राजस्थान पर्यटन के बारे में

राजस्थान पर्यटन अवसंरचना विकास

पूरे देश में उत्‍तम पर्यटन अवसंरचना का संवर्धन मंत्रालय के कामकाज का प्रमुख क्षेत्र है । योजना स्‍कीमों पर मंत्रालय के व्‍यय का 50 प्रतिशत से अधिक खर्च राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों में विभिन्‍न पर्यटक गंतव्‍यों और परिपथों पर उत्‍तम पर्यटन अवसंरचना के विकास के लिए किया जाता है ।

राजस्थान का सामान्य परिचय

राजस्थान का कुल क्षेत्रफल 3,42,239 वर्गकि.मी. है। जो कि देश का 10.41प्रतिशत है और क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का देश में प्रथम स्थानहै।

1 नवम्बर 2000 को मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ का गठन हुआ और उसी दिन से राजस्थान देश का प्रथम राज्य बना।

2011 में राजस्थान की कुल जनसंख्या 6,86,21,012 थी जो की देश की जनसंख्या का 5.67 प्रतिशत है।

राजस्थान की स्थिति, विस्तार, आकृति, एवं भौतिक स्वरूप

भुमध्य रेखा के सापेक्ष राजस्थान उतरी गोलाद्र्व में स्थित है।

ग्रीन वीच रेखा के सापेक्ष राजस्थान पुर्वी गोलाद्र्व में स्थित है।

ग्रीन वीच व भुमध्य रेखा दोनों के सापेक्ष राजस्थान उतरी पूर्वी गोलाद्र्व में स्थित है।

राजस्थान में पर्यटन विकास

राजस्थान पर्यटन विभाग का पंचवाक्य – जाने क्या दिख जाये।

राजस्थान में सर्वाधिक पर्यटक(देशी व विदेशी दोनों) – 1. पुष्कर – अजमेर 2. माउण्ट आबू – सिरोही।

राजस्थान में सर्वाधिक विदेशी पर्यटक – जयपुर शहर में आते हैं।

राजस्थान में सर्वाधिक विदेशी पर्यटक – 1. फ्रांस 2. ब्रिटेन से आते हैं।

पर्यटन की दृष्टि से राजस्थान को 9 सर्किट 1 परिपथ में बांटा है।

मोहम्मद यूनूस समिति की सिफारिश पर 4 मार्च 1889 को पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्राप्त करने वाला राजस्थान भारत का प्रथम राज्य था।

राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC)

स्थापना – 1978 में

मुख्यालय – जयपुर
कार्य

राजस्थान में पर्यटन विकास हेतु कार्यक्रम, नीतियां और योजनाएं तैयार करना।
पर्यटन स्थल का रखरखााव करना।
पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु मेले व महोत्सव को आयोजित करना।
पर्यटकों की सुविधा हेतु होटल, पर्यटन पुलिस एवम् गाईडों की व्यवस्था करना।

mandawa rajasthan tourism

Rajas-than tourism

पर्यटन त्रिकोण

स्वर्णिम त्रिकोण – दिल्ली – आगरा – जयपुर

मरू त्रिकोण – जैसलमेर – बीकानेर – जोधपुर
पर्यटन सर्किट/परिपथ

मरू सर्किट – जैसलमेर – बीकानेर – जोधपुर – बाड़मेर
शेखावाटी सर्किट – सीकर – झुंझुनू
ढुढाॅड सर्किट – जयपुर – दौसा – आमेर
ब्रज मेवात सर्किट – अलवर – भरतपुर – सवाईमाधोपुर – टोंक
हाड़ौती सर्किट – कोटा – बुंदी – बारा – झालावाड़
मेरवाड़ा सर्किट – अजमेर – पुष्कर – मेड़ता – नागौर
मेवाड़ सर्किट – राजसमंद, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा
वागड़ सर्किट – बांसवाड़ा – डुंगरपुर
गौड़वाड़ सर्किट – पाली – सिरोही – जालौर

