाने में जनता का बहुत सारा पैसा लगता है, जो देश के विकास कार्यों के लिए बाधा बन जाता है तो क्या इसे मनाना उचित है?

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गणतंत्र दिवस का इतिहास

भारत के संविधान को लागू किए जाने से पहले भी 26 जनवरी का बहुत महत्त्व था। 26 जनवरी को विशेष दिन के रूप में चिह्नित किया गया था, 31 दिसंबर सन् 1929 के मध्‍य रात्रि में राष्‍ट्र को स्वतंत्र बनाने की पहल करते हुए लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हु‌आ जिसमें प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की ग‌ई कि यदि अंग्रेज़ सरकार 26 जनवरी, 1930 तक भारत को उपनिवेश का पद (डोमीनियन स्टेटस) नहीं प्रदान करेगी तो भारत अपने को पूर्ण स्वतंत्र घोषित कर देगा।
राष्‍ट्रीय ध्‍वज
26 जनवरी, 1930 तक जब अंग्रेज़ सरकार ने कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इस लाहौर अधिवेशन में पहली बार तिरंगे झंडे को फहराया गया था परंतु साथ ही इस दिन सर्वसम्मति से एक और महत्त्वपूर्ण फैसला लिया गया कि प्रतिवर्ष 26 जनवरी का दिन पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन सभी स्वतंत्रता सेनानी पूर्ण स्वराज का प्रचार करेंगे। इस तरह 26 जनवरी अघोषित रूप से भारत का स्वतंत्रता दिवस बन गया था। उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा।

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गणतंत्र दिवस का भारतीय संविधान सभा से सम्बन्ध

उसी समय भारतीय संविधान सभा की बैठकें होती रहीं, जिसकी पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई, जिसमें भारतीय नेताओं और अंग्रेज़ कैबिनेट मिशन ने भाग लिया। भारत को एक संविधान देने के विषय में कई चर्चाएँ, सिफारिशें और वाद – विवाद किया गया। कई बार संशोधन करने के पश्चात भारतीय संविधान को अंतिम रूप दिया गया जो 3 वर्ष बाद यानी 26 नवंबर, 1949 को आधिकारिक रूप से अपनाया गया। 15 अगस्त, 1947 में अंग्रेजों ने भारत की सत्ता की बागडोर जवाहरलाल नेहरू के हाथों में दे दी, लेकिन भारत का ब्रिटेन के साथ नाता या अंग्रेजों का अधिपत्य समाप्त नहीं हुआ। भारत अभी भी एक ब्रिटिश कॉलोनी की तरह था, जहाँ की मुद्रा पर जॉर्ज 6 की तस्वीरें थी। आज़ादी मिलने के बाद तत्कालीन सरकार ने देश के संविधान को फिर से परिभाषित करने की ज़रूरत महसूस की और संविधान सभा का गठन किया जिसकी अध्यक्षता डॉ. भीमराव अम्बेडकर को मिली, 25 नवम्बर, 1949 को 211 विद्वानों द्वारा 2 महीने और 11 दिन में तैयार देश के संविधान को मंजूरी मिली।

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पहला गणतंत्र दिवस  सन 1950, प्रथम में जवाहरलाल नेहरू

24 जनवरी, 1950 को सभी सांसदों और विधायकों ने इस पर हस्ताक्षर किए। और इसके दो दिन बाद यानी 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू कर दिया गया। इस अवसर पर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली तथा 21 तोपों की सलामी के बाद ‘इर्विन स्‍टेडियम’ में भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज ‘तिरंगा’ को फहराकर भारतीय गणतंत्र के ऐतिहासिक जन्‍म की घो‍षणा की थी। 26 जनवरी का महत्त्व बना‌ए रखने के लि‌ए विधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यू‌एंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की ग‌ई। इस तरह से 26 जनवरी एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। यह एक संयोग ही था कि ‘कभी भारत का पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाने वाला दिन अब भारत का गणतंत्र दिवस’ बन गया था। अंग्रेजों के शासनकाल से छुटकारा पाने के 894 दिन बाद हमारा देश स्‍वतंत्र राष्ट्र बना। तब से आज तक हर वर्ष राष्‍ट्रभर में बड़े गर्व और हर्षोल्लास के साथ गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। तदनंतर स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। यही वह दिन था जब 1965 में हिन्दी को भारत की राजभाषा घोषित किया गया।

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गणतंत्र दिवस का कांग्रेस अधिवेशन और मुस्लिम लीग सम्बन्ध

26 जनवरी सन् 1930 को ही कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में रावी के किनारे पूर्ण स्वतंत्रता प्रस्ताव पास करके आज़ादी का जश्न मनाया था। उसी वक़्त से सारे देश में हर साल 26 जनवरी को पूर्ण स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा था। जुलाई 1946 में संविधान सभा का चुनाव हुआ, जिसमें 296 सदस्यों की सभा में से मुस्लिम लीग को 73 और कांग्रेस को 211 स्थान मिले थे।

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अग्नि मिसाइल, गणतंत्र दिवस

कांग्रेस के नेताओं ने पं. जवाहरलाल नेहरू, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, सरदार बल्लभ भाई पटेल, गोविन्द बल्लभ पन्त, बी. जी. खेर, डॉ. पुरुषोत्तम दास टण्डन, मौलाना अबुलकलाम आज़ाद, खान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ाँ, श्री आसफ़ अली, श्री रफ़ी अहमद किदवाई, श्री कृष्ण सिन्हा, कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी, आचार्य जे. बी. कृपलानी और श्री कृष्णमाचारी आदि थे। इसके अलावा कांग्रेस सेना मेम्बरों में कांग्रेस द्वारा नामांकित सदस्यों में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. सच्चिदानन्द सिन्हा, श्री एन. गोपाल स्वामी अयंगर, डॉ. बी. आर. अम्बेडकर, डॉ. एम. आर. जयकर, श्री अल्लादि कृष्ण स्वामी अय्यर, पं. हृदयनाथ कुंजरू, श्री हरी सिंह गौड़ और प्रोफेसर के. टी. शाह आदि थे। संविधान सभा में कुछ महिलायें भी थीं, जिनमें श्रीमती सरोजिनी नायडू, श्रीमती दुर्गाबाई देशमुख, श्रीमती हंसा मेहता, और श्रीमती रेणुका राय प्रमुख थीं। मुस्लिम लीग में नवाबज़ादा लियाक़त अली ख़ाँ, ख़्वाजा नाज़िमुद्दीम, श्री एच. एस. सुहरावर्दी, सर फ़िरोज़ ख़ाँ नून और मोहम्मद जफ़रुल्ला ख़ाँ, प्रमुख थे। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद इस सभा के अध्यक्ष थे। 9 दिसम्बर सन् 1946 को संविधान सभा का पहला अधिवेशन होना निश्चित हुआ। मुस्लिम लीग ने दो संविधान सभाओं की माँग की जिसमें से एक पाकिस्तान के लिए बनाई और दूसरी भारत के लिए।

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भारत का विभाजन

3 जून सन् 1947 को माउण्टबेटन योजना प्रस्तुत की गई, जिसमें प्रस्ताव किया गया कि भारत को दो भागों, भारत और पाकिस्तान में बाँट दिया जाए। कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने ही इस योजना को स्वीकार कर लिया। अप्रैल सन् 1947 में बड़ौदा, बीकानेर, उदयपुर, जोधपुर, रीवा और पटियाला के देशी राज्यों के प्रतिनिधि संविधान सभा में सम्मिलित हो चुके थे।

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गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय कैडेट कोर की परेड