Rajasthan pushkar fair

Rajasthan pushkar fair

प्रमुख महोत्सव

1.    अन्तराष्ट्रीय मरू महोत्सव    जैसलमेर    जनवरी – फरवरी
2.     अन्तर्राष्ट्रीय थार महोत्सव    बाड़मेर    फरवरी – मार्च
3.    तीज महोत्सव(छोटी तीज)    जयपुर    श्रावण शुक्ल तृतीया
4.    कजली/बड़ी/सातूडी तीज    बूंदी    भाद्र कृष्ण तृतीया
5.    गणगौर महोत्सव    जयपुर    चैत्र शुक्ल तृतीया
6.    कार्तिक महोत्सव    पुष्कर, अजमेर    कार्तिक पूर्णिमा
7.    वेणेश्वर महोत्सव    डुंगरपुर    माघ पूर्णिमा
8.    ऊंट महोत्सव    बीकानेर    जनवरी
9.    हाथि महोत्सव    जयपुर    मार्च
10.    पतंग महोत्सव    जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर    जनवरी
11.    बैलून महोत्सव    बाड़मेर    वर्ष में चार बार
12.    मेवाड़ महोत्सव    उदयपुर    अप्रैल
13.    मारवाड़    जोधपुर    अक्टुबर
14.    शरद कालीन महोत्सव    माउण्ट आबू    नवम्बर
15.    ग्रीष्म कालीन महोत्सव    माउण्ट आबू    मई
16.    शेखावटी महोत्सव    चुरू – सीकर – झुंझुनू    फरवरी
17.    ब्रज महोत्सव    भरतपुर    फरवरी

Highlights of Rajasthan

Highlights of Rajasthan:  Udaipur Mount Abu Package

राजस्थान पर्यटकों सम्बंधित जानकारी

को ही नहीं देखना चाहते, बल्कि उससे परिचित भी होना चाहते है। प्रदेश के पर्यटक स्थल, कला तथा संस्कृति के साथ यहां का समृद्व साहित्य भी सैलानियों को आकर्षित करता है।

राजस्थान की रंगीली धरती के रंग भी निराले है। कहीं ऊंची नीची अरावली की पहाड़‍ियां है, तो कहीं गुरुशिखर और कहीं पठार और मैदान हैं। राजा-महाराजाओं के इतिहास तथा शौर्य को दर्शाते चितौडगढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, लोहागढ, तथा बालाकिला जैसे विशाल किले तथा दुर्ग और प्राचीन हवेलियों पर उत्कीर्ण स्थापत्य कला सैलानियों के दिल को छूकर राजस्थान के गौरव से परिचित कराती हैं।

रणथंभौर, सरिस्का केवलादेव तथा तालछापार जैसे अभयारण्य वन्य जीव तथा पक्षी प्रेमियों को लुभाते है। सांस्कृतिक वैभव ऐसा है कि जो एक बार राजस्थान आता है वह बार-बार इस धरा पर आने की तमन्ना रखता है।

राजस्थान के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कारगर कदमों का परिणाम है कि विदेशी सैलानियों को लुभाने में राजस्थान देश के शीर्ष पांच राज्यों में शुमार है। भारत आने वाले सौ सैलानियों में से 7 सैलानी पर्यटन के लिए राजस्थान को चुनते है।

राज्य सरकार की ओर से पर्यटन को बढा़वा देने के लिए किए गए प्रयासों से 13 दिसंबर 2008 से 31 अक्टूबर 2012 तक पिछले चार सालों के दौरान राज्य में 49 लाख 30 हजार विदेशी पर्यटक आए, जबकि इस अवधि में राजस्थान आने वाले देशी पर्यटकों की तादाद 1050 लाख 67 हजार रही। पर्यटन विभाग के अनुसार 8 दिसंबर 2003 से 31 अक्टूबर 2007 तक पूर्ववर्ती सरकार के चार वर्षों के दौरान प्रदेश में 42 लाख 59 हजार विदेशी सैलानी आए थे एवं इसी अवधि में 789 लाख एक हजार देशी सैलानी राजस्थान में पर्यटन के लिए भ्रमण पर आए थे।
सरकार ने पर्यटन को बढा़वा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की है, जिससे घरेलू एवं विदेशी सैलानियों में राज्य के पर्यटन स्थल देखने के प्रति आकर्षण बढा़ है। सैलानियों को लुभाने के लिए ग्रामीण पर्यटन पर जोर देकर 26 जिलों के 27 गांव विकसित किए गए हैं। इसमें वर्ष 2009-10 एवं 2010-11 में 7 जिलों के 8 गांवों में विकास कार्य पूरे कराए गए, जिन पर 375 लाख रुपए खर्च हुए।

वर्ष 2011-12 में 12 जिलों के 12 गांवों में 600 लाख रुपए के तथा चालू वर्ष 2012-13 में 7 जिलों के 7 गांवों में 350 लाख रुपए के विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। महानगरों में रहने वाले लोग आपाधापी की इस व्यस्त जिंदगी में कुछ समय गांव की माटी से रू..ब..रू होकर अपने परिवार को सुकून देना चाहते हैं, इससे ग्रामीण पर्यटन को बढा़वा मिल रहा है।

ग्रामीण पर्यटन को बढा़वा देने के मकसद से पर्यटन विभाग ने पहली बार आभानेरी उत्सव का आयोजन 29 से 31 दिसंबर 2008 को चांद बावडी़, आभानेरी दौसा में किया।

राजस्थान को साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में स्थापित करने के दृष्टिकोण से पुष्कर मेले के दौरान 17 से 20 नवंबर 2010 तक अंतरराष्ट्रीय हॉट एयर बैलून उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें 8 देशों की बैलून टीमों ने हिस्सा लिया। अंतरराष्ट्रीय पतंग उत्सव का आयोजन पिछले साल 5 से 7 जनवरी तक उदयपुर में किया गया, जिसमें देश-विदेश के ख्याति प्राप्त पतंगबाजों ने भाग लिया।

साल 2012 में अंतरराष्ट्रीय पतंग उत्सव राजस्थान दिवस समारोह में 28 से 30 मार्च तक आयोजित किया गया, जिसमें देशी तथा विदेशी ख्याति प्राप्त पतंगबाजों ने जौहर दिखाए।

राज्य सरकार की ओर से सैलानियों को आकर्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है कि चार वर्षों के दौरान राजस्थान को 17 पुरस्कारों से नवाजा गया है।

पर्यटन क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने की दृष्टि से राज्य सरकार ने पर्यटन इकाई नीति 2007 की अवधि मार्च 2013 तक बढा़ई है।

इस नीति के तहत पर्यटन इकाइयों के लिए ग्रामीण इलाकों में सरकारी जमीन भूमि का आवंटन, स्थानीय डीएलसी दरों पर किया जा रहा है।

एग्रो प्रोसेसिंग इकाइयों की तरह पर्यटन इकाइयों के लिए जिला कलेक्टर को 10 हैक्टेयर तक भूमि का रूपांतरण करने के अधिकार दिए गए हैं।

प्रदेश में विशेष पर्वों एवं धार्मिक स्थलों के मेलों के सुचारू आयोजन एवं धार्मिक स्थलों पर जाने वाले श्रद्घालुओं की सुरक्षा तथा यात्रा के दौरान आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय मेला प्राधिकरण का गठन किया गया है। राज्य में पर्यटन इकाइयों की 803 परियोजनाएं अनुमोदित की गई हैं, जिनमें लगभग 6143.37 करोड रुपए के विनियोजन की संभावना है।

राजस्थान की कला-साहित्य एवं संस्कृति सबसे समृद्घ एवं गौरवशाली रही है। यहां की वीर प्रसूता भूमि के कण-कण में कला-संस्कृति रची-बसी हुई है।

यूनेस्को ने जयपुर के जंतर-मंतर को वर्ल्ड हेरिटेज साइट सूची में शामिल किया है। चित्तौडगढ़ किला एवं बाडमेर के किराडू मन्दिर समूह को इस सूची में शामिल कराने के लिए पर्यटन विभाग की ओर से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग नई दिल्ली को प्रस्ताव भेजे गए हैं।