और 14 जुलाई सन् 1947 तक केवल दो देशी राज्यों जम्मू–कश्मीर और हैदराबाद को छोड़कर बाकी देशी राज्यों के प्रतिनिधि संविधान सभा में भाग लेने आ गए थे। 15 अगस्त सन् 1947 को भारत के दो टुकड़े भारत और पाकिस्तान से होकर भारत आज़ाद हुआ। पं. जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने और लाल क़िले पर तिरंगा झण्डा फहराया। अक्टूबर सन् 1947 तक जम्मू और कश्मीर भी भारत में शामिल हो गया और नवम्बर सन् 1948 में हैदराबाद भी।

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पहली गणतंत्र दिवस पर संविधान पारित

इस प्रकार संसद भारत की मुकम्मल प्रतिनिधि सभा बन गई। 29 अगस्त सन् 1947 के प्रस्ताव के अनुसार एक प्रारूप समिति क़ायम की गई, जिसके सात सदस्य थे और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर उसके अध्यक्ष थे। इस समिति ने 21 फ़रवरी सन् 1948 को अपना निर्णय प्रस्तुत कर दिया, जो 4 नवम्बर, सन् 1948 को संसद के सामने रखा गया। इस पर 9 नवम्बर सन् 1948 से 17 अक्टूबर सन् 1949 तक दूसरी खुवांदगी (वाचन) चलती रही जिसमें 7635 धाराएँ पेश की गईं। 14 नवम्बर सन् 1949 से 26 नवम्बर सन् 1949 तक तीसरी खुवांदगी हुई और 26 नवम्बर, 1949 को संविधान पर संविधान सभा हस्ताक्षर होकर संविधान पारित हो गया। 24 जनवरी सन् 1950 को संविधान सभा का अन्तिम अधिवेशन हुआ और इसमें नये संविधान के अनुसार डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारतीय गणराज्य का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया। 26 जनवरी सन् 1950 से नया संविधान लागू किया गया। उसी दिन से हर साल 26 जनवरी को भारत में गणतंत्रता दिवस मनाया जाता है।

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गणतंत्र दिवस की यात्रा

सबसे पहली बार 21 तोपों की सलामी के बाद भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने फहरा कर 26 जनवरी, 1950 को भारतीय गणतंत्र के ऐतिहासिक जन्‍म की घो‍षणा की। ब्रिटिश राज से आज़ादी पाने के 894 दिन बाद हमारा देश स्‍वतंत्र राज्‍य बना। तब से हर वर्ष पूरे राष्ट्र में बड़े उत्‍साह और गर्व से यह दिन मनाया जाता है। एक ब्रिटिश उपनिवेश से एक सम्‍प्रभुतापूर्ण, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में भारत का निर्माण एक ऐतिहासिक घटना रही। यह लगभग 2 दशक पुरानी यात्रा थी जो 1930 में एक सपने के रूप में संकल्पित की गई और 1950 में इसे साकार किया गया। भारतीय गणतंत्र की इस यात्रा पर एक नज़र डालने से हमारे आयोजन और भी अधिक सार्थक हो जाते हैं।

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गणतंत्र दिवस पर सांस्‍कृतिक कार्यक्रम और आयोजन

गणतंत्र दिवस भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय त्योहार है, इस दिन राष्ट्रपति इंडिया गेट पर भारत के सब राज्यों से आए हुए प्रतिनिधियों तथा भारत की तीनों सेनाओं की सलामी लेते हैं। अनेक प्रकार की सुन्दर–सुन्दर झाँकियाँ नाच-गाने, बैण्ड-बाजे, हाथी, ऊँट, घोड़ों की सवारियाँ, टैंक, तोप, समुद्री जहाज़ और हवाई जहाज़ के नमूने कृषि और उद्योग की झाँकियाँ, स्कूली बच्चों के नाच-गाने करते हुए ग्रुप राष्ट्रपति को सलामी देते हुए चलते हैं। जो कि विजय चौक से शुरू होकर लाल क़िले तक जाते हैं। इस उत्सव में किसी दूसरे देश का कोई मेहमान बुलाया जाता है। उस दिन दर्शकों की इतनी भीड़ होती है कि इंडिया गेट पर ऐसा मालूम होता है जैसे इन्सानों का समुद्र लहरा रहा हो। रात को इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन, सेंट्रल सेक्रेटेरियट, संसद भवन तथा मुख्य सरकारी इमारतों पर रोशनी की जाती है।

असली मायनों में भारत की जनता को राज्य 26 जनवरी सन् 1950 से ही प्राप्त हुआ। 15 अगस्त सन् 1947 को हम आज़ाद ज़रूर हो गए थे लेकिन हमारा कोई संविधान लागू नहीं हुआ था और न ही कोई गणराज्य का राष्ट्रपति था।

अंग्रेज़ भारत को छोड़कर चले गए और 26 जनवरी को जनता का राज्य हुआ, इसलिए 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते हैं। जो जवान आज़ादी की लड़ाई में शहीद हुए उनकी याद में इंडिया गेट पर अमर ज्योति जलाई जाती है।

इसके शीघ्र बाद 21 तोपों की सलामी दी जाती है, राष्ट्रपति महोदय द्वारा राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराया जाता है और राष्‍ट्रगान होता है। इस प्रकार परेड आरंभ होती है। महामहिम राष्ट्रपति के साथ एक उल्‍लेखनीय विदेशी राष्‍ट्र प्रमुख आते हैं, जिन्‍हें आयोजन के मुख्‍य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है।

राष्ट्रपति महोदय के सामने से खुली जीपों में वीर सैनिक गुजरते हैं। भारत के राष्ट्रपति, जो भारतीय सशस्‍त्र बल, के मुख्‍य कमांडर हैं, विशाल परेड की सलामी लेते हैं। भारतीय सेना द्वारा इसके नवीनतम हथियारों और बलों का प्रदर्शन किया जाता है जैसे टैंक, मिसाइल, राडार आदि। इसके शीघ्र बाद राष्ट्रपति द्वारा सशस्‍त्र सेना के सैनिकों को बहादुरी के पुरस्‍कार और मेडल दिए जाते हैं जिन्‍होंने अपने क्षेत्र में अभूतपूर्व साहस दिखाया और ऐसे नागरिकों को भी सम्‍मानित किया जाता है जिन्‍होंने विभिन्‍न परिस्थितियों में वीरता के अलग-अलग कारनामे किए। इसके बाद सशस्‍त्र सेना के हेलिकॉप्‍टर दर्शकों पर गुलाब की पंखुडियों की बारिश करते हुए फ्लाई पास्‍ट करते हैं।

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गणतंत्र दिवस पर सांस्‍कृतिक परेड

सेना की परेड के बाद रंगारंग सांस्‍कृतिक परेड होती है। विभिन्‍न राज्‍यों से आई झांकियों के रूप में भारत की समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत को दर्शाया जाता है। प्रत्‍येक राज्‍य अपने अनोखे त्‍यौहारों, ऐतिहासिक स्‍थलों और कला का प्रदर्शन करते हैं। यह प्रदर्शनी भारत की संस्कृति की विविधता और समृद्धि को एक त्‍यौहार का रंग देती है। विभिन्‍न सरकारी विभागों और भारत सरकार के मंत्रालयों की झांकियां भी राष्‍ट्र की प्रगति में अपने योगदान प्रस्‍तुत करती है। इस परेड का सबसे खुशनुमा हिस्‍सा तब आता है जब बच्‍चे, जिन्‍हें राष्‍ट्रीय वीरता पुरस्‍कार हाथियों पर बैठकर सामने आते हैं। पूरे देश के स्‍कूली बच्‍चे परेड में अलग-अलग लोक नृत्‍य और देश भक्ति की धुनों पर गीत प्रस्‍तुत करते हैं। परेड में कुशल मोटर साइकिल सवार, जो सशस्‍त्र सेना कार्मिक होते हैं, अपने प्रदर्शन करते हैं। परेड का सर्वाधिक प्रतीक्षित भाग फ्लाई पास्‍ट है जो भारतीय वायु सेना द्वारा किया जाता है। फ्लाई पास्‍ट परेड का अंतिम पड़ाव है, जब भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान राष्ट्रपति का अभिवादन करते हुए मंच पर से गुजरते हैं।