इसके अलावा राज्य में स्थित ऐतिहासिक बावड़‍ियों एवं किलों का यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट पर सीरियल नोमिनेशन दर्ज कराने के क्रम में गागरोन किला, झालावाड़, रणथंभौर, सवाई माधोपुर, कुंभलगढ़, राजसमंद, आमेर, जयपुर तथा चित्तौडगढ़ किले के डोजियर तैयार करके यूनेस्को को भेजे गए हैं। पुरातत्व एवं संग्रहालय के तहत प्रदेश के ऐतिहासिक स्मारकों, प्राचीन धरोहरों तथा संग्रहालयों में संरक्षण, जीर्णोद्घार, सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य कराए गए हैं। (वार्ता)

राजस्थान के मेले :

Jodhpur Jaisalmer Tour Package

(A) राज्य के पशु मेले

1. श्रीबलदेव पशु मेला

मेड़ता सिटी (नागौर) में आयोजित होता है।

इस मेले का आयोजन चेत्र मास के सुदी पक्ष में होता हैं

नागौरी नस्ल से संबंधित है।

2. श्री वीर तेजाजी पशु मेला

परबतसर (नागौर) में आयोजित होता है।

श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या तक चलता है।

इस मेले से राज्य सरकार को सर्वाधिक आय होती है।

3. रामदेव पशु मेला

मानासर (नागौर) में आयोजित होता है।

इस मेले का आयोजन मार्गशीर्ष माह में होता है।

इस मेले में नागौरी किस्म के बैलों की सर्वाधिक बिक्री होती है।

4. गोमती सागर पशु मेला

झालरापाटन (झालावाड़) में आयोजित होता है।

इस मेले का आयोजन वैशाख माह में होता है।

मालवी नस्ल से संबंधित है।

यह पशु मेला हाडौती अंचल का सबसे बडा पशु मेला है।

5. चन्द्रभागा पशु मेला

झालरापाटन (झालावाड़) में कार्तिक माह में आयोजित होता है।

मालवी नस्ल से संबंधित है।

6. पुष्कर पशु मेला

कार्तिक माह मे आयोजित होता हैं

इस मेले का आयोजन पुष्कर (अजमेर) में किया जाता है।

गिर नस्ल से संबंधित है।

7. गोगामेड़ी पशु मेला

नोहर (हनुमानगढ़) में आयोजित होता है।

इस मेले का आयोजन भाद्रपद माह में होता है।

हरियाणवी नस्ल से संबंधित है।

राजस्थान का सबसे लम्बी अवधि तक चलन वाला पशु मेला है।

8. शिवरात्री पशु मेला

करौली मे फाल्गुन मास में आयोजित होता है।

हरियाणवी नस्ल से संबंधित है।

9. जसवंत प्रदर्शनी एवं पुश मेला

इस मेले का आयोजन आश्विन मास में होता है।

हरियाणवी नस्ल से संबंधित है।

10. श्री मल्लीनाथ पशु मेला

तिलवाडा (बाड़मेर) में इस मेले का आयोजन होता है।

यह मेला चैत्र कृष्ण ग्यारस से चैत्र शुक्ल ग्यारस तक लूनी नदी के तट पर आयोजित किया जाता है।

थारपारकर (मुख्यतः) व काॅकरेज नस्ल की बिक्री होती है।

देशी महीनों के अनुसार सबसे पहले आने वाला पशु मेला है।

11. बहरोड़ पशु मेला

बहरोड (अलवर) में आयोजित होता है।

मुर्राह भैंस का व्यापार होता है।

12. बाबा रधुनाथ पुरी पशु मेला

सांचैर (जालौर) में आयोजित होता है।

13. सेवडिया पशु मेला

रानीवाडा (जालौर) में आयोजित होता है।

रानीवाड़ा राज्य की सबसे बडी दुग्ध डेयरी है।

(B) राजस्थान के लोक मेले

1. बेणेश्वर धाम मेला (डूंगरपुर)

सोम, माही व जाखम नदियों के संगम पर मेला भरता है।

यह मेला माघ पूर्णिमा को भरता हैं

इस मेले को बागड़ का पुष्कर व आदिवासियों मेला भी कहते है।

प्राचीन शिवलिंग स्थित है।

संत माव जी को बेणेश्वर धाम पर ज्ञान की प्राप्ति हुई।

2. घोटिया अम्बा मेला (बांसवाडा)

यह मेला चैत्र अमावस्या को भरता है।

इस मेले को “भीलों का कुम्भ” कहते है।

3. भूरिया बाबा/ गोतमेश्वर मेला (अरणोद-प्रतापगढ़)

यह मेला वैशाख पूर्णिमा को भरता हैं

इस मेले को “मीणा जनजाति का कुम्भ” कहते है।

4. चैथ माता का मेला (चैथ का बरवाडा – सवाई माधोपुर)

यह मेला माध कृष्ण चतुर्थी को भरता है।

इस मेले को “कंजर जनजाति का कुम्भ” कहते है।

5. गौर का मेला (सिरोही)

यह मेला वैशाख पूर्णिमा को भरता है।

इस मेले को ‘ गरासिया जनजाति का कुम्भ’ कहते है।

6. सीताबाड़ी का मेला (केलवाड़ा – बांरा)

यह मेला ज्येष्ठ अमावस्या को भरता है।

इस मेले को “सहरिया जनजाति का कुम्भ” कहते है।

हाडौती अंचल का सबसे बडा मेला है।

7. पुष्कर मेला (पुष्कर अजमेर)

 

यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।

मेरवाड़ा का सबसे बड़ा मेला है।

इस मेले के साथ-2 पशु मेले का भी आयोजन होता है जिसे गिर नस्ल का व्यापार होता है।

यह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का मेला है।

इस मेले को “तीर्थो का मामा” कहते है।

यह राजस्थान का सबसे रंगीन मेला है।

8. कपिल मुनि का मेला (कोलायत-बीकानेर)

यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।

मुख्य आकर्षण “कोलायत झील पर दीपदान” है।

कपिल मुनि सांख्य दर्शन के प्रणेता थे।

जंगल प्रेदश का सबसे बड़ा मेला कहलाता है।

9. साहवा का मेला (चूरू)

यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।

सिंख धर्म का सबसे बड़ा मेला है।

10. चन्द्रभागा मेला (झालरापाटन -झालावाड़)

यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।

चन्द्रभागा नदी पर बने शिवालय में पूजन होता हैं

झालरापाटन को घण्टियों का शहर कहते है।

इस मेले के साथ-2 पशु मेला भी आयोजित होता है, जिसमें मुख्यतः मालवी नसल का व्यापार होता है।

11. भतर््हरि का मेला (अलवर)

यह मेला भाद्रशुक्ल अष्टमी को भरता हैं

इस मेले का आयोजन नाथ सम्प्रदाय के साधु भर्त्हरि की तपोभूमि पर होता हैं

भूर्त्हरि की तपोभूमि के कनफटे नाथों की तीर्थ स्थली कहते है।

मत्स्य क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला है।

12. रामदेव मेला (रामदेवरा-जैसलमेर)

इस मेले का आयोजन रामदेवरा (रूणिचा) (पोकरण) में होता है।

इस मेले में आकर्षण का प्रमुख केन्द्र तेरहताली नृत्य है जो कामड़ सम्प्रदाय की महिलाओं द्वारा किया जाता है।

साम्प्रदायिक सदभावना का सबसे बडा मेला है।

तेरहताली नृत्य का उत्पत्ति स्थल पादरला गांव (पाली) है।

13. बीजासणी माता का मेला (लालसोट-दौसा)

यह मेला चैत्र पूर्णिमा को भरता है।

14. कजली तीज का मेला (बूंदी)

यह मेला भाद्र कृष्ण तृतीया को भरता है।

15. मंचकुण्ड तीर्थ मेला (धौलपुर)

यह मेला अश्विन शुक्ल पंचमी को भरता है।

इस मेले को तीर्थो का भान्जा कहते है।

16. वीरपुरी का मेला (मण्डौर – जौधपुर)