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गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री की रैली

गणतंत्र दिवस का आयोजन कुल मिलाकर तीन दिनों का होता है और 27 जनवरी को इंडिया गेट पर इस आयोजन के बाद प्रधानमंत्री की रैली में एन.सी.सी. केडेट्स द्वारा विभिन्‍न चौंका देने वाले प्रदर्शन और ड्रिल किए जाते हैं।

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गणतंत्र दिवस पर लोक तरंग

सात क्षेत्रीय सांस्‍कृतिक केन्‍द्रों के साथ मिलकर संस्‍कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा हर वर्ष 24 से 29 जनवरी के बीच ‘’लोक तरंग – राष्‍ट्रीय लोक नृत्‍य समारोह’’ आयोजित किया जाता है। इस आयोजन में लोगों को देश के विभिन्‍न भागों से आए रंग बिरंगे और चमकदार और वास्‍तविक लोक नृत्‍य देखने का अनोखा अवसर मिलता है।
बीटिंग द रिट्रीट

बीटिंग द रिट्रीट गणतंत्र दिवस आयोजनों का आधिकारिक रूप से समापन घोषित करता है। सभी महत्‍वपूर्ण सरकारी भवनों को 26 जनवरी से 29 जनवरी के बीच रोशनी से सुंदरता पूर्वक सजाया जाता है। हर वर्ष 29 जनवरी की शाम को अर्थात गणतंत्र दिवस के बाद अर्थात गणतंत्र की तीसरे दिन बीटिंग द रिट्रीट आयोजन किया जाता है। यह आयोजन तीन सेनाओं के एक साथ मिलकर सामूहिक बैंड वादन से आरंभ होता है जो लोकप्रिय मार्चिंग धुनें बजाते हैं। ड्रमर भी एकल प्रदर्शन (जिसे ड्रमर्स कॉल कहते हैं) करते हैं। ड्रमर्स द्वारा एबाइडिड विद मी (यह महात्मा गाँधी की प्रिय धुनों में से एक कहीं जाती है) बजाई जाती है और ट्युबुलर घंटियों द्वारा चाइम्‍स बजाई जाती हैं, जो काफ़ी दूरी पर रखी होती हैं और इससे एक मनमोहक दृश्‍य बनता है। इसके बाद रिट्रीट का बिगुल वादन होता है, जब बैंड मास्‍टर राष्ट्रपति के समीप जाते हैं और बैंड वापिस ले जाने की अनुमति मांगते हैं। तब सूचित किया जाता है कि समापन समारोह पूरा हो गया है। बैंड मार्च वापस जाते समय लोकप्रिय धुन सारे जहाँ से अच्‍छा बजाते हैं। ठीक शाम 6 बजे बगलर्स रिट्रीट की धुन बजाते हैं और राष्‍ट्रीय ध्‍वज को उतार लिया जाता हैं तथा राष्‍ट्रगान गाया जाता है और इस प्रकार गणतंत्र दिवस के आयोजन का औपचारिक समापन होता हैं।[3]

गणतंत्र दिवस से जुड़े कुछ मत्त्वपूर्ण जानकारी :

पूर्ण स्वराज दिवस (26 जनवरी 1930) को ध्यान में रखते हुए भारतीय संविधान 26 जनवरी को लागू किया गया था।
26 जनवरी 1950 को 10.18 मिनट पर भारत का संविधान लागू किया गया।
गणतंत्र दिवस की पहली परेड 1955 को दिल्ली के राजपथ पर हुई थी।
भारतीय संविधान की दो प्रत्तियां जो हिन्दी और अंग्रेजी में हाथ से लिखी गई।
भारतीय संविधान की हाथ से लिखी मूल प्रतियां संसद भवन के पुस्तकालय में सुरक्षित रखी हुई हैं।
भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने गवर्नमैंट हाऊस में 26 जनवरी 1950 को शपथ ली थी।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं और हर साल 21 तोपों की सलामी दी जाती है।
29 जनवरी को विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का आयोजन किया जाता है जिसमें भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के बैंड हिस्सा लेते हैं। यह दिन गणतंत्र दिवस के समारोह के समापन के रूप में मनाया जाता है।
गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री अमर ज्योति पर शहीदों को श्रद्धाजंलि देते हैं जिन्होंने देश के आजादी में बलिदान दिया।

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गणतंतरा दिवस Republic Day Poems 26 January 2017 Essay निबन्ध, Speech In Hindi and English and Wishes For Schools

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Happy Republic Day 26 January रिपब्लिक दे Poems 2017 In English

Republic Day Is A Day To Remember,When A Thought Of Freedom Was Born,Don’t Just Take It As A National Holiday.Try Something New To Improve Our Country.Have A Happy Republic Day Share it with Your Friends!!!

-Where the mind is without fear
and the head is held high;
Where knowledge is free;
Where the world has not been
broken up into fragments by
narrow domestic walls;
Where words come out from
the depth of truth;
Where tireless striving stretches
its arms towards perfection;
Where the clear stream of reason
has not lost its way into the dreary
desert sand of dead habit;
Where the mind is lead forward by thee
into ever-widening thought and action-
Into that heaven of freedom, my Father,
let my country awake.”!!!

Republic Day Poems 26 January 2017 In Hindi गणतंतरा दिवस Poetry

गणतंत्र दिवस फिर आया है

26 जनवरी से बंद होंगे टेम्पो
गीली ओंस बूंद
कोमल सर्दी की गुलाबी ठिठुरन
गणतंत्र दिवस फुटबॉल स्पर्धा
पूरे चांद की आधी रात
आज नई सज-धज से
गणतंत्र दिवस फिर आया है।
नव परिधान बसंती रंग का
माता ने पहनाया है।

भीड़ बढ़ी स्वागत करने को
बादल झड़ी लगाते हैं।
रंग-बिरंगे फूलों में
ऋतुराज खड़े मुस्काते हैं।

धरनी मां ने धानी साड़ी
पहन श्रृंगार सजाया है।
गणतंत्र दिवस फिर आया है।

भारत की इस अखंडता को
तिलभर आंच न आने पाए।
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई
मिलजुल इसकी शान बढ़ाएं।

युवा वर्ग सक्षम हाथों से
आगे इसको सदा बढ़ाएं।
इसकी रक्षा में वीरों ने
अपना रक्त बहाया है।
गणतंत्र दिवस फिर आया है।

गणतंत्र दिवस की शायरी

भारत के गणतंत्र का, सारे जग में मान;
दशकों से खिल रही, उसकी अद्भुत शान;
सब धर्मों को देकर मान रचा गया इतिहास;
इसीलिए हर देशवासी को इसमें है विश्वास।
गणतंत्र दिवस की बधाई !

असली गणतंत्र तभी बनता है जब संविधान कागज से निकलकर आम लोंगो के जिंदगी में शामिल हो जाये।
ओ कुछ ऐसा कर दिखाएँ कि सब को हम पर मान हो जाये।
गणतंत्र दिवस की हार्दीक शुभ कामनायें!