यह मेला श्रावण कृष्ण पंचमी को भरता है।

श्रावण कृष्ण पंचमी को नाग पंचमी भी कहते है।

17. लोटियों का मेला (मण्डौर -जोधपुर)

यह मेला श्रावण शुक्ल पंचमी को भरता है।

18. डोल मेला (बांरा)

यह मेला भाद्र शुक्ल एकादशी को भरता है।

इस मेले को श्री जी का मेला भी

19. फूल डोल मेला (शाहपुरा- भीलवाडा)

यह मेला चैत्र कृष्ण एकम् रो चैत्र कृष्ण पंचमी तक भरता है।

की पीठ स्थापित है।

20. अन्नकूट मेला (नाथ द्वारा- राजसंमंद)

यह मेला कार्तिक शुक्ल एकम को भरता है।

अन्नकूट मेला गोवर्धन मेले के नाम से भी जाना जाता है।

21. भोजनथाली परिक्रमा मेला (कामा-भरतपुर)

यह मेला भाद्र शुक्ल दूज को भरता है।

22. श्री महावीर जी का मेला (चान्दनपुर-करौली)

यह मेला चैत्र शुक्ल त्रयोदशी से वैशाख कृष्ण दूज तक भरता है।

यह जैन धर्म का सबसे बड़ा मेला है।

मेले के दौरान जिनेन्द्ररथ यात्रा आकर्षण का मुख्य केन्द्र होती है।

23. ऋषभदेव जी का मेला (धूलेव-उदयपुर)

मेला चैत्र कृष्ण अष्टमी (शीतलाष्टमी) को भरता है।

जी को केसरिया जी, आदिनाथ जी, धूलेव जी, तथा काला जी आदि नामों से जाना जाता है।

24. चन्द्रप्रभू का मेला (तिजारा – अलवर)

यह मेला फाल्गुन शुक्ल सप्तमी को भरता हैं

यह जैन धर्म का मेला है।

25. बाड़ा पद्य्पुरा का मेला (जयपुर)

यह जैन धर्म का मेला है।

26. रंगीन फव्वारों का मेला (डींग-भरतपुर)

यह मेला फाल्गुन पूर्णिमा को भरता है।

27. डाडा पम्पा राम का मेला (विजयनगर-श्रीगंगानगर)

यह मेला फाल्गुन माह मे भरता है।

28. बुढ़ाजोहड़ का मेला (डाबला-रायसिंह नगर-श्री गंगानगर)

श्रावण अमावस्या को मुख्य मेला भरता है।

29. वृक्ष मेला (खेजड़ली- जोधपुर)

यह मेला भाद्र शुक्ल दशमी को भरता है।

भारत का एकमात्र वृक्ष मेला है।

30. डिग्गी कल्याण जी का मेला (टोंक)

कल्याण जी विष्णु जी के अवतार माने जाते है।

कल्याण जी का मेला श्रावण अमावस्या व वैशाख में भरता है।

31. गलता तीर्थ का मेला (जयपुर)

यह मेला मार्गशीर्ष एकम् (कृष्ण पक्ष) को भरता है।

रामानुज सम्प्रदाय की प्रधान पीठ गलता (जयपुर) में स्थित है।

32. माता कुण्डालिनी का मेला (चित्तौडगढ)

यह मेला चित्तौडगढ के राश्मि नामक स्थान पर भरता है।

मातृकुण्डिया स्थान को ” राजस्थान का हरिद्वारा” कहते है।

33. गणगौर मेला (जयपुर)

यह मेला चैत्र शुक्ल तृतीयया को भरता है।

जयपुर का गणगौर मेला प्रसिद्ध है।

बिन ईसर की गवर, जैसलमेर की प्रसिद्ध है।

जैसलमेर में गणगौर की सवारी चैत्र शुक्ल चतुर्थी को निकाली जाती है।

34. राणी सती का मेला (झुनझुनू)

यह मेला भाद्रपद अमावस्या का भरता था।

इस मेले पर सती प्रथा निवारण अधिनियम -1987 के तहत् सन 1988 को रोक लगा दी गई।

35. त्रिनेत्र गणेश मेला (रणथम्भौर -सवाई माधोपुर)