जो घर्म पे मर मिटा, बस वही महान है,
कारगिल का हर जवान, कारगिल का हर जवान,
देवता समान है |
धन्य हुई वह माटी भी, धन्य हुई वह माटी भी,
जिसपर तुमने जन्म लिया,
शीर्ष झुकाये उस माता को, शीर्ष झुकाये उस माता को,
जिसने तुम्हें जन्म दिया |
सीने पर गोली खा,सीने पर गोली खा,
हस्ते-हस्ते मरने वाले, तुझे प्रणाम,
कारगिल में लड़ने वाले
कारगिल में लड़ने वाले, तुझे प्रणाम |
कृतज्ञ राष्ट्र का, कृतज्ञ राष्ट्र का,
तुझे प्रणाम |

माह जनवरी छब्बीस को हम
सब गणतंत्र मनाते |
और तिरंगे को फहरा कर,
गीत ख़ुशी के गाते ||

संविधान आजादी वाला,
बच्चो ! इस दिन आया |
इसने दुनिया में भारत को,
नव गणतंत्र बनाया ||

क्या करना है और नही क्या ?
संविधान बतलाता |
भारत में रहने वालों का,
इससे गहरा नाता ||

यह अधिकार हमें देता है,
उन्नति करने वाला |
ऊँच-नीच का भेद न करता,
पण्डित हो या लाला ||

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
सब हैं भाई-भाई |
सबसे पहले संविधान ने,
बात यही बतलाई ||

इसके बाद बतायी बातें,
जन-जन के हित वाली |
पढ़ने में ये सब लगती हैं,
बातें बड़ी निराली ||

लेकर शिक्षा कहीं, कभी भी,
ऊँचे पद पा सकते |
और बढ़ा व्यापार नियम से,
दुनिया में छा सकते ||

देश हमारा, रहें कहीं हम,
काम सभी कर सकते |
पंचायत से एम.पी. तक का,
हम चुनाव लड़ सकते ||

लेकर सत्ता संविधान से,
शक्तिमान हो सकते |
और देश की इस धरती पर,
जो चाहे कर सकते ||

लेकिन संविधान को पढ़कर,
मानवता को जाने |
अधिकारों के साथ जुड़ें,
कर्तव्यों को पहचानो ||

राष्ट्र के लिए मान-सम्मान रहे,
हर एक दिल में हिन्दुस्तान रहे,
देश के लिए एक-दो तारीख नही,
भारत माँ के लिए ही हर सांस रहे।
गणतंत्र दिवस की बधाई!

अलग है भाषा, धर्म जात और प्रांत,
पर हम सब का एक है गौरव राष्ट्रध्वज तिरंगा श्रेष्ठ।
सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई!

ना पूछो ज़माने से कि क्या हमारी कहानी है,
हमारी पहचान तो बस इतनी है कि हम सब हिन्दुस्तानी हैं।
गणतंत्र दिवस की बधाई !

ताज़गी महसूस करना हो कभी जो छाँव की!
एड़ियाँ मज़दूर की ख़ुद आइना हैं पाँव की!
जब कभी तूफ़ान में कोई भी ज़रिया न दिखे!
आख़री उम्मीदें दुनियाँ है फ़क़त एक नाँव की!
ख़ुशनसीबी मुल्क की जब देखने का दिल करे!
दिल के अंदर से अजब आवाज़ है फिर गाँव की!
शोर संसद की दीवारों से निकल कर उड़ गया!
आज भी कानों में रहती है सदा बस काँव की !
गणतंत्र दिवस की बधाई !

26 जनवरी मेसेज SMS

हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई हर धर्म की रक्षा की है;
सभी वर्ग के लोगों को सम्मान देने की प्रतिज्ञा की है;
ऐसा सशक्त और मज़बूत लोकतंत्र किया तैयार;
जिसकी हर देशवासी ने दिल से इच्छा की है।
गणतंत्र दिवस की बधाई !

चलो फिर से खुद को जगाते हैं;
अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं;
याद करें उन शूरवीरों को क़ुरबानी;
जिनके कारण हम इस लोकतंत्र का आनंद उठाते हैं।
गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं!

गणतंत्र दिवस पर कविता Desh Bhakti Poems

गर्व है हमे हिंदुस्तान पे
आज़ाद है हम हिंदुस्तान में
जाने कितने हुए घायल कितने हुए शहीद
मर मिटे कितने देश के सेनानी
हुई जाने कितनी माओ का गोद सुनी
बहन थी खड़ी हांथ में लिए राखी
जाने कितने भाइयों की कलाई रह गई सुनी
हटा कर चुन्नी ओढ़ी कितनो ने सफ़ेद साड़ी
अपने सपुत के खून से धरती माँ का सीना हुआ लहू लुहान
सीने में दौरती रही सबके दिलो आज़ादी की चिंगारी
बहुत चला था आंधी बहुत से थे तूफ़ान
गिरते रहे संभलते रहे फिर पा ली हमने आज़ादी

Republic Day Hindi Kavita

गर्व है हमे हिंदुस्तान पे
आज़ाद है हम हिंदुस्तान में
जाने कितने हुए घायल कितने हुए शहीद
मर मिटे कितने देश के सेनानी
हुई जाने कितनी माओ का गोद सुनी
बहन थी खड़ी हांथ में लिए राखी
जाने कितने भाइयों की कलाई रह गई सुनी
हटा कर चुन्नी ओढ़ी कितनो ने सफ़ेद साड़ी
अपने सपुत के खून से धरती माँ का सीना हुआ लहू लुहान
सीने में दौरती रही सबके दिलो आज़ादी की चिंगारी
बहुत चला था आंधी बहुत से थे तूफ़ान
गिरते रहे संभलते रहे फिर पा ली हमने आज़ादी

Republic Day Hindi Poem

भारत के गणतंत्र का, सारे जग में मान-
दशकों से खिल रही, उसकी अद्भुत शान,
सब धर्मों को देकर मान रचा गया इतिहास,
इसीलिए हर देशवासी को इसमें है विश्वास,
गणतंत्र दिवस की बधाई!
गणतंत्र दिवस
असली गणतंत्र तभी बनता है जब संविधान कागज से निकलकर आम लोंगो के जिंदगी में शामिल हो जाये।
आओ कुछ ऐसा कर दिखाएँ कि सब को हम पर मान हो जाये।
गणतंत्र दिवस की हार्दीक शुभ कामनायें!
गणतंत्र दिवस
ना पूछो ज़माने से कि क्या हमारी कहानी है,
हमारी पहचान तो बस इतनी है कि हम सब हिन्दुस्तानी हैं।
गणतंत्र दिवस की बधाई!
गणतंत्र दिवस
राष्ट्र के लिए मान-सम्मान रहे,
हर एक दिल में हिन्दुस्तान रहे,
देश के लिए एक-दो तारीख नही,
भारत माँ के लिए ही हर सांस रहे।
गणतंत्र दिवस की बधाई!
गणतंत्र दिवस
अलग है भाषा, धर्म जात और प्रांत,
पर हम सब का एक है गौरव राष्ट्रध्वज तिरंगा श्रेष्ठ।
सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई!
गणतंत्र दिवस
संस्कार, संस्कृति और शान मिले;
ऐसे हिन्दू, मुस्लिम और हिंदुस्तान मिले;
रहे हम सब ऐसे मिल-झुल कर;
मंदिर में अल्लाह और मस्जिद में भगवान मिले।
गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।
गणतंत्र दिवस
हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई हर धर्म की रक्षा की है;
सभी वर्ग के लोगों को सम्मान देने की प्रतिज्ञा की है;
ऐसा सशक्त और मज़बूत लोकतंत्र किया तैयार;
जिसकी हर देशवासी ने दिल से इच्छा की है।
गणतंत्र दिवस की बधाई!
गणतंत्र दिवस
चलो फिर से खुद को जगाते हैं;
अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं;
याद करें उन शूरवीरों को क़ुरबानी;
जिनके कारण हम इस लोकतंत्र का आनंद उठाते हैं।
गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं!
गणतंत्र दिवस
देश भक्तों के बलिदान से, स्वतंत्र हुए हैं हम;
कोई पूछे कौन हो, तो गर्व से कहेंगे, भारतीय हैं हम।
गणतंत्र दिवस मुबारक!
गणतंत्र दिवस
भारत के गणतंत्र का, सारे जग में मान;
दशकों से खिल रही, उसकी अद्भुत शान;
सब धर्मों को देकर मान रचा गया इतिहास;
इसीलिए हर देशवासी को इसमें है विश्वास।
गणतंत्र दिवस की बधाई!

ना पूछो ज़माने से कि क्या हमारी कहानी है,
हमारी पहचान तो बस इतनी है कि हम सब हिन्दुस्तानी हैं।
गणतंत्र दिवस की बधाई !

अलग है भाषा, धर्म जात और प्रांत,
पर हम सब का एक है गौरव राष्ट्रध्वज तिरंगा श्रेष्ठ।
सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई!
यह भी देखें: दिल छूने वाली शायरी

Republic Day Hindi shayri

राष्ट्र के लिए मान-सम्मान रहे,
हर एक दिल में हिन्दुस्तान रहे,
देश के लिए एक-दो तारीख नही,
भारत माँ के लिए ही हर सांस रहे।
गणतंत्र दिवस की बधाई!

ताज़गी महसूस करना हो कभी जो छाँव की!
एड़ियाँ मज़दूर की ख़ुद आइना हैं पाँव की!
जब कभी तूफ़ान में कोई भी ज़रिया न दिखे!
आख़री उम्मीदें दुनियाँ है फ़क़त एक नाँव की!
ख़ुशनसीबी मुल्क की जब देखने का दिल करे!

गणतन्त्र दिवस बधाई सन्देश

चलो ये माना थोड़ा गम है, पर किसको न होता है,
जब रातें जगने लगती हैं, तभी सवेरा सोता है,
जो अधिकारों पर बैठे हैं, वह उनका अधिकार ही है,
फसल काटता है कोई, और कोई उसको बोता है।

क्यों तू जीवन जटिल चक्र की, इस उलझन में फँसता है,
जब तेरी गोदी में बिजली कौंध-कौंध मुस्काती है।

कल फिर तू क्यों, पेट बाँधकर सोया था, मैं सुनता हूँ,
जब तेरे खेतों की बाली, लहर-लहर इतराती है।

अगर बात करनी है उनको, काश्मीर पर करने दो,
अजय अहूजा, अधिकारी, नय्यर, जब्बर को मरने दो,
वो समझौता ए लाहौरी, याद नहीं कर पाएँगे,
भूल कारगिल की गद्दारी, नई मित्रता गढ़ने दो,

ऐसी अटल अवस्था में भी, कल क्यों पल-पल टलता है,
जब मीठी परवेज़ी गोली, गीत सुना बहलाती है।

विश्व में नाम था नाम रहेगा भारत का सदा सम्मान रहेगा .
जिन शहीदों ने जान लुटाई उनका लबों पर नाम रहेगा .
परचम हमारा प्यारा तिरंगा दुनिया में ऊंचा निशान रहेगा
फौजी हमारे है वीर सिपाही देश इनके हाथों महफूज़ रहेगा

भारत के गणतंत्र का, सारे जग में मान;
दशकों से खिल रही, उसकी अद्भुत शान;
सब धर्मों को देकर मान रचा गया इतिहास;
इसीलिए हर देशवासी को इसमें है विश्वास।
गणतंत्र दिवस की बधाई !

गणतंत्र दिवस पर कविता

गणतंत्र दिवस कविता अपने भावों की अभियक्ति का एक माध्यम है। गणतंत्र दिवस भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उत्सवों में से एक हैं, जो अपने आप में बहुत सी विशेषताएं लिये हुये है। इस दिन सभी अपनी भावनाओं को कविता, भाषण, या व्याख्यान के माध्यम से करते हैं। इस अवसर को और खास बनाने के लिये हम गणतंत्र दिवस पर कविताएं उपलब्ध करा रहे हैं।

आओ तिरंगा फहराये
आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये;
अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।
अपना 67वाँ गणतंत्र दिवस खुशी से मनायेगे;
देश पर कुर्बान हुये शहीदों पर श्रद्धा सुमन चढ़ायेंगे।
26 जनवरी 1950 को अपना गणतंत्र लागू हुआ था,
भारत के पहले राष्ट्रपति, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने झंड़ा फहराया था,
मुख्य अतिथि के रुप में सुकारनो को बुलाया था,
थे जो इंडोनेशियन राष्ट्रपति, भारत के भी थे हितैषी,
था वो ऐतिहासिक पल हमारा, जिससे गौरवान्वित था भारत सारा।
विश्व के सबसे बड़े संविधान का खिताब हमने पाया है,
पूरे विश्व में लोकतंत्र का डंका हमने बजाया है।
इसमें बताये नियमों को अपने जीवन में अपनाये,
थाम एक दूसरे का हाथ आगे-आगे कदम बढ़ाये,
आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये,
अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।

देखो 26 जनवरी आयी

देखो 26 जनवरी है आयी, गणतंत्र की सौगात है लायी।
अधिकार दिये हैं इसने अनमोल, जीवन में बढ़ सके बिन अवरोध।
हर साल 26 जनवरी को होता है वार्षिक आयोजन,
लाला किले पर होता है जब प्रधानमंत्री का भाषन,
नयी उम्मीद और नये पैगाम से, करते है देश का अभिभादन,
अमर जवान ज्योति, इंडिया गेट पर अर्पित करते श्रद्धा सुमन,
2 मिनट के मौन धारण से होता शहीदों को शत-शत नमन।
सौगातो की सौगात है, गणतंत्र हमारा महान है,
आकार में विशाल है, हर सवाल का जवाब है,
संविधान इसका संचालक है, हम सब का वो पालक है,
लोकतंत्र जिसकी पहचान है, हम सबकी ये शान है,
गणतंत्र हमारा महान है, गणतंत्र हमारा महान है।

गणतंत्र भारत का निर्माण

हम गणतंत्र भारत के निवासी, करते अपनी मनमानी।
दुनिया की कोई फिक्र नहीं, संविधान है करता पहरेदारी।।
है इतिहास इसका बहुत पुराना, संघर्षों का था वो जमाना;
न थी कुछ करने की आजादी, चारों तरफ हो रही थी बस देश की बर्बादी,
एक तरफ विदेशी हमलों की मार,
दूसरी तरफ दे रहे थे कुछ अपने ही अपनो को घात,
पर आजादी के परवानों ने हार नहीं मानी थी,
विदेशियों से देश को आजाद कराने की जिद्द ठानी थी,
एक के एक बाद किये विदेशी शासकों पर घात,
छोड़ दी अपनी जान की परवाह, बस आजाद होने की थी आखिरी आस।