यह मेला भाद्र शुक्ल चतुर्थी को भरता है।

36. चुन्धी तीर्थ का मेला (जैसलमेर)

श्री गणेश जी से संबंधित मेला है।

“हेरम्भ गणपति मंदिर” बीकानेर में है।

इस मंदिर में गणेश जी को शेर पर सवार दिखाया गया है।

37. मानगढ़ धान का मेला (बांसवाडा)

यह मेला आश्विन पूर्णिमा को भरता है।

गोविंद गिरी की स्मृति मे भरता है।

38. खेतला जी का मेला (पाली)

यह मेला चैत्र कृष्ण एकम् को भरता है।

39. गोगा जी का मेला – गोगामेडी- नोहर- हनुमानगढ़ में भाद्र कृष्ण नवमी पर लगता है।

40. तेजा जी का मेला – परबतसर – नागौर में भाद्र शुक्ल दशमी को।

41. करणी माता का मेला -देशनोक-बीकानेर में नवरात्रों के दौरान।

42. शीतला माता का मेला- चाकसू-जयपुर में चैत्र कृष्णअष्टमी। शीतलाअष्टमी

43. जीण माता का मेला – रेवासा-सीकर में नवरात्रों के दौरान।

44. थार महोत्सव – बाडमेर में।

45.मरू महोत्सव- जैसलमेर मे (माघ माह मे)

46.हाथी महोत्सव – जयपुर मे।

47.मेवाड़ महोत्सव -उदयपुर में।

48.बृज महोत्सव – भरतपुर में।

49.मारवाड़ महोत्सव – जोधपुर मे।

50. बूंदी महोत्सव – बूंदी में।

51. ऊंट महोत्सव – बीकानेर।

52. मीरा महोत्सव – चित्तौड़गढ में आश्विन/शरद पूणिमा को

53. पतंग महोत्सव – जयपुर में मकर संक्रांति को।

54. गुब्बारा महोत्सव – बाड़मेर मे।

55. ग्रीष्म व शरद महोत्सव – माऊंट आबू (सिरोही)

उर्स

1. गरीब नवाज का उर्स

अजमेर मे।

ख्वाजा मुइनूद्दीन चिश्ती की याद में।

रज्जब 1 से 6 तक भरता है।

यह उर्स सबसे बड़ा उर्स है।

2. तारकीन का उर्स

नागौर मे।

संत हमीदुद्ीन नागौरी की स्मृति मे।

यह उर्स दूसरा सबसे बड़ा उर्स है।

3. गलियाकोट का उस

गलिययाकोट (डूंगरपुर) मे।

पीर फखरूद्दीन की स्मृति मे।

गलियाकोट (डूंगरपुर) में बोहरा सम्प्रदाय की पीठ स्थित है।

4. नरहड़ के पीर का उर्स

चिड़ावा (झुनझूनू) मे।

हजरत श्शक्कर बाबा की स्मृति में।

इन्हें बांगड़ का धणी कहते है।

यह उर्स भाद्र कृष्ण अष्टमी (कृष्ण जन्माष्टमी) को भरता है।

अन्य मुस्लिम स्थल

1.प्रहरी मीनार/एक मीनार मस्जिद – जोधपुर

2. गमता गाजी की मजार – जोधपुर

3. गुलाम कलन्दर की मजार – जोधपुर

4. गुलाम खां का मकबरा – जोधपुर

5. भूरे खां की मजार – जोधपुर

6. नेहरू खां की मजार – कोटा

7. अलाउद्दीन खिलजी की मजार -जालौर

8. अकबर का मकबरा – आमेर (जयपुर)

9. जामा मस्जिद – भरतपुर

10. ऊषा मस्ज्दि – बयाना (भरतपुर)

11. शेरखां की मजार – हनुमानगढ़

12. खुदा बक्ष बाबा की दरगाह -पाली

13. मीरान साहब/ सैयद खां की दरगाह -अजमेर

14. पीर ढुलेशाह की दरगाह -पाली

15. कमरूद्दीन शाह की दरगाह -झुनझुनू

16. घोडे़ की मजार – अजमेर

 

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