1857 की क्रान्ति आजादी के संघर्ष की पहली कहानी थी,
जो मेरठ, कानपुर, बरेली, झांसी, दिल्ली और अवध में लगी चिंगारी थी,
जिसकी नायिका झांसी की रानी आजादी की दिवानी थी,
देश भक्ति के रंग में रंगी वो एक मस्तानी थी,
जिसने देश हित के लिये स्वंय को बलिदान करने की ठानी थी,
उसके साहस और संगठन के नेतृत्व ने अंग्रेजों की नींद उड़ायी थी,
हरा दिया उसे षडयंत्र रचकर, कूटनीति का भंयकर जाल बुनकर,
मर गयी वो पर मरकर भी अमर हो गयी,
अपने बलिदान के बाद भी अंग्रेजों में खौफ छोड़ गयी,
उसकी शहादत ने हजारों देशवासियों को नींद से उठाया था,
अंग्रेजी शासन के खिलाफ एक नयी सेना के निर्माण को बढ़ाया था,
फिर तो शुरु हो गया अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का सिलसिला,
एक के बाद एक बनता गया वीरों का काफिला,
वो वीर मौत के खौफ से न भय खाते थे,
अंग्रेजों को सीधे मैदान में धूल चटाते थे,
ईट का जवाब पत्थर से देना उनको आता था,
अंग्रेजों के बुने हुये जाल में उन्हीं को फसाना बखूबी आता था,
खोल दिया अंग्रेजों से संघर्ष का दो तरफा मोर्चा,
1885 में कर डाली कांग्रेस की स्थापना,
लाला लाजपत राय, तिलक और विपिन चन्द्र पाल,
घोष, बोस जैसे अध्यक्षों ने की जिसकी अध्यक्षता,
इन देशभक्तों ने अपनी चतुराई से अंग्रेजों को राजनीति में उलझाया था,
उन्हीं के दाव-पेचों से अपनी माँगों को मनवाया था,
सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग को गाँधी ने अपनाया था,
कांग्रेस के माध्यम से ही उन्होंने जन समर्थन जुटाया था,
दूसरी तरफ क्रान्तिकारियों ने भी अपना मोर्चा लगाया था,
बिस्मिल, अशफाक, आजाद, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु जैसे,
क्रान्तिकारियों से देशवासियों का परिचय कराया था,
अपना सर्वस्व इन्होंने देश पर लुटाया था,
तब जाकर 1947 में हमने आजादी को पाया था,
एक बहुत बड़ी कीमत चुकायी है हमने इस आजादी की खातिर,
न जाने कितने वीरों ने जान गवाई थी देश प्रेम की खातिर,
निभा गये वो अपना फर्ज देकर अपनी जाने,
निभाये हम भी अपना फर्ज आओ आजादी को पहचाने,
देश प्रेम में डूबे वो, न हिन्दू, न मुस्लिम थे,
वो भारत के वासी भारत माँ के बेटे थे,
उन्हीं की तरह देश की शरहद पर हरेक सैनिक अपना फर्ज निभाता है,
कर्तव्य के रास्ते पर खुद को शहीद कर जाता है,
आओ हम भी देश के सभ्य नागरिक बने,
हिन्दू, मुस्लिम, सब छोड़कर, मिलजुलकर आगे बढ़े,
जातिवाद, क्षेत्रवाद, आतंकवाद, ये देश में फैली बुराई है,
जिन्हें किसी और ने नहीं देश के नेताओं ने फैलाई है
अपनी कमियों को छिपाने को देश को भ्रमाया है,
जातिवाद के चक्र में हम सब को उलझाया है,
अभी समय है इस भ्रम को तोड़ जाने का,
सबकुछ छोड़ भारतीय बन देश विकास को करने का,
यदि फसे रहे जातिवाद में, तो पिछड़कर रह जायेंगे संसार में,
अभी समय है उठ जाओं वरना पछताते रह जाओगें,
समय निकल जाने पर हाथ मलते रह जाओगे,
भेदभाव को पीछे छोड़ सब हिन्दुस्तानी बन जाये,
इस गणतंत्र दिवस पर मिलजुलकर तिरंगा लहराये।।

Agar Bharat Ko Hai Mahan Banana…
To Bhrashta Netayo Ko Hoga Hatana…
Aur Bhrashtachar Ko Hoga Mitana…
Ye Kisi Ek Se Na Hoga…
Pure Jansamuday Ko Hoga Sath Nibhana…
Jai Hind…
Vande Mataram….
Kyun marte ho yaro snam ke liye,Na degi duppta kfan ke liye,Marna hai to maro VATAN ke liye,TIRANGA to mile ga kfan ke liye.Jai HindHappy Republic day!!!

Kaas Koi Ham Se Puch Leta Ke Tum Bhi Pyar Karte HoDil Me Koi Muhabbat He Ke Ase Hi Aah Bhrte HoKasam Se Ham Unhe Kewal Sach Hi BatateJo Puch Lete WoHamare Dil Me Kewal Watan Basa He,Ashiyana Deta He Jo.!!!

Happy Republic Day Essay निबन्ध 26 January 2017 For Students

Republic Day of India

India is the world’s biggest democratic nation. Though India got freedom against British rule on 15th of August 1947, but till 1950 we do not have our own law and order to follow. The 26th of January 1950, was the dawn of world’s biggest democracy, when we got our own constitution and India became a republic nation. From then on, this day has been declared as a national festival of India and we celebrate this day as Republic Day of India. The word republic means a country that is ruled by people, elected by the the people of that nation.

Today we have completed 63 years with our own constitution and proud to be a part of the world’s biggest democracy. This is our privilege that we are the citizens of a secular nation. Our constitution provides us freedom to travel anywhere in India, freedom to adopt any religion we like to follow, we can arrange public meeting; we can express and share our thoughts etc. Being a citizen of a democratic nation, we not only have many rights but also many responsibilities to carry out.

Republic day celebration On 26th January of every year, we celebrate our Republic day. This is India’s national festival and also declared as national holiday. On the eve of Republic day, cultural programmes are arranged in school, colleges and different public places. Political and social meeting also arranged for considering social and national issues. National flag is furled not only at government offices but also at public places. National anthem beats inspire the countrymen with feelings of patriotism.

The main attraction of Republic day is the special Republic day parade taken out at Rajpath, in front of India gate in our capital Delhi. Early in the morning people from all over India, start to gather at Rajpath to watch this parade. People, who can’t go there, watch it on television. Some foreign ministers are also invited as chief guests on this occasion. Indian Prime minister with other ministers and chiefs of armed forces also arrive at Rajpath. With the arrival of Indian President and foreign chief guest, the national flag furls sky high.

The bravery awards are distributed to brave soldiers, martyrs, brave citizens and brave children. Brave children are brought by elephants on this occasion. After this Republic day parade starts with the flag march of all Indian forces. Indian president takes the salute of all Indian armed forces. Armed strength of the country has been shown in this parade. Tableau from many states of India and Union territories, are the center of attraction for everyone on this occasion. The Rashtrapati Bhawan and important government buildings are decorated with light in the evening.

How we should celebrate this festival? This is the festival of proud for our nation. Every countryman should participate in this occasion. We should also remember our freedom fighters on this day. This is an occasion of patriotism, unity; peace, love, proud, happiness and inspiration. We should make some principle on this occasion and try to be loyal to our duties and nation.

Republic Day 26 January 2017 Essays गणतंतरा दिवस In Hindi निबन्ध

राष्ट्रीय पर्व भारत की आजादी 15 अगस्‍त 1947 के बाद कई बार संशोधन करने के पश्चात भारतीय संविधान को अंतिम रूप दिया गया जो 3 वर्ष बाद यानी 26 नवंबर 1950 को आधिकारिक रूप से अपनाया गया। तब से 26 जनवरी को हम गणतंत्र दिवस मनाते आ रहे हैं। इस बार हम 67वाँ गणतंत्र दिवस मनाएँगे।

भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और इस दौरान लोगों में लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति असंतोष भी व्याप्त होता गया। असंतोष का कारण भ्रष्ट शासन और प्रशासन तथा राजनीति का अपराधिकरण रहा। भारत में बहुत से ऐसे व्यक्ति और संगठन हैं जो भारतीय संविधान के प्रति श्रद्धा नहीं रखते।

व्यर्थ है असंतोष : इस अश्रद्धा का कारण हमारा संविधान नहीं है। माओवादी जैसे पूर्वोत्तर के अन्य संगठन आज भी यदि सक्रिय है तो कारण सिर्फ इतना है कि भ्रष्ट गैर जिम्मेदार राजनीतिज्ञों और अपराधियों के चलते उनका लोकतंत्र से विश्वास उठ गया। लेकिन समझने वाली बात यह है कि लादी गई व्यस्था और तानाशाह कभी दुनिया में ज्यादा समय तक नहीं चल पाया। माना कि लोकतंत्र की कई खामियाँ होती है, लेकिन तानाशाही या धार्मिक कानून की व्यवस्था व्यक्ति स्वतंत्रता का अधिकार छीन लेती है, यह हमने देखा है। जर्मन और अफगानिस्तान में क्या हुआ सभी जानते हैं। सोवियत संघ क्यों बिखर गया यह भी कहने की बात नहीं है। भविष्य में देखेंगे आप चीन को बिखरते हुए।

लोकतंत्र को परिपक्व होने दें : हमें विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने का गर्व है। हमारा लोकतंत्र धीरे-धीरे परिपक्व हो रहा है। हम पहले से कहीं ज्यादा समझदार होते जा रहे हैं। धीरे-धीरे हमें लोकतंत्र की अहमियत समझ में आने लगी है। सिर्फ लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही व्यक्ति खुलकर जी सकता है। स्वयं के व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और अपनी सभी महत्वाकांक्षाएँ पूरी कर सकता है। जो लोग यह सोचते हैं कि इस देश में तानाशाही होना या कट्टर धार्मिक नियम होने चाहिए वे यह नहीं जानते कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में क्या हुआ। वहाँ की जनता अब खुलकर जीने के लिए तरस रही है। ये सिर्फ नाम मात्र के देश हैं।

लोकतंत्र बनेगा गुणतंत्र : हमारा समाज परिवर्तित हो रहा है। मीडिया जाग्रत हो रही है। जनता भी जाग रही है। युवा सोच का विकास हो रहा है। शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है। टेक्नोलॉजी संबंधी लोगों की फौज बढ़ रही है। इस सबके चलते अब देश का राजनीतिज्ञ भी सतर्क हो गया है। ज्यादा समय तक शासन और प्रशासन में भ्रष्टाचार, अपराध और अयोग्यता नहीं चल पाएगी तो हमारे भविष्य का गणतंत्र गुणतंत्र पर आधारित होगा, इसीलिए कहो….गणतंत्र की जय हो।

गणतंत्र दिवसभारत में ‘गणतंत्र दिवस’ 26 जनवरी को मनाया जाता है। 1950 में 26 जनवरी को भारत में नया संविधान, भारत का संविधान लागू हुआ था।

गणतंत्र दिवस भारत में मनाये जाने वाली तीन राष्ट्रीय छुट्टियों में से एक है। इस दिन नई दिल्ली में विशेष परेड का आयोजन किया जाता है। राष्ट्रपति परेड क़ी सलामी लेते हैं। राजपथ पर परेड का भव्य आयोजन होता है। भारतीय सेना क़ी तीनों विंग इसमें हिस्सा लेती हैं।

देश के सभी राज्यों क़ी राजधानियों में झंडा रोहण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। सभी सरकारी, अर्द्ध-सरकारी, निगम एवं प्रशासनिक कार्यालयों में झंडारोहण का कार्यक्रम होता है। स्कूल एवं कालेजों में विभिन्न कार्यक्रम, खेल-कूद एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन भी होता है तथा विजेताओं को सम्मानित किया जाता है।

26 Jan Republic Day रिपब्लिक दे Speech In English Wishes for School Children’s

Good morning to all. My name is…… I read in class….. As we all know that we have gathered here on the very special occasion of our nation called as Republic Day of India. I would like to narrate a Republic Day speech in front of you. First of all I would like to say a lot of thank to my class teacher as just because of her I have got such a wonderful opportunity in my school to come on this stage and speak something about my beloved country on its great occasion of Republic day. India is a self-governing country since 15th of August 1947. India got independence from the British rule on 15th of August in 1947 which we celebrate as Independence Day, However, on 26th of January since 1950 we celebrate as Republic Day. The Constitution of India came into force on 26th of January in 1950, so we celebrate this day as the Republic Day every year. This year in 2016, we are celebrating 67th republic day of India. Republic means the supreme power of the people living in the country and only public has rights to elect their representatives as political leader to lead the country in right direction. So, India is a Republic country where public elects its leaders as a president, prime minister, etc. Our Great Indian freedom fighters have struggled a lot to the “Purna Swaraj” in India. They did so that their future generations may live without struggle and led country ahead. The name of our great Indian leaders and freedom fighters are Mahatma Gandhi, Bhagat Singh, Chandra Shekher Ajad, Lala Lajpath Rai, Sardar Ballabh Bhai Patel, Lal bahadur Shastri, etc. They fought continuously against the British rule to make India a free country. We can never forget their sacrifices towards our country. We should remember them on such great occasions and salute them. It has become possible just because of them that we can think from our own mind and live freely in our nation without anyone’s force. Our first Indian President was Dr. Rajendra Prasad who said that, “We find the whole of this vast land brought together under the jurisdiction of one constitution and one union which takes over responsibility for the welfare of more than 320 million men and women inhabit it”. How shame to say that still we are fighting with crime, corruption and violence (in the form of terrorist, rape, theft, riots, strikes, etc) in our country. Again, there is a need to get together to save our country from such slavery as it is pulling our nation back from going to its main stream of development and progress. We should be aware of our social issues like Poverty, unemployment, illiteracy, global warming, inequality, etc in order to solve them to go ahead. Dr. Abdul Kalam has said that “If a country is to be corruption free and become a nation of beautiful minds, I strongly feel there are three key societal members who can make a difference. They are the Father, the Mother and the Teacher”. As a citizen of the country we should think seriously about it and do all possible efforts to lead our nation.Thanks, Jai Hind.

Happy 26 Jan 2017 Speech In Hindi Republic Day स्पीच For Class Students

भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और इस दौरान लोगों में लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति असंतोष भी व्याप्त होता गया। असंतोष का कारण भ्रष्ट शासन और प्रशासन तथा राजनीति का अपराधिकरण रहा। भारत में बहुत से ऐसे व्यक्ति और संगठन हैं जो भारतीय संविधान के प्रति श्रद्धा नहीं रखते। व्यर्थ है असंतोष : इस अश्रद्धा का कारण हमारा संविधान नहीं है। माओवादी जैसे पूर्वोत्तर के अन्य संगठन आज भी यदि सक्रिय है तो कारण सिर्फ इतना है कि भ्रष्ट गैर जिम्मेदार राजनीतिज्ञों और अपराधियों के चलते उनका लोकतंत्र से विश्वास उठ गया। लेकिन समझने वाली बात यह है कि लादी गई व्यस्था और तानाशाह कभी दुनिया में ज्यादा समय तक नहीं चल पाया। माना कि लोकतंत्र की कई खामियाँ होती है, लेकिन तानाशाही या धार्मिक कानून की व्यवस्था व्यक्ति स्वतंत्रता का अधिकार छीन लेती है, यह हमने देखा है। जर्मन और अफगानिस्तान में क्या हुआ सभी जानते हैं। सोवियत संघ क्यों बिखर गया यह भी कहने की बात नहीं है। भविष्य में देखेंगे आप चीन को बिखरते हुए। लोकतंत्र को परिपक्व होने दें : हमें विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने का गर्व है। हमारा लोकतंत्र धीरे-धीरे परिपक्व हो रहा है। हम पहले से कहीं ज्यादा समझदार होते जा रहे हैं। धीरे-धीरे हमें लोकतंत्र की अहमियत समझ में आने लगी है। सिर्फ लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही व्यक्ति खुलकर जी सकता है। स्वयं के व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और अपनी सभी महत्वाकांक्षाएँ पूरी कर सकता है। जो लोग यह सोचते हैं कि इस देश में तानाशाही होना या कट्टर धार्मिक नियम होने चाहिए वे यह नहीं जानते कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में क्या हुआ। वहाँ की जनता अब खुलकर जीने के लिए तरस रही है। ये सिर्फ नाम मात्र के देश हैं। लोकतंत्र बनेगा गुणतंत्र : हमारा समाज परिवर्तित हो रहा है। मीडिया जाग्रत हो रही है। जनता भी जाग रही है। युवा सोच का विकास हो रहा है। शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है। टेक्नोलॉजी संबंधी लोगों की फौज बढ़ रही है। इस सबके चलते अब देश का राजनीतिज्ञ भी सतर्क हो गया है। ज्यादा समय तक शासन और प्रशासन में भ्रष्टाचार, अपराध और अयोग्यता नहीं चल पाएगी तो हमारे भविष्य का गणतंत्र गुणतंत्र पर आधारित होगा, इसीलिए कहो….गणतंत्र की जय हो। (वेबदुनिया डेस्क)

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गणतंत्र दिवस 26 जनवरी  का खास नोट

पहले गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के इर्विन स्टेडियम में झंडा फहराया गया था।
पूर्ण स्वराज दिवस (26 जनवरी 1930) को ध्यान में रखते हुए भारतीय संविधान 26 जनवरी को लागू किया गया था।
आईएसटी के अनुसार 26 जनवरी 1950 को 10.18 मिनट पर भारत का संविधान लागू किया गया।
भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने गवर्नमैंट हाऊस में 26 जनवरी 1950 को शपथ ली थी।
गणतंत्र दिवस की पहली परेड 1955 को दिल्ली के राजपथ पर हुई थी।
राजपथ परेड के पहले मुख्य अतिथि पाकस्तिान के गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद थे।
मोर को भारत का राष्ट्रीय पक्षी 26 जनवरी 1963 को घोषित किया गया था।
1950 से 1954 के बीच गणतंत्र दिवस का समारोह इर्विन स्टेडियम किंग्सवे, लाल किला तो कभी रामलीला मैदान में हुआ करता था।
26 जनवरी को ही सारनाथ के अशोक स्तंभ पर बने सिंह को राष्टरीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया था।
रिपब्लिक डे परेड 1950 को पहले चीफ इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति ‘सुकर्णो’ थे।

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भारतीय गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथियों की सूची:

वर्ष पद और मुख्य अतिथि का नाम सम्बंधित देश
2017 क्राउन प्रिंस, शेख मोहमद बिन ज़ायेद अल नाह्यान अबु धाबी
2016 राष्ट्रपति, फ्रांस्वा ओलांद फ्राँस
2015 राष्ट्रपति, बराक ओबामा यूएसए
2014 प्रधानमंत्री, शिंजों आबे जापान
2013 राजा, जिग्मे केसर नामग्याल वाँगचुक भूटान
2012 प्रधानमंत्री, यिंगलुक शिनवात्रा थाईलैंड
2011 राष्ट्रपति, सुसीलो बमबंग युद्धोयुनो इंडोनेशिया
2010 राष्ट्रपति, ली म्यूंग बक कोरिया गणराज्य
2009 राष्ट्रपति, नूरसुलतान नजरबयेव कज़ाकिस्तान
2008 राष्ट्रपति, निकोलस सरकोजी फ्रांस
2007 राष्ट्रपति, व्लादिमीर पुतिन रुस
2006 राजा, अब्दुल्ला बिन अब्दुल्लाजिज़ अल-सऊद सऊदी अरेबिया
2005 राजा, जिग्मे सिंघे वाँगचुक भूटान
2004 राष्ट्पति, लूइज़ इनैसियो लूला दा सिल्वा ब्राजील
2003 राष्ट्पति, मोहम्मदम खतामी इरान
2002 राष्ट्पति, कसाम उतीम मॉरीशस
2001 राष्ट्पति, अब्देलाज़िज बुटेफ्लिका अलजीरीया
2000 राष्ट्पति, ओलूसेगुन ओबाझाँजो नाइजीरिया
1999 राजा बिरेन्द्र बीर बिक्रम शाह देव नेपाल
1998 राष्ट्रपति, जैक्स चिराक फ्रांस
1997 प्रधानमंत्री, बासदियो पांडेय त्रिनीनाद और टोबैगो
1996 राष्ट्रपति, डॉ फरनॉनडो हेनरिक कारडोसो ब्राजील
1995 राष्ट्रपति, नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रिका
1994 प्रधानमंत्री, गोह चोक टोंग सिंगापुर
1993 प्रधानमंत्री, जॉन मेजर यूके
1992 राष्ट्रपति, मारियो सोर्स पुर्तगाल
1991 राष्ट्रपति, मौमून अब्दुल गयूम मालदीव
1990 प्रधानमंत्री, अनिरुद्ध जुगनौत मॉरीशस
1989 गुयेन वैन लिंह वियतनाम
1988 राष्ट्रपति, जुनियस जयवर्द्धने श्रीलंका
1987 राष्ट्रपति, ऐलेन गार्सिया पेरु
1986 प्रधानमंत्री, एँड्रियास पपनड्रीयु ग्रीस
1985 राष्ट्रपति, रॉल अलफोन्सिन अर्जेन्टीना
1984 राजा जिग्मे सिंघे वाँगचुक भूटान
1983 राष्ट्रपति, सेहु शगारी नाइजीरिया
1982 राजा, जॉन कार्लोस प्रथम स्पेन
1981 राष्ट्रपति, जोस लोपेज़ पोरेटील्लो मेक्सिको
1980 राष्ट्रपति, वलेरी गिस्कार्ड द इस्टेइंग फ्रांस
1979 प्रधानमंत्री, मलकोल्म फ्रेज़र ऑस्ट्रेलिया
1978 राष्ट्रपति, पैट्रीक हिलेरी ऑयरलौंड
1977 प्रथम सचिव, एडवर्ड गिरेक पौलैण्ड
1976 प्रधानमंत्री, जैक्स चिराक फ्रांस
1975 राष्ट्रपति, केनेथ कौंडा जांबिया
1974 राष्ट्रपति, जोसिप ब्रौज टीटो यूगोस्लाविया
प्रधानमंत्री, सिरीमावो रतवत्ते दियास बंदरनायके श्रीलंका
1973 राष्ट्रपति, मोबुतु सेस सीको जैरे
1972 प्रधानमंत्री, सीवुसागर रामगुलाम मॉरीशस
1971 राष्ट्रपति, जुलियस नीयरेरे तंजानिया
1970
1969 प्रधानमंत्री, टोडर ज़िकोव बुल्गारिया
1968 प्रधानमंत्री, एलेक्सी कोज़ीगिन सोवियत यूनियन
राष्ट्रपति, जोसिप ब्रोज टीटो यूगोस्लाविया
1967
1966
1965 खाद्य एवं कृषि मंत्री, राना अब्दुल हामिद पाकिस्तान
1964
1963 राजा, नोरोदम शिनौक कंबोडिया
1962
1961 रानी, एलिज़ाबेथ द्वितीय यूके
1960 राष्ट्रपति, क्लिमेंट वोरोशिलोव सोवियत संघ
1959
1958 मार्शल यि जियानयिंग चीन
1957
1956
1955 गर्वनर जनरल, मलिक गुलाम मोहम्मद पाकिस्तान
1954 राजा, जिग्मे दोरजी वाँगचुक भूटान
1953
1952
1951
1950 राष्ट्रपति, सुकर्नों इंडोनेशिया
